ये ‘ईटीवी भारत’ है या कोई यातना गृह! पढ़िए एक महिला पत्रकार का पत्र

नमस्कार

मैंने अभी-अभी ईटीवी भारत दिल्ली में न्यूज कास्टर और कंटेंट एडिटर के पद से इस्तीफा दिया है. ये मेल मैं अपने डेस्क के साथियों और ईटीवी भारत के सीनियर लोगों के नाम लिख रही हूं, अपनी बात सब तक पहुंचाने के लिए. क्यूंकि ये मेरा कानूनन हक है. मैंने इस तरह से अचानक इस्तीफा क्यों दिया, इससे मेरे अलावा निसंदेह किसी को फर्क नहीं पड़ता. लेकिन इसके पीछे का सच आपके लिए जानना और बताना मेरे लिए ज़रूरी है. ताकि आगे से जो अच्छे दिल और दिमाग वाले साथी हैं वो अलर्ट रहें. मुझे बहुत दुख और शर्म के साथ कहना पड़ रहा है कि जिस संस्थान के नाम से आप सब लोग इतनी दूर आए हैं, वहां काम करने वाले कुछ सीनियर और कुछ अथॉरिटी वाले लोग कैसे यहां हिटलरबाजी चला रहे हैं. यूं तो मीडिया में ये कॉमन है लेकिन इसे कॉमन हम जैसे लोगों ने बनाया है जो चुपचाप गलत को सहते रहते हैं. या ऐसे लोगों के बीच में रहते रहते खुद भी वैसे ही बन जाते हैं. चलिए शुरुआत करते हैं..

  • तो मेरे इस्तीफे के पीछे सबसे पहला कारण है दिल्ली डेस्क इंचार्ज सुनील धनखड़. संकीर्ण सोच, छोटी मानसिकता, अव्वल दर्जे के धूर्त, कम ज्ञान वाले इंसैक्योर इंसान. मुझे मानसिक तौर से प्रताड़ित किया जा रहा था काफी लंबे समय से कई छिपे हुए तरीकों से …(लिस्ट बहुत लंबी है).. वजह ये की मै कभी कुछ अन्य महान लोगों की तरह इनकी सीट पे जाके फालतू की बातें नहीं हांकी.. ना तो इनकी गुप्त सूत्र बनने का काम किया… जब मुझे बात बात पे परेशान करना शुरू किया गया तो मैंने भी उसका जवाब दिया जिससे ये और भी प्रताड़ित करने लग गये..और जब हद हो गई तो मैंने प्रसेनजीत सर से लेकर बप्पी नायडू सर तक मेल कर दी. असली कहानी तो तब शुरू हुई ..
  • इस मेल पर कोई भी एक्शन लेने के बजाए मुझे hr में दो दिन तक बैठाया रखा गया दिन भर.. बिना कुछ खाए पिए और किसी से भी बात किए बगैर मुझे एक कोने में बैठाकर रखा गया. डेस्क में आने से रोक दिया गया और मेरी परेशानी का हल निकालने की जगह मुझे बुरी तरह से घेर लिया गया… मेरे हौंसले और इस मामले को दबाने के लिए मेरी छुट्टियों को आधार बनाकर मुझे ही बुरी तरह से लपेटे में ले लिया गया… मै वहां भी अपने हक और न्याय के लिए पुरजोर लड़ी. लेकिन हद तो तब हो गई जब hr में भी मुझे प्रताड़ित किया गया. मुझे तरह तरह की धमकियां दी गई. मैं रोई भी और चिल्लाई भी…क्यूंकि आजतक कभी भी ऐसा नहीं हुआ था मेरे साथ…
  • मेरी जो छुट्टियां महीना भर पहले एप्रूव थीं उन्हें अचानक से रोकने की बात की गई. (अगले दिन मेरी फ्लाइट थी). डेस्क चेंज करने की धमकी दी गई. ये भी कहा गया कि हम कोई और स्ट्रिक्ट एक्शन भी ले सकते हैं.. मेरा प्रोबेशन और इंक्रीमेंट जो पहले भी एक्सटेंड किया गया था उसे और कई महीने एक्सटेंड किया गया ..और जब मैंने कहा कि मै तो अब छुट्टियां लूंगी ही क्यूंकि अब मेरी फ्लाइट भी बुक है और बिना गलती के मै सजा नहीं भुगतुंगी तो मुझे कहा गया कि घर से आने के बाद भी आप डेस्क में नहीं जाओगे… रोज़ hr में आओगे और यहीं बैठोगे, जब तक हम डिसाइड नहीं कर लेते कि क्या करना है. मतलब साफ था कि जो इनके खिलाफ बोलेगा उसका ये हश्र करेंगे. Hr में मुरली जी और कोई पी श्रीधर नाम के थे जो शक्ल से तो कपटी लग ही रहे थे लेकिन जैसे ही उन्होंने जुबान खोली तो ये साबित भी हो गया. पूरी कोशिश की गई की अब मेंटल हैरासमेंट का मामला ख़त्म और मेरी छुट्टीयों के मसले को उछाल के मुझे यहां से रफा दफा कर दिया जाए या फिर मैं खुद ही परेशान होकर चली जाऊं ..वहां क्या क्या हुआ और कहा वो मैंने देखा और सुना और महसूस किया कि सच बोलने वालों, हिम्मत रखने वालों और गलत के खिलाफ बोलने वाले को कैसे दबाने के लिए लोग खड़े हो जाते हैं.. सुनील धनखड़ जी मज़े में घूम रहे हैं आज .. क्यूंकि मामला दबा दिया गया और रामोजी सर तक बात पहुंचने ही नहीं दी गई.
  • बातें तो बहुत सी हुई hr में और डेस्क में भी जो सब कुछ लिखकर बता पाना मुमकिन नहीं. अब मै छोड़कर जा रही हूं इसलिए नहीं कि इनसे डर गई बल्कि अपने स्वाभिमान के लिए.. हां चाहती तो आकर लड़ती और भी ज्यादा ..लेकिन तब भी मेरा समय भी जाता होना कुछ नहीं था ..और समझदारी यही थी कि मूर्खों के मुंह जितना कम लगूं उतना सही है.

