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उत्तर प्रदेश

माटी कला को आधुनिक तकनीक, उद्यमिता और बाजार से जोड़कर शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बना रही सरकार : राकेश सचान

An Indian official in an orange vest stands at a table with two orange donation/ceremony machines while a crowd holds up certificates and takes photos at an event stall.

अनिल कुमार-

  • खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री ने माटी कला महोत्सव-2026 एवं राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का किया शुभारंभ
  • 10 जनपदों में स्थापित हुए कॉमन फैसिलिटी सेंटर, 1,300 से अधिक उद्यमों की स्थापना

लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सरकार पारंपरिक कला एवं शिल्प को रोजगार, स्वरोजगार और ग्रामीण उद्यमिता से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में बुधवार को खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री श्री राकेश सचान ने डालीबाग स्थित खादी भवन प्रांगण में उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड द्वारा आयोजित 11 दिवसीय माटी कला महोत्सव-2026 एवं भव्य राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर उपस्थित रहे।

‘मिट्टी से संस्कृति, संस्कृति से समृद्धि’ की थीम पर आयोजित यह महोत्सव 28 अक्टूबर से 7 नवंबर, 2026 तक चलेगा। इसमें प्रदेश के विभिन्न जनपदों के शिल्पकारों द्वारा निर्मित पारंपरिक एवं आधुनिक माटी कला उत्पादों, गृह-सज्जा की वस्तुओं और कलाकृतियों की प्रदर्शनी एवं बिक्री की जा रही है। महोत्सव शिल्पकारों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और विपणन का अवसर उपलब्ध कराने के साथ माटी कला की समृद्ध परंपरा को व्यापक पहचान दिलाने का माध्यम बनेगा।

उद्घाटन के अवसर पर मंत्री राकेश सचान ने कहा कि माटी कला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण जीवन का अभिन्न अंग है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस पारंपरिक कला से जुड़े कारीगरों को आधुनिक तकनीक, उन्नत उपकरण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है। उद्देश्य है कि शिल्पकारों की आय बढ़े, उनकी कला को नई पहचान मिले और पारंपरिक कौशल रोजगार एवं उद्यमिता के नए अवसरों में परिवर्तित हो।

मंत्री ने कहा कि बदलती बाजार मांग के अनुरूप माटी कला उत्पादों को विकसित करना आवश्यक है। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और डिजिटल विपणन पर ध्यान दिया जा रहा है। शिल्पकारों को आधुनिक उत्पादन तकनीक से जोड़ने के साथ उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे उन्हें अपने परिश्रम का उचित मूल्य मिल सके।

48 हजार से अधिक शिल्पकार परिवार चिह्नित

उत्तर प्रदेश माटी कला बोर्ड की स्थापना 19 जुलाई, 2018 को हुई थी। बोर्ड के माध्यम से अब तक 48,000 से अधिक शिल्पकार परिवारों को चिह्नित किया जा चुका है। कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लगभग 40,000 शिल्पकारों को मिट्टी प्राप्त करने हेतु भूमि एवं पट्टा संबंधी सुविधाओं से लाभान्वित किया गया है। इससे पारंपरिक माटी कला से जुड़े परिवारों को अपने व्यवसाय के संचालन में सहायता मिल रही है।

18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित

माटी कला के आधुनिकीकरण और शिल्पकारों की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रदेश में अब तक 18,400 से अधिक विद्युत चालित चाक वितरित किए जा चुके हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 2,740 अतिरिक्त विद्युत चालित चाक उपलब्ध कराने के साथ पॉटरी एवं दीया निर्माण से संबंधित आधुनिक उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन सुविधाओं से कारीगरों को उत्पादन प्रक्रिया में सुधार करने और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद तैयार करने में मदद मिल रही है।

मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना से बढ़ रहे स्वरोजगार के अवसर

मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता एवं बैंक ऋण के माध्यम से अब तक 1,300 से अधिक उद्यम स्थापित किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में 300 अतिरिक्त उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योजना के माध्यम से माटी कला से जुड़े लोगों को अपना व्यवसाय शुरू करने और पारंपरिक शिल्प को आर्थिक गतिविधि के रूप में आगे बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

10 जनपदों में स्थापित किए गए कॉमन फैसिलिटी सेंटर

शिल्पकारों को साझा अवसंरचना और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पीलीभीत, रामपुर, कन्नौज, अमरोहा, बाराबंकी, फिरोजाबाद, बिजनौर, अमेठी, बरेली और जालौन में कुल 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से शिल्पकारों को उत्पादन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने और उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

4,900 शिल्पकारों के कौशल उन्नयन का लक्ष्य

शिल्पकारों को आधुनिक तकनीक, उपकरण संचालन और उद्यम प्रबंधन में दक्ष बनाने के लिए चालू वित्तीय वर्ष में लगभग 4,900 शिल्पकारों को प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त, शिल्पकारों को संगठित करने, उनकी सामूहिक उद्यमिता और बाजार में सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से 128 सहकारी समितियां पंजीकृत की गई हैं। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए मंडल एवं राज्य स्तर पर पुरस्कार प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है।

शिल्पकारों को वितरित किए गए उपकरण एवं ऋण स्वीकृति पत्र

महोत्सव के उद्घाटन अवसर पर शिल्पकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पांच शिल्पकारों को निःशुल्क विद्युत चालित चाक तथा दो शिल्पकारों को पग मिल प्रदान किए गए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना के लाभार्थियों को ऋण स्वीकृति चेक वितरित किए गए। इन पहलों का उद्देश्य शिल्पकारों को उत्पादन के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना और उन्हें स्वरोजगार के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

माटी कला महोत्सव-2026 प्रदेश की पारंपरिक शिल्पकला को प्रोत्साहित करने, स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में तकनीकी उन्नयन, कौशल विकास, वित्तीय सहायता और विपणन सुविधाओं के माध्यम से माटी कला को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। मंत्री ने नागरिकों से स्थानीय शिल्पकारों द्वारा निर्मित माटी कला उत्पादों को अपनाने तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

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