नई दिल्ली। न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) ने प्रसार भारती से मांग की है कि डीडी फ्रीडिश पर स्लॉट आवंटन की ई-नीलामी प्रक्रिया को और पारदर्शी, न्यायसंगत और जनसेवा उन्मुख बनाया जाए। एसोसिएशन ने कहा कि मौजूदा प्रणाली में अपारदर्शिता, कृत्रिम कमी और असमान परिणाम देखने को मिलते हैं, खासतौर पर न्यूज़ जॉनर में।
पारदर्शिता की मांग
NBDA ने सिफारिश की है कि ई-ऑक्शन शुरू होने से पहले प्रसार भारती को निम्न जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए—
- कुल उपलब्ध स्लॉट्स की संख्या,
- प्रत्येक राउंड से पहले बचे हुए स्लॉट्स,
- बकेट-वाइज आवेदकों की पूरी सूची,
- पात्र और अपात्र घोषित प्रतिभागियों की अंतिम सूची।
संगठन ने यह भी कहा कि सभी पात्रता जांच नीलामी शुरू होने से पहले पूरी कर ली जाए, ताकि नीलामी के दौरान बीच में अपात्र घोषित करने जैसी स्थिति न बने।
न्यूज़ स्लॉट्स की संख्या बढ़ाने की अपील
NBDA ने लोकतंत्र में न्यूज़ चैनलों की अहम भूमिका का हवाला देते हुए न्यूज़ जॉनर के लिए स्लॉट्स की संख्या बढ़ाकर