शासन सत्ता की पोल खोल में जुटे अमिताभ ठाकुर नूतन ठाकुर पर योगी सरकार ने फिर एक झूठा केस दर्ज करा दिया है, योगी राज में ही अमिताभ ठाकुर को जेल भेजा गया था! एक्टिविस्टों और व्हिसल ब्लोवर्स का क्या हाल बना रखा है योगी सरकार ने! पर अमिताभ ठाकुर झुकेगा नहीं! पढ़िये उनका वक्तव्य-
आज हम अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर ने थाना ताल कटोरा में हमारे ऊपर दर्ज एफआईआर के मामले में विवेचक को पत्र लिखकर इस मामले की असत्य होने की बात कहते हुए विवेचना में हर स्तर पर पूर्ण सहयोग करने की बात कही है.

हमने कहा है कि इस मुकदमे में 62 पृष्ठों के 18 संलग्नक की बात कही गई है, जो हमारे पास उपलब्ध नहीं है.
अतः हमने विवेचन से उन 62 पृष्ठों के 18 संलग्नक की प्रति प्रदान करने का अनुरोध किया है ताकि हम आरोपों को पूरी तरह समझ कर उनका सही उत्तर विवेचक के सामने प्रस्तुत कर सकें.
जैसे ही हमें उक्त अभिलेख प्राप्त हो जाएंगे हम स्वयं विवेचक के सामने उपस्थित होकर अपने तथ्य प्रस्तुत करेंगे.
अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर
अंधा युग! धर्मवीर भारती!! सही लिखा था!!!
जबरिया रिटायर्ड IPS अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पर साल 1999 के मामले में साल 2025 में गंभीर धाराओं में एफआईआर लिखी जा रही है।
लिखिए कौन रोकता है?
दैनिक भास्कर के पत्रकार पर एक IAS के खिलाफ प्रमाणिक शिकायत की रिपोर्ट करने पर गंभीर धाराओं में एफआईआर लिखी जा रही है।
इसे भी लिखिए कौन रोकता है?
योगी और राजा भैया से टकरा चुके IPS जसवीर सिंह की नौकरी महज एक इंटरव्यू पर खत्म करने के लिए जमीन आसमान एक किया जा रहा है।
बिल्कुल कीजिए। आप राजा हैं!!
मगर अब जरा सिक्के का दूसरा पहलू भी देखिए।
जिस “कुटुंबीय” पत्रकार के बेटे की कार ने बीच राजधानी एक निरीह को रौंद डाला, उसका नाम आज तक एफआईआर में अज्ञात है! क्यों?
जिस घटना को लखनऊ का एक-एक पत्रकार जानता है और जिस व्यक्ति को इस वारदात के बाद उसके तत्कालीन चैनल ने आत्मचिंतन की फुल्की में थोड़ी सी शर्म का पानी घोलकर नौकरी से बाहर निकाल दिया,
उसकी यूपी पुलिस को आज तक खबर नहीं है!! क्यों? कौन हैं उसके रक्षक?
दैनिक भास्कर पर हुई एफआईआर के दौर में इतिहास इस तथ्य को कैसे भूल सकता है कि स्वयं मुख्यमंत्री इस आदमी को भरी जनसभा में ‘युवा समाज सेवी’ का पद्म विभूषण अलंकरण प्रदान करते हैं!!
हे राजन! क्या आपका ज़ीरो टॉलरेंस इन मामलों में नींद की बेंजोडायजेपाइन टैबलेट गटककर औंधे मुंह सो जाता है?
आखिर क्यों जबरिया रिटायर्ड IPS अमिताभ ठाकुर पर तो बुलेट ट्रेन की रफ्तार से एक्शन हो जाता है, दूसरे अमिताभों पर एक्शन की सोचने में ही कल्पना की देह को लकवा मार जाता है?
जबकि उनके खिलाफ आरोपों की वैसी ही भरमार है, जैसे चांद की सतह पर गढ्ढे!!! जैसे गेहूं के खेत में पराली, जैसे किसी मंदिर के बाहर दान के इंतज़ार में गरीब की थाली!!
हे राजन!! मनुष्य नियति से ताकतवर कभी नहीं हो सकता।
अगर वो सत्य की राह पर चले तो यही उसका सौभाग्य और अगर असत्य का पथगामी बने तो यही सबसे बड़ा दुर्भाग्य!!
इसीलिए हाथों में पक्षपात की तलवार लेकर नियति से मत टकराइए!!
इसने वास्तविक शौर्य के बड़े बड़े एलेक्जेंडर उखाड़ फेंके हैं,
आप तो वैसे भी महज चंद आश्चर्यजनक परिस्थितियों की माया के रचे हुए सम्राट हैं!!
-अभिषेक उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार)
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S Rai
September 14, 2025 at 10:24 am
बहुत ही अच्छी तरह से आपने लिखा है, सराहनीय एवं धन्यवाद