मनीष दुबे-
टाइम्स नाउ नवभारत के शो ‘सवाल पब्लिक का’ की डिबेट का एक वीडियो खूब वायरल है. विभिन्न प्रकार के लोग भांति-भांति की लंतरानी छोड़ रहे हैं. किसी ने लिखा कि आशुतोष की बेइज्जती हो गई. तो कोई कह रहा- क्या किसी डॉक्टर ने बताया था कि गोदी मीडिया की डिबेट में जाओ? मतलब, जितने मुंह उतनी नसीहतें.
सुनों, डिबेट में मुंह से हुई बकैती में CRPC 154 का मुकदमा है. और सुनों, इस डिबेट में यदि मारपीट या इसकी स्थिति बनती तो आईपीसी की धारा 323 के तहत जानबूझकर झगड़ा करने, चोट पहुंचाने पर एक वर्ष की सजा और आर्थिक जुर्माना लग सकता है. यह धारा उन परिस्थितियों में बढ़ भी सकती है जब किसी पक्ष के गंभीर चोट आ जाए. ऐसा होने पर धारा 308, 302 और धारा 148 के तहत भी सजा हो सकती है.
अब इसमें जिम्मेदारी किसकी थी? चैनल की, नविका कुमार की, वहां मौजूद टीम की. हालांकि, एंकर नविका ने प्रयास किया. बहुत कुछ निकल जाने तक! अब वो अलग बात है किसी को टीआरपी मिली किसी को सहानुभूति.
पिछले दिनों जानी-मानी पत्रकार, निधि कुलपति ने बीती 29 अगस्त 024 को बरेली में कहा था कि “बातचीत से शुरू हुए न्यूज चैनल्स अब चिल्लाहट तक पहुंच गए हैं.” अबकी ताजी भाषा में इस चिल्लाहट को लात जूता होने की नौबत के तौर पर लिया जाता है. धक्कामुक्की के इर्द-गिर्द एक आध का हाथ छूट ही जाता है. शुक्र है, आशुतोष जी ने नरमी बरती. मसले पर जितना हल्ला मचा, यू्ट्यूब पर उस मुताबिक व्यूअर्स नहीं दिख रहे हैं. टाइम्स नाउ चैनल पर कुल तीन वीडियो शेयर किए गए हैं. तीनों में 15k, 16k और एक अभी छह घंटे पहले पड़े वीडियो में 26k व्यू हैं.
टाइम्स नाउ नवभारत का न पूछिए तो ही ठीक है. ज्यादा चुल्ल उठ रही तो, जानिए.. किसी में 100, किसी में 70-36 से ऊपर नंबर नहीं हैं.
अब फायदा, घाटा- नफा नुकसान का क्या सिस्टम है, नीचे बहुत कुछ लिखा है. इसके अलावा अभिसार शर्मा जी बड़े पत्रकार हैं, उन्होंने नाम लिए बगैर (इशारों में) किसी के लिए कोई संदेश छोड़ा है, जाते जाते पढ़ते जाइएगा.

कन्हैया शुक्ला-
वैसे इतना आश्चर्य नहीं करना चाहिए कभी-कभी जब दुकान न चले तो स्क्रीन पर स्क्रिप्टेड ये सब धंधे का पार्ट है. आशुतोष जी. पत्रकारिता से ले के राजनीतिक तक सब कुछ घिस डाले. पर मिला क्या? कभी आप पार्टी अब नेहरू की डीपी तक सब करके देख लिए तो ये भी कर लिए!
आनंद रंगनाथन और आशुतोष दोनों के साथ-साथ नविका कुमार ने भी इस पूरे ड्रामे में तड़का लगाया जो टाइम्स नाउ नवभारत और टाइम्स नाउ के लिए फायदेमंद है. कुल मिला कर न्यूज़ चैनल पर ये सब हो जाना सिर्फ़ एक संयोग नहीं होता, कभी-कभी ये प्लांनिग का हिस्सा भी होता है!
मोहम्मद जुबैर-
जब लोग आपका बकवास न्यूज़ चैनल देखना बंद कर देते हैं, तो आप एक नया सर्कस लेकर आते हैं। अपने पैनलिस्ट को आपस में लड़वाओ. रंगनाथ हाल ही में दिल का दौरा पड़ने से ठीक हुए थे और आप उनसे लड़वाते हैं। क्योंकि टीआरपी ज्यादा महत्वपूर्ण है.
अनिल यादव-
आशुतोष, नाविका कुमार, रंगनाथन और राधिका खेड़ा के बीच हुई नूरा कुश्ती ये इन लोगों का अपना मसला है, बहुजनों को इसमें चौधरी नहीं बनना चाहिए, सिर्फ दर्शक दीर्घा में बैठकर मजा लेना चाहिए, और इन लोगों की हौसला अफजाई करनी चाहिए।
जब तक कि ये लोग आपस में पटका पटकी करके एक दूसरे का मुंह तोड़कर एक आध दांत ना बाहर निकाल दें।
सुरेंद्र राजपूत-
नवभारत टाइम्स नाउ और उसकी एंकर नाविका कुमार नविका कुमार साफ़ साफ़ सत्ता समर्थक एजेंडा चलाती दिख रही हैं। ऐसे चैनल की डिबेट में जाना है तो अपनी इज़्ज़त घर में रख कर जाइये।
निरपेक्ष को ये हर 5 सेकंड्स में टोक कर डीरेल करते हैं और रंगनाथन जैसे सत्ता समर्थक से बेइज्जत करवाते है और सब कुछ पहले से प्लान कर लेते है!
नविका का पूरा व्यवहार आशुतोष आशुतोष को बेइज्जत करने वाला था उसने एक बार भी रंगनाथन के ख़िलाफ़ कठोर भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जबकि वो आशुतोष के पिता तक चला गया।
सभी राजनीतिक दलों को ऐसे सड़कछाप डिबेट करने और करवाने वालों का बहिष्कार करना चाहिये।

मूल खबर नीचे है, फुल वीडियो के साथ…पढ़ें