अच्छा हां मैं इस लहजे में कभी बात नहीं करती, ये डेस्क के लोग जानते हैं (शायद)… लेकिन जब मैं ऐसे झूठे और धूर्त इंसानों से मिली तो पता चला कि हर जने खने को इज्जत देना जरूरी नहीं क्यूंकि उन्हें इज्जत संभालनी नहीं आती ..ऐसे लोग सिर्फ लोगों में डर पैदा करके इज्जत पाने की कोशिश करते हैं. (जो नए साथी हैं डेस्क में इसका अनुसरण न करें).

एक और महान शख्स के बारे में तो बताना ही भूल गई. डेस्क शिफ्ट इचार्ज शिशुपाल कुमार जो सबसे शातिर खिलाड़ी है यहां और वो खुद को रावण कहता है जो सच में रावण है.. सब खेल वो ही रचता है.. पता नहीं लोग कैसे उसके झांसे में आ जाते हैं.. खैर लोगों को क्या बोलना, मैं खुद भी आ गई थी .. इन लोगों को इन्हीं की तरह रावण भाते हैं.

खैर समय बड़ा बलवान है.. क्या पता ये लोग समय के साथ सुधर जाएं और अच्छे बनने की एक्टिंग न करें बल्कि सच में ही अच्छे इंसान बन जाएं ..

मुझे पता है मेरी इस मेल के बाद मुझे और भी कई तरीकों से टारगेट किया जा सकता है ..लेकिन मैं भी तैयार हूं ये देखने के लिए इनकी धूर्तता का अंत आखिर क्या है.

मैंने कभी सोचा नहीं था कि इस तरीके से मैं जाऊंगी और यह सब कहूंगी लेकिन इन्होंने स्थिति ही ऐसी बना दी.. मेरा ये सब लिखने का मकसद सिर्फ इतना है कि एक तो आप लोग ये समझ जाएं कि आपकी प्रॉब्लम्स का यहां आपको कोई सोल्यूशन देने वाला नहीं है, कभी न्याय नहीं मिलेगा इसलिए या तो चुपचाप सिर झुकाके जैसा हो रहा है होने दें..या तो चाटुकारिता शुरू कर दें या फिर सच के खिलाफ बोलते रहें.. choice आपकी है.

