लखनऊ, 11 मई — एक नए शोध अध्ययन में यह सामने आया है कि देश के 56.6% युवा अब समाचार जानने और पढ़ने के लिए पारंपरिक मीडिया (अखबार, टीवी आदि) की बजाय डिजिटल मीडिया, विशेष रूप से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और न्यूज ऐप्स का सहारा ले रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में स्नातकोत्तर कर रहे छात्र निखिल रस्तोगी द्वारा किए गए इस अध्ययन ने युवाओं की समाचार खपत में तेजी से आए इस बदलाव को तथ्यात्मक रूप से उजागर किया है।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि हालांकि युवा डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग अधिक कर रहे हैं, लेकिन उनमें से 80% अब भी पारंपरिक मीडिया को अधिक विश्वसनीय मानते हैं। इसके पीछे वजह के रूप में अखबारों और टीवी न्यूज़ में तथ्यों की पुष्टि, संपादकीय जांच और संतुलन जैसी प्रक्रियाओं को प्रमुख कारण बताया गया है।
इस शोध में टीवी समाचारों की लोकप्रियता में गिरावट और युवाओं द्वारा संक्षिप्त व इंटरैक्टिव कंटेंट को प्राथमिकता देने की प्रवृत्ति को भी उजागर किया गया है।
शोध की पृष्ठभूमि:
यह अध्ययन “A Study on News Consumption Patterns Among Youth in the Digital Age: Traditional vs New Media” शीर्षक से किया गया है। इसमें 18 से 30 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं को शामिल किया गया है। मार्गदर्शन लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में कार्यरत एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सौरभ मालवीय ने किया। अध्ययन का उद्देश्य न केवल युवाओं के समाचार ग्रहण व्यवहार को समझना था, बल्कि डिजिटल युग में पारंपरिक मीडिया की प्रासंगिकता को फिर से परिभाषित करना भी था।
शिक्षकों और विभाग की सराहना:
विभागाध्यक्ष प्रो. मुकुल श्रीवास्तव ने अध्ययन को युवाओं की मीडिया प्राथमिकताओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। वहीं सह-प्रोफेसर डॉ. कृतिका अग्रवाल और डॉ. नीलू शर्मा ने इसे मीडिया संस्थानों और मीडियाकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक बताया।
निखिल रस्तोगी का बयान:
अपने शोध को लेकर निखिल रस्तोगी ने कहा, “यह अध्ययन युवाओं की बदलती प्राथमिकताओं को समझने और मीडिया की विश्वसनीयता बनाए रखने की दिशा में एक प्रयास है। डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच यह जरूरी हो गया है कि पारंपरिक मीडिया भी खुद को नई मांगों के अनुरूप ढाले।”


