Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

साहित्य

लेखक संपादक लाल बहादुर वर्मा पर केंद्रित किताब पब्लिश हो गई!

सिद्धार्थ रामू-

वर्मा जी पर केंद्रित किताब ‘लाल बहादुर वर्मा : इतिहास निर्माता इतिहासकार’ किताब प्रकाशित हो गई, आज वर्मा जी की खुशबू से भरी यह किताब मिली। इसका संपादन सेवानिवृत प्रोफेसर (इतिहास विभाग, गोरखपुर विश्वविद्यालय) चंद्रभूषण गुप्त ‘अंकुर’ ने किया है- जल्द ही किताब उनके चाहने वालों के हाथों में होगी, ऑनलाइन भी उपलब्ध होगी

लाल बहादुर वर्मा हमारे समय के एक महान व्यक्तित्व थे। इसकी मूल वजह उनका प्रोफेसर होना, इतिहासकार होना, संपादक होना या लेखक होना नहीं है, यह सब तो वे तो थे, ही। इसकी मूल वजह अंतिम सांस तक खूबसूरत दुनिया के सपने को आंखों में सजोए रखना और उस दुनिया के निर्माण के लिए अपना सबकुछ समर्पित कर असंख्य इंसानों को गढ़ने में लगे रहना है। वे सच्चे अर्थों में आज के समय में ग्राम्शी के आर्गेनिक जनपक्षधर बुद्धिजीवी थे। नुक्कड़ नाटकों की टीम के बीच, सड़कों पर, आम लोगों के बीच उनके जीवन का बड़ा हिस्सा बीता।

जितनी उनमें मेधा थी, उतनी ही जनपक्षधरता। वे हिन्दी पट्टी के आज के समय चंद विरले लोगों में एक थे, जिन्हें सच्चे अर्थों में जनबुद्धिजीवी कह सकते हैं, जिनकी सारी मेधा, सारी बुद्धि, सारी जानकारी, सारी लेखकीय-संपादकीय शक्ति और जरूरत पड़ने पर सारे संसाधन और ऊर्जा जन के लिए समर्पित हों।

वर्मा जी, हिंदी पट्टी के अधिकांश बुद्धिजीवियों के उन बदतर अवगुणों से मुक्त थे, जो आम तौर उनमें उनमें पाई जाती है। जैसे जातिवाद, जैसे अवसरवाद, जैसे कैरियरवाद, जैसे आत्ममुग्धता, जैसे ज्ञान का पोर-पोर में भरा अंहकार , जैसे संपत्ति निर्माण को जीवन का ध्येय बना लेना।

वर्मा जी खूबसूरत दुनिया बनाने के रास्ते भले ही थोड़ा अदले-बदले हों, लेकिन जीए जिंदगी भर, दुनिया को खूबसूरत बनाने के सपने के साथ और उन्हीं सपनों के साथ मरे।उन्होंने एक शानदार जिंदगी जी और बहुतों को जिंदगीं किस बला का नाम है, यह बता कर गए और जिंदगी जीने का सलीका सीखा कर गए।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन