आलोक शुक्ला-
छत्तीसगढ़ | 6 वर्षो बाद छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जन जाति आयोग की जाँच में यह स्पष्ट हो गया कि सरगुजा जिला प्रशासन के अधिकारियों और अदानी कम्पनी ने मिलकर वर्ष 2017-18 में परसा कोल ब्लॉक प्रभावित गाँव की ग्रामसभाओं के फर्जी कूटरचित दस्तावेज तैयार किये थे।
इन फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव की जाँच के लिए थाना से लेकर कलेक्टर तक शिकायतों के बाद हसदेव के ग्रामीण 300 किलोमीटर पदयात्रा करके रायपुर पहुंचे।
पदयात्रियो से मिलने के बाद तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उईके जी ने कहा कि आदिवासियों के साथ अन्याय होने नही दिया जायेगा वह उनकी प्रशासक हैं। उन्होंने 23 अक्टूबर 2021 को मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव की जाँच करने और तब तक सभी कार्यवाही स्थगित रखने का आदेश दिया।
राज्यपाल के आदेश को दरकिनार करके केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने इस कोल ब्लॉक को 2021 में ही वन स्वीकृति जारी कर दी। ग्रामसभाओं की जाँच किये बिना ही तत्कालीन भूपेश सरकार ने 7 अप्रेल 2022 को इसी कोल ब्लॉक की वन स्वीकृति के अंतिम आदेश को भी जारी कर दिया।
भाजपा की विष्णुदेव साय सरकार ने इसी कोल ब्लॉक के लिए भारी पुलिस बल के साथ आदिवासियों पर लाठी और पेट्रोल बम फेंकते हुए पेड़ो की कटाई करवा दी जबकि विपक्ष में रहकर भाजपा इसका विरोध कर रही थी।
आन्दोलन अभी भी जारी है लेकिन सरकार अदानी की लूट और मुनाफे के लिए आदिवासियों के संविधान अधिकारों को कुचलकर हसदेव के समृद्ध जंगल का विनाश कर रही है।
इस रिपोर्ट को कैसे भी दबाया जाये इसके लिए भी सत्ता और पूंजीपति का गठजोड़ पूरी ताकत से लगा हुआ है।
आलोक पुतुल-
हसदेव अरण्य में अडानी के एमडीओ वाले कोयला खदानों के लिए स्वीकृतियाँ कैसे हासिल की गईं, इसकी जांच सरकार के ही आयोग ने की और 4 नवंबर को कलेक्टर को चिट्ठी लिखी है.
आदिवासियों की शिकायत और आदिवासी आयोग की जांच पर छत्तीसगढ़ के आदिवासी मुख्यमंत्री का रुख क्या होगा, यह देखना दिलचस्प है.