वैसे चाटुकारिता वाला ऑप्शन सबसे अच्छा है..कोई प्राब्लम नहीं आती फिर..सब ठीक रहता है. जो नए साथी आए हैं बहुत से मुझे कभी मिले भी नहीं ..बहुत ज्यादा बड़ी नहीं हूं न उम्र में ना अनुभव में.. लेकिन सही और ग़लत की पहचान करना जानती हूं. कोशिश कीजिएगा मीठी बातों में न आकर सच को पहचानो और अपने पैशन पे फोकस करो. खैर बाकी तो मर्ज़ी आपकी, सब समझदार हैं.

इसे पढ़ने के बाद दिल्ली डेस्क के साथियों की इमरजेंसी मीटिंग भी बुलाए जाने के बहुत आसार हैं जहां मुझे फिर से नीचा दिखाने की भरपूर कोशिश होगी पर अब मुझे फर्क नहीं पड़ता. क्यूंकी डेस्क इंचार्ज और शिशुपाल कुमार की महिला विरोधी सोच कभी नहीं बदल सकती. एक के बाद एक इस्तीफे इस डेस्क से गए हैं और सबके लिए ज़िम्मेदार यही दोनों हैं. और मुझे अब सीनियर अथॉरिटी से कोई होप नहीं है. बस इतना चाहती हूं कि सर आगे से प्लीज़ अगर कोई अपनी प्रॉब्लम लेकर आए तो उसे न्याय दिया जाए और किसी भी कर्मचारी को ऐसे प्रताड़ित न किया जाए.

बाकी धन्यवाद सब लोगों का बहुत अच्छे सबक लेकर हैदराबाद से गई हूं.. ज़िदंगी भर काम आएंगे.

Note 1- मैं ये सब लिखकर खुद को सच्चा साबित करने की कोशिश में नहीं हूं. बस खुद को तसल्ली के लिए लिखा है कि कभी भी इन्फ्यूचर ऐसा न लगे कि मेरे साथ गलत किया किसी ने और मैं हारकर लौट आई. खैर जीत तो अब भी नहीं मिली लेकिन कसक भी नहीं रही कि मैं अपनी बात नहीं बोल पाई. शायद मुझे ये भी कहा जाएगा कि ऐसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकते तो मैं इतना बोलना चाहूंगी कि अगर मुझे न्याय मिलता तो ये नौबत कभी नहीं आती .. मैं भी खास ख्याल रखती लेकिन मुझे मजबूर किया गया.

Note 2- बिंदियों और मात्राओं की गलतियां निकालने वाले साथी कम से कम यहां बख्श दें.. फोन से आधी रात को बैठकर टाइप करने के बाद आने वाले outcome से आप शायद वाक़िफ ही होंगे.

धन्यवाद

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Comments on “ये ‘ईटीवी भारत’ है या कोई यातना गृह! पढ़िए एक महिला पत्रकार का पत्र

  • Priyam Sinha says:

    ETV Bharat mein aisa he hota hai….wahan agar aap chaatukarita nahin karte ya fir kisi ke khilaf aawaj uthate hain toh wahan aapko sideline karke ais ehe frustrate kiya jaata hai…saath he pichle dinon mein pulwama hamle ke baad wahan par hindustan jindabaad aur pakistan murdabad aur vandemaatram kahne par bhi paabandi lagayi gayi theee….kya woh bharat se alag paart hai naam mein toh bharat juda hai??

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    • Main v ETV Bharat ka former employee hoon. Wahan ye mujhe researcher ke designation pr appoint kr ke cut copy paste ka kaam krane lge jo kaafi frustrating tha. Iske liye 5 yrs ki journalism ki ni thi maine. Wo baat alg h ki Researcher post dkh kr ye nhi lga tha ki kaam waisa hoga. As mujhe experience nhi tha.
      Chaploosi ka adda h ETV Bharat, Salary increment ka v koi criteria nhi h. Kis tarah se kaam ko judge kia jaata h kis trh se kiski salary bdhai jaati h iska procedure aaj tk nhi pta chla. Ek ineligible km knowledge wale insaan ko power de di jaati h ETV bharat me jisko yh v nhi pata h ki cheejon ko smjhate kaise h. Employees ko drane ki kosis ki jaati h. Berojgari ke is daur me hm apna ghr chhod kr aate h itni dur aur yaha baithe murkh aur bewkoof log hmare boss bn ke hmko supress krne ki kosis krte h. Kayi baatein aur v h. Khair mere anya saathi jo waha kaam kr rahe h unke saath koi bura salook naa ho aur samay pr unke paise bdhe ye duaa h.

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  • Priyam Sinha says:

    aisa he hota hai ETV Bharat mein..Main bhi wahan ka ex employee hun mujhe bhi chaatukarita karne aur apne sath na insafi ke liye aawaj uthane ki saja frustration se bhugatni padi thee.. Wahan par airstrike aur pulwama hamle ke baad….employees dwara bus par vande maatram, hindustan jindabad aur pakistan murdabad kahne par bhi rok thee aur employees ko lataada gya aur suspend karne ki bhi koshish hui…ye kaisa Bharat hai?

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  • Rohit Chand says:

    The Message is clear and the action should be taken against सुनील धनखड़, मुरली, पी श्रीधर, and शिशुपाल कुमार on this employee harassment issue. The company needs new HR policies and a new HR Manager. Employee harassment is not a joke and management should face severe consequences and believe me it is very much possible if this brave female employee decides to pursue this issue further. It is worth noting that the girl fought brave against the conservative and prejudice environment.

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  • Delli ki reporting team ke sath bhi aisa hi hai. vhan ka reporting head Dhananjai bi aise hee krta hai. Ek numbr ka tharkii hai. Uske jaisa agar na bolo do to bas peeche pd jata.

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  • Manoj Manow says:

    Wahaan ke Chutiyaape Bahut Sune hain
    Ab
    Jaake pramaan mila

    Aap isse Kisi tarah Raamo ji tsk Pahunchaayein

    Bharosaa toh nahi par Ummid kar saktaa Hoon

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  • संतोष श्रीवास्तव says:

    डियर महिला पत्रकार,

    आपके साथ क्या क्या हुआ, उसे आप ही बहुत बेहतर समझ समझ सकती हैँ… मगर आपने एक गलती कर दी वो ये कि आपको सुनील धनखड़ या शिफ्ट इंचार्ज जिसे आप रावण कह रही थी.. दोनों में से किसी एक के कान के नीचे एक कस कर तमाचा जड़कर इस्तीफा देना चाहिए था.. जब आपने नौकरी छोड़ने का मन बना ही लिया था तो is एक काम को करके निकलना चाहिए था.. अगर आप ऐसा करती तो शायद आपकी उन सभी महिला पत्रकारों के लिए बेहतर हो जाता क्योंकि तब उन सबकी फट जाती जो महिलाओं के साथ ऑफिस फ्लट करते हैँ और जो महिला उनकी हा में हां नहीं मिलाती उन्हें हर तरीके से प्रताड़ित करते हैँ जिससे कि वो महिला छोड़कर भाग जाए और उसकी जगह ये अपनी कैंडिडेट को लाकर मनमर्जी का काम कर सके..

    वैसे भी अब मीडिआ के क्षेत्र में उन्ही चूतियों को आसानी से नौकरी मिलती हैँ जो ऊपर तक अपनी पकड़ रखते हैँ.. अच्छी चमचागिरी करने वाले मूर्खो को हेड के पद पर बैठा दिया जाता हैँ… जिन्हे खबर का ख भी नहीं आता. उन्हें स्टेट हेड, डेस्क इंचार्ज या ब्यूरो हेड बना दिया जाता हैँ… चलिए अच्छा किया जो आपने इस्तीफा दे दिया और उन चिरकुटों की पोल खोल दी जो चपरासी बनने के लायक़ नहीं हैँ…

    कुछ ऐसा ही यूपी से बंद हो चुके dainikbhaskar.com में भी हुआ था.. जिसका नतीजा सबके सामने हैँ..

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