दिलीप खान-
हारते ही बोरिया-बिस्तर बांधकर अमेरिका भाग जाना हर देश में रहने वाले अमेरिकी दल्लों के लिए अब एक पैटर्न बन चुका है। फ़्लावियो बोलसोनारो ने ताज़ा-ताज़ा इस क्लब की सदस्यता ली है।

ब्राज़ील में लूला से हारते ही फ़्लावियो ने एलान किया कि वे हार नहीं मानेंगे। अगले दिन अदालत ने उन्हें पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पर वीडियो डालकर वादा किया कि वे आदेश मानेंगे और ब्राज़ील में ही रहकर विपक्ष की अगुवाई करेंगे।
दो दिन भी वादे पर नहीं टिक पाया। न पासपोर्ट जमा किया, न ब्राज़ील में रहा। भागकर अपने असली देश अमेरिका चला गया, जिसकी वह ब्राज़ील में दलाली कर रहा था।
फटाफट समूचे परिवार को वीज़ा मिला और चुपचाप अमेरिका चला गया।
फ़्लावियो के भाई एडुआर्डो ने चुनाव से एक दिन पहले ही एक पॉडकास्ट में इशारा किया था कि हारने पर फ़्लावियो देश छोड़ सकते हैं, क्योंकि उन पर भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है।
लूला ने इसे शर्मनाक बताया है।
दिसंबर 2022 में हारने के बाद फ़्लावियो के पिता जायर बोलसोनारो भी भागकर अमेरिका चले गए थे। वह ख़ुद अमेरिका में था और ब्राज़ील में अपने समर्थकों को हुलेलेले करने को छोड़ दिया। जनवरी 2023 को उनके समर्थकों ने ब्राज़ीलिया में संसद, राष्ट्रपति भवन, और सुप्रीम कोर्ट पर धावा बोल दिया। बाद में तख़्तापलट की साज़िश में उन्हें 27 साल से ज़्यादा की सज़ा हुई।
यह पैटर्न आपको पूरब से पश्चिम तक हर जगह दिखाई देगा। एक ईरानी जोकर है रज़ा पहलवी। वह अमेरिका में रहकर ईरान में तख़्तापलट का ख़्वाब देखता रहता है और ख़ुद को ‘निर्वासित युवराज’ बताता है।
फ़िलीपींस के तानाशाह फ़र्डिनेंड मार्कोस को 1986 में अमेरिका ख़ुद विमान में बिठाकर हवाई द्वीप ले गया था।
नोबेल पाने वाली अमेरिका की एजेंट वेनेज़ुएला की मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिकी फ़ौज की मदद से देश छोड़ा। बाद में नोबेल शांति पुरस्कार ट्रंप को समर्पित किया। सुन रहा हूं कि वेनेज़ुएला में अमेरिकी सरकार बनने के बाद वापस लौट आई है।
जो लोग अपने वतन में वॉशिंगटन की चौकीदारी करते हैं, हारते ही डर जाते हैं कि जनता खदेड़ेगी और डर के मारे भाग जाते हैं।
पता नहीं किस-किस देश में कौन-कौन वफ़ादार है। एप्सटीन वाले भी कई लोग कई मुल्कों में हैं। अपने यहां का मुझे पता नहीं।
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