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उत्तर प्रदेश

देवरिया में क्षत्रिय लड़कों की हत्या और तथाकथित क्षत्रिय वादी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ!

सौरभ सोमवंशी-

लखनऊ। ऐसा लगता है कि क्षत्रियों को भाजपा के हिंदुत्व के कुचक्र से निकलना होगा क्योंकि सबसे ज्यादा नुकसान हिंदुत्व के नाम पर उन्हीं का हो रहा है!

उत्तर प्रदेश के राजपूतों के बीच धीरे धीरे एक धारणा बैठ रही है कि योगी आदित्यनाथ के चेहरे को आगे कर भारतीय जनता पार्टी क्षत्रिय राजनीति को बारीकी से समाप्त कर रही है, क्षत्रिय नेताओं के अस्तित्व को समाप्त किया जा रहा है।

बात करते हैं गोरखपुर मंडल की जहां देवरिया में 10 दिन के भीतर तीन क्षत्रिय युवकों की हत्या कर दी गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर के बगल का ही जिला है देवरिया।

वही देवरिया जहां के मूल निवासी और वर्तमान सांसद शशांक मणि त्रिपाठी के दादा गोरखपुर के तत्कालीन जिलाधिकारी सुरति नारायण मणि त्रिपाठी योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु दिग्विजय नाथ के कट्टर विरोधी हुआ करते थे, जिन्होंने दिग्विजय नाथ का विरोध करने के लिए ही एक लड़के को आगे बढ़ाया जो माफिया और बाद में माननीय हरिशंकर तिवारी बना।

अभी सुल्तानपुर में एक यादव के एनकाउंटर पर हो हल्ला मचने के बाद एक राजपूत लड़के का एनकाउंटर कर दिया गया। उससे लोग आक्रोशित थे ही कि देवरिया में 10 दिन के भीतर अजीत सिंह, निहाल सिंह और विशाल सिंह की हत्या के बाद पूरे उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।

पूरे प्रदेश में यह चर्चा का विषय है कि नाथ संप्रदाय की सम्मानित गोरखनाथ पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ और उनकी सरकार के ऊपर क्षत्रियवाद का आरोप लगाने वाले लोग कहां हैं,
कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश में राजपूत अधिकारियों की लिस्ट लेकर घूमने वाले हुए पत्रकार कहां हैं जिन्हें पूरे उत्तर प्रदेश में चारों तरफ ब्यूरोक्रेसी में केवल राजपूत दिखाई देते थे चाहे वह कुर्मी हो अहीर हो या कायस्थ हों या भूमिहार हो।

आज गोरखपुर मंडल में एक भी ऐसा कोई राजनेता नहीं है जिसे क्षत्रियों का नेता कहा जाए। गोरखपुर मंडल के सारे राजपूत नेता इसलिए भी मौन है क्योंकि तथा कथित रूप से वे मुख्यमंत्री के नजर में अधिक तेजी दिखाना नहीं चाहते, शायद मुख्यमंत्री को बुरा लग जाय।

जिस देवरिया की यह घटना है वहां कुछ माह पहले हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अखिलेश सिंह को नजर अंदाज कर राजपूतों ने योगी आदित्यनाथ के नाम पर भारतीय जनता पार्टी के उसी उम्मीदवार को वोट दिया जिसके दादा ने गोरखपुर का जिलाधिकारी रहते हुए योगी आदित्यनाथ के दादा गुरु दिग्विजय नाथ की लानत मलानत में कोई कसर नहीं छोड़ी। जिसका सिला मिला की 10 दिन के भीतर तीन क्षत्रिय युवकों की हत्या हो गई उनके साथ ना तो योगी आदित्यनाथ दिख रहे हैं, ना तो वह सांसद दिख रहा है।

जिस उत्तर प्रदेश के कानून व्यवस्था का जिक्र राष्ट्रीय स्तर पर हो रहा हो उसी उत्तर प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ के गृह मंडल में ऐसी दशा है कि जिस जाति का संरक्षण करने का फर्जी आरोप उनके ऊपर लगाया जाता है उसी जाति के तीन युवकों की हत्या हो जाती है और इससे भी ज्यादा शर्मनाक यह है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं होती है।

14 तारीख को जौनपुर में हर्षित सिंह नाम के युवक की हत्या हो जाती है। पूरी की पूरी भारतीय जनता पार्टी हिंदुत्व के रंग में रंगी हुई है, हिंदुत्व के नाम पर वोटो की फसल काटी जा रही है लेकिन वास्तविकता यही है कि हिंदुत्व के नाम पर सबसे अधिक नुकसान राजपूत का किया जा रहा है।

चाहे अयोध्या में सूर्यवंशी भगवान श्री राम के मंदिर में बने हुए ट्रस्ट से क्षत्रियों को नजरअंदाज करने की बात हो या फिर मुख्तार अंसारी को सजा सुनाकर हिंदुत्व के नाम पर न्यायपालिका में मसीहा बने जस्टिस दिनेश कुमार सिंह का केरल स्थानांतरण हो या फिर उत्तर प्रदेश की कैबिनेट में एक भी क्षत्रिय को शामिल न किया जाना हो, ईडब्ल्यूएस का सरलीकरण हो, या फिर क्षत्रियों के इतिहास का विकृतिकरण हो, सब पर योगी आदित्यनाथ व भाजपा दोनों मौन है और भारतीय जनता पार्टी क्षत्रियों का हर तरफ से नुकसान कर रही है।

देवरिया में जो कुछ भी हुआ है वह अनायास ही नहीं है। वास्तविकता यह है कि वहां लोगों का कहना है कि अपनी समाजसेवा और पक्षपातरहित स्वभाव के कारण विशाल सिंह की पहचान अपने क्षेत्र में तेजी से बढ़ रही थी। यह कई लोगों के लिए असहज वाली स्थिति थी। बड़ा प्रश्न यह है कि आखिरकार क्या राजनीतिक वरदहस्त में एक उदयमान युवा नेता की हत्या कर दी गई।

यह कानून व्यवस्था के लिए भी चुनौती पूर्ण इसलिए है क्योंकि निहाल सिंह हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जो विशाल सिंह आंदोलन कर रहे थे, उनकी हत्या कर दी गई।

ऐसा लगता है कि हत्यारों में कानून का भय नहीं रह गया है।
ये स्थिति तब है पत्रकारों का एक बड़ा वर्ग योगी आदित्यनाथ को क्षत्रिय घोषित करने और उत्तर प्रदेश सरकार को क्षत्रिय वादी घोषित करने पर तुली हुई है।

क्षत्रिय युवाओं की हत्या को लेकर कुछ सोशल मीडिया पोस्ट देखें-

लेखक सौरभ सोमवंशी विधि स्नातक हैं और लखनऊ शहर में रहकर स्वतंत्र पत्रकारिता करते हैं.

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