रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बिहार के लिए 12000 ट्रेनें चलाने जैसी बात कर रहे हैं। अखबारों वेबसाइटों ने डंके की चोट पर यह छापा है। उधर दूसरी तरफ जनता परेशन है, यह जानने के लिए की आखिर 12000 हजार ट्रेनें चल कहां रही हैं? क्योंकि जनता तो पहले से भी ज्यादा टाइट हालातों का सामना कर रही है। त्योहार मनाने बिहार जा रहे दो यात्रियों के मरने की भी खबर है।
नीचे पढ़िये कौन क्या पूछ रहा है? वीडियो भी देखिए…
रवीश कुमार-
12000 ट्रेनें कहाँ गईं? इस हेडलाइन से जो माहौल बनाया गया था, उसका क्या अपडेट है? क्या सही में 12000 रेल गाड़ियाँ बिहार के लिए चल रही हैं? इनकी सूची कहाँ मिलेगी? यमुना एक्सप्रेस वे पर जाकर देखिए। बिहार जाने वाली बसों का रेला। लोग ऐसी बसों में ठूंसा कर 24-24 घंटे से ज़्यादा का सफर कर रहे हैं।
कोई बता सकता है कि 12000 स्पेशल ट्रेनें कहाँ चल रही हैं? इनकी कोई सूची है? अगस्त के महीने में यह हिसाब कैसे अखबारों और वेबसाइट तक पहुँचा?


रणविजय सिंह-
पाकिस्तान का रेल मंत्री कह रहा है – ट्रेनों की भीड़ को लेकर सोशल मीडिया पर कैंपेन मत चलाओ. सरकार के बारे में पॉजिटिव दिखाओ. क्या पाकिस्तान का रेल मंत्री इस तरह टॉयलेट में सफर करेगा?

अजीत सिंह राठी-
इस महीने त्योहारी सीजन है, ऐसा नहीं है इसकी जानकारी रेलवे मंत्रालय को नहीं होगी। लेकिन यात्रियों की भीड़ से ट्रेनों में स्लीपर कोच जनरल कोच बन गए है। यह सब देखकर लगता है कि या तो रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें चलाई नहीं या ट्रेने है ही नहीं।
ये ट्रेन पेरारुम्बुर जंक्शन (चेन्नई) से दानापुर (बिहार) जा रही है!! जरा हाल देखिए।
गोविंद प्रताप सिंह-
रेल मंत्रालय वाले मूर्ख समझते हैं क्या लोगों को- बता रहे हैं- “जाँच में सामने आया कि कुछ लोगों को कोच में चढ़ाकर भीड़ का माहौल बनाने की कोशिश की गई है।”

मतलब- कोई लॉजिक है या घास चरने गया है।
गोविंद, अभी ईमेल आता होगा कि ट्वीट डिलीट करिए वरना सस्पेंड करा देंगे… जैसा रेलवे प्लेटफार्म पर भगदड़ की घटना के बाद किया था। बाक़ायदा गैजेट जारी करके झूठ बोल रहे थे IITian साहब… – ममता त्रिपाठी
प्रियंका भारती-
कहाँ हैं अश्विनी वैष्णव? कहाँ है आपका 12,000 ट्रेन? कहाँ है छठ-दिवाली में बिहारियों के लिए स्पेशल ट्रेन चलाने का वादा? हाँ दो बिहारियों की आज मुंबई से बिहार आते वक्त ट्रेन से गिर कर मरने की खबर मिली है।
आपके जैसा रेल मंत्री ना देखा गया ना देखा जाएगा!
नेहा सिंह राठौर-
बिहार की ट्रेन से दो यात्री गिरकर मर गए. कौन ज़िम्मेदार है? 12000 स्पेशल ट्रेनों की बात हुई थी. कहाँ हैं वो ट्रेनें?
भगदड़ों, आतंकवादी हमलों, पुल गिरने, प्लेन क्रैश, ट्रेन एक्सीडेंट, या ऑक्सीजन की कमी से मारे गए लाखों देशवासियों की मौतों का कोई ज़िम्मेदार क्यों नहीं है?



