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सुधीर चौधरी का मानसिक दिवालियापन!

शराब के लिए पैसे हैं, लेकिन रेल के भाड़े के लिए नहीं। – सुधीर चौधरी

सोचा था घटिया आदमी पर अपना वक्त क्यों बर्बाद करूं, लेकिन क्या करें, इनको यूं ही तो नीचता पर उतारु नहीं होने दे सकते।

जी न्यूज़ के एडिटर इन चीफ का मानसिक दिवालियापन है कि उसे शराब के लिए लाइन में लगने वालों में प्रवासी मजदूर नजर आ रहे हैं।

अब कल्पना कर रहा हूं कि इसके साथ काम करने वाले लोगों को किस तरह के मानसिक त्रास से गुजरना पड़ता होगा।

ये किस तरह की बातें न्यूज़ रूम में करता होगा!

आईआईएमसी को अपने इस एल्म्नाय को हर तरह की सदस्यता से निष्कासित करना चाहिए।

पत्रकार रोमेश साहू का FB स्टेटस.

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