कल्पना कीजिए: ब्रह्मांड, जिसमें हम हैं, वो विशाल आकाशगंगा समूहों, समय और अंतरिक्ष के साथ-साथ बहुत ही धीरे-धीरे घूम रहा हो। सुनने में यह अविश्वसनीय लगता है, लेकिन एक नया खगोलभौतिकीय सिद्धांत यही कहता है।
ब्रह्मांड का सौम्य घूर्णन: हर 500 अरब वर्षों में एक चक्कर
हवाई विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक इस्तवान सजापुडी और उनकी टीम ने हाल ही में एक साहसिक प्रस्ताव दिया है—पूरा ब्रह्मांड एक बहुत ही धीमी गति से घूम रहा है, इतना धीरे कि वह हर 500 अरब वर्षों में एक बार ही एक चक्कर पूरा करता है।
यह गति इतनी धीमी है कि हमें इसका प्रत्यक्ष अनुभव कभी नहीं होगा। लेकिन यह घूर्णन एक बड़ी ब्रह्मांडीय पहेली को सुलझाने में मदद कर सकता है—जिसे वैज्ञानिक ‘हबल तनाव’ कहते हैं।
हबल तनाव: दो विरोधी माप और एक बड़ी गुत्थी
हबल तनाव उस रहस्य का नाम है, जो ब्रह्मांड के विस्तार की गति को लेकर दो भिन्न तरीकों से प्राप्त परिणामों के बीच अंतर को दर्शाता है:
सुपरनोवा और सेफिड सितारों के अवलोकन बताते हैं कि ब्रह्मांड अपेक्षाकृत तेजी से फैल रहा है। जबकि कॉस्मिक माइक्रोवेव बैकग्राउंड (CMB) — ब्रह्मांड की प्रारंभिक अवस्था की रेडिएशन — दर्शाती है कि विस्तार की गति धीमी है।
ये दोनों आंकड़े आपस में मेल नहीं खाते, जिससे ब्रह्मांड की हमारी वर्तमान समझ पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।
क्या ब्रह्मांड का घूर्णन इस गुत्थी को सुलझा सकता है?
सजापुडी और उनकी टीम का मानना है कि अगर ब्रह्मांड थोड़ा भी घूम रहा हो, तो यह space-time की ज्यामिति को थोड़ा विकृत कर सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि हमारा मापन इस सूक्ष्म विकृति से प्रभावित हो सकता है — और यही हबल तनाव की व्याख्या कर सकता है।
एक मूल धारणा पर सवाल: क्या ब्रह्मांड हर दिशा में एक जैसा है?
अब तक की धारणा यह थी कि ब्रह्मांड आइसोट्रॉपिक (Isotropic) है — यानी हर दिशा में एक जैसा दिखता है।
लेकिन अगर ब्रह्मांड वाकई घूम रहा है, तो इसका मतलब होगा कि इसमें एक “preferred direction”, यानी कोई खास दिशा मौजूद है।
यह एक ब्रह्मांडीय क्रांति जैसा होगा, क्योंकि यह हमारी समय और स्थान की मूल समझ को चुनौती देगा।
आगे का रास्ता: परीक्षण और सत्यापन
वैज्ञानिक अब इस सिद्धांत को परखने के लिए:
सटीक कंप्यूटर सिमुलेशन बना रहे हैं। अत्यंत संवेदनशील उपकरणों से ब्रह्मांडीय विकिरण और विस्तार का विश्लेषण कर रहे हैं।
यदि यह सिद्धांत पुष्टि पाता है, तो यह ब्रह्मांड विज्ञान के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है।
ब्रह्मांड का यह धीमा घूमना सिर्फ एक विचार नहीं है—यह वह कड़ी हो सकती है जो हमारे ब्रह्मांड की संरचना, उत्पत्ति और भाग्य के बारे में हमारी सबसे गहरी जिज्ञासाओं को जोड़ती है।
यह लेख बालाज़ एंड्रे स्ज़िगेटी एट अल द्वारा किए गए शोध और खगोलभौतिकीविद् इस्तवान सजापुडी के प्रस्ताव पर आधारित है।


