

चर्चित आईपीएस अधिकारी (रिटायर) अमिताभ ठाकुर और उनकी वकील पत्नी नूतन ठाकुर के खिलाफ एक विस्तृत एफआईआर लखनऊ में दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता संजय शर्मा (ये 4pm वाले नहीं हैं) ने आरोप लगाया है कि दोनों ने मिलकर फर्जी दस्तावेजों, जाली हलफनामों और फर्जी पहचान पत्रों का सहारा लेकर सरकारी विभागों को गुमराह किया तथा औद्योगिक भूखंडों और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाया।
एफआईआर के मुताबिक, नूतन ठाकुर ने 1999 से 2002 के बीच अपने और पति के अलग-अलग नामों से दस्तावेज तैयार कर औद्योगिक क्षेत्र देवघर, बिहार सीतामढ़ी और अन्य स्थानों पर भूखंड के लिए आवेदन किया। इस दौरान फर्जी हलफनामे और कूट रचित पहचान पत्रों का इस्तेमाल कर औद्योगिक विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों को धोखे में रखा गया।
आरोप यह भी है कि नूतन ठाकुर ने अपनी निजी कंपनियों के नाम पर धोखाधड़ी करके औद्योगिक भूखंड हड़पने का प्रयास किया और बाद में इन भूखंडों को अवैध रूप से बेचकर अथवा ट्रांसफर कर आर्थिक लाभ लिया। अमिताभ ठाकुर पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभावशाली पद और पहचान का दुरुपयोग करते हुए अपनी पत्नी की मदद की तथा विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि इन फर्जीवाड़ों से सरकारी राजस्व को हानि हुई और भूमि घोटाले, मनी लॉन्ड्रिंग व कर चोरी की आशंका भी जताई गई है। एफआईआर में आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 120B, 166, 217 समेत कई गंभीर धाराएं लगाई गई हैं।
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि मामले की जांच CBCID, SIT या CBI जैसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही आरोपियों की संपत्तियों की जब्ती, बैंक खातों की सीलिंग और तत्काल गिरफ्तारी की भी मांग की गई है।
स्पष्ट है कि अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर लगातार सरकार की पोलखोल करते रहते हैं तो उन्हें बहुविध प्रताड़ित करने का तरीका निकाला जाता है। कभी जेल भेजा जाता है तो कभी पुलिस बल के ज़रिए ही डराया धमकाया जाता है। तो कभी गड़े मुर्दे उखाड़ते हुए मुकदमा लिख लिया जाता है। बड़े बड़े घोटालेबाज सत्ता संरक्षण में घूम रहे हैं और एक्टिविस्ट किस्म के लोग प्रताड़ना झेल रहे हैं।
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