
मनीष दुबे-
सोशल मीडिया पर एक यूजर ने दैनिक जागरण को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। विनय प्रताप सिंह नाम के इस एक्स यूजर का सवाल है कि- दैनिक जागरण के सारे संपादक ब्राह्मण समाज से ही क्यों होते हैं?

देश का सबसे बड़ा हिंदी अख़बार कहा जाने वाला दैनिक जागरण का संपादकीय नेतृ्त्व कानपुर के गुप्ता परिवार (सवर्ण) के हाथ में है। लेकिन इस अखबार में अहम पदों पर ज्यादातर ब्राह्मण वर्चस्व हावी रहता है। कुछ मीडिया विश्लेषकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि जागरण समूह के संपादकीय पदों पर ब्राह्मण या अन्य सवर्ण समुदायों का दबदबा रहा है, जिससे दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदाय हाशिये पर चले जाते हैं।
संपादकीय नेतृत्व: कौन हैं चेहरे?
महेंद्र मोहन गुप्ता – चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर
संजय गुप्ता – सीईओ और एडिटर
अन्य संपादकीय टीम में भी वर्षों से लगभग वही चेहरे बने हुए हैं, जिनका जातिगत पृष्ठभूमि ज़्यादातर सवर्ण या ब्राह्मण मानी जाती है। हालांकि, कंपनी ने कभी भी अपनी टीम की जातिगत प्रोफ़ाइल सार्वजनिक नहीं की है।
जाति और मीडिया: व्यापक संदर्भ
2023 में आई ऑक्सफैम इंडिया और न्यूज़ लॉन्ड्री की एक संयुक्त रिपोर्ट बताती है कि : भारत के 121 प्रमुख न्यूज़ चैनलों, अखबारों और डिजिटल पोर्टलों के 300 से ज्यादा नेतृत्व पदों में से 90% से ज़्यादा पर सवर्ण जातियों का कब्जा है।
दलित, आदिवासी और ओबीसी समुदायों से आने वाले लोग संपादकीय निर्णय लेने की स्थिति में लगभग नहीं हैं। हिंदी मीडिया में यह स्थिति और भी अधिक गम्भीर बताई गई है।
क्या कहता है मीडिया समाज?
लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार सुशील दुबे कहते हैं- “यह केवल नियुक्तियों का मसला नहीं है, यह इस बात का संकेत है कि कौन से मुद्दे अखबार में जगह पाएंगे और कौन से नहीं। जब निर्णय लेने की कुर्सी पर केवल एक ही सामाजिक वर्ग होगा, तो वह समाज के बाकी हिस्सों को नज़रअंदाज़ करेगा—चाहे अनजाने में ही सही।”
दलित-पिछड़े मुद्दे: कितना स्पेस मिलता है?
विश्लेषकों का मानना है कि जब संपादकीय स्तर पर प्रतिनिधित्व सीमित होता है, तो इससे जुड़ी खबरों का कवरेज भी सीमित हो जाता है। उदाहरण के लिए दलित उत्पीड़न या आरक्षण जैसे मुद्दे दैनिक जागरण में अक्सर “विवाद” के रूप में रिपोर्ट होते हैं। ग्रामीण भारत, आदिवासी संघर्ष, जेल सुधार जैसे विषयों पर बेहद सीमित या सतही रिपोर्टिंग होती है।
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ज़्यादातर डिजिटल एडिटर ब्राह्मण हैं?



RAMCHANDRA PRASAD
April 10, 2025 at 6:12 pm
दैनिक जागरण क्यों अधिकांश समाचार पत्रों एवं भारतीय मीडिया में यही हाल है।