आज की शब्दचर्चा में हम दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति ELON Musk के नाम के बारे में बात करेंगे जिसने इन दिनों दुनिया के सबसे ताक़तवर इंसान डॉनल्ड ट्रंप से पंगा ले रखा है। इस व्यक्ति का नाम हिंदी मीडिया में हर कोई एलन मस्क लिख रहा है। बिज़नस स्टैंडर्ड जैसा कोई इक्का-दुक्का ही है जो इसे ईलॉन लिख रहा है।
सही है ईलॉन। आप CNN पर सुनें या सीधे ट्रंप के ‘अश्वमुख’ से – हर कोई ‘ईलॉन’ बोल रहा है। लेकिन हिंदी मीडिया में ‘एलन’ चल गया है तो चल गया है। यहाँ तक कि हिंदी विकिपीडिया भी एलन मस्क ही लिख रहा है।
आख़िर हिंदी मीडिया में ‘एलन क्यों चल गया जबकि सही उच्चारण ‘ईलॉन’ है? मैंने जब इसके बारे में एक पत्रकार मित्र से चर्चा की तो उसने सुझाया कि हो सकता है, एलन बॉर्डर या ऐसे ही किसी लोकप्रिय व्यक्ति के नाम के चलते ऐसा हुआ है। वहाँ एलन तो यहाँ भी एलन भले ही दोनों की स्पेलिंग अलग हो।
मुझे उसकी बात में दम नज़र आया। हुआ यह होगा कि जब यह नाम पहली बार हिंदी के किसी पत्रकार के सामने आया तो उसने सोचा होगा कि E से ‘ए’ होता है (Egg=एग, Enter=एंटर, Energy=एनर्जी) तो यहाँ भी E से ‘ए’ ही होना चाहिए। इसके बाद जब उसने इस ‘ए’ को lon से मिलाया तो उसे एलन बॉर्डर या ऐसा ही कोई विदेशी नाम याद आ गया और उसके दिमाग़ ने फ़तवा दे दिया – Elon का उच्चारण एलन होगा।
फिर वही हुआ जो आम तौर पर परीक्षा हॉल में होता है। बिल्लू लल्लू से पूछता है – सवाल नंबर 1 का आंसर क्या है? लल्लू कहता है – मुझे तो d सही लगता है। तो बिल्लू ने भी d पर टिक कर दिया। अब टिल्लू बिल्लू से पूछता है, सवाल नंबर 1 का आंसर क्या है? बिल्लू कहता है – लल्लू d बता रहा है, मैंने भी d पर टिक कर दिया है। सो टिल्लू भी d पर टिक कर देता है। इस तरह पूरी क्लास एक-दूसरे से पूछकर सवाल नंबर 1 के जवाब में d पर निशान लगा देती है।
यहाँ भी यही हो रहा है। एक ने ‘एलन’ लिखा तो हिंदी पत्रकारों की सारी क्लास ‘एलन लिख रही है। किसी को यह नहीं सूझ रहा है कि एक बार पता कर लें किसी विदेशी न्यूज़ चैनल से या गूगल ही कर लें कि Elon Musk के नाम का उच्चारण क्या है। लेकिन कोई नहीं कर रहा। एक भेड़चाल- सी है। जो चल रहा है, सो चल रहा है।
‘ईलॉन को ‘एलन’ लिखने के पीछे एक तर्क यह भी हो सकता है, ख़ासकर वेबसाइटों का, कि चूँकि सभी लोग ‘एलन’ लिख रहे हैं सो अगर हम सही के चक्कर में ‘ईलॉन’ लिखेंगे तो सर्च में नहीं आएँगे। मुझे यह दलील उतनी मज़बूत नहीं लगती क्योंकि SEO में इसका इलाज है। आप ऐसा क्यों नहीं करते कि हेडलाइन और टेक्स्ट में ईलॉन लिखें और टाइटल टैग में एलन लिखें? और अख़बारों के पास तो यह दलील भी नहीं है। वे तो ‘ईलॉन’ लिख ही सकते हैं। वे अगर ‘ईलॉन’ लिखेंगे तो हो सकता है, वेबसाइटें भी ‘ईलॉन’ लिखना शुरू कर दें।
क्या ये हिंदी मीडिया के संपादक कभी सोचते हैं कि उनका अपने पाठकों के प्रति भी कोई कर्तव्य है! आख़िर कब तक लल्लुओं और बिल्लुओं से पूछकर वे सवाल नंबर 1 के जवाब में d पर टिक लगाते रहेंगे? एक बार किताब खोलकर देख क्यों नहीं लेते कि सवाल नंबर 1 का सही जवाब क्या है?



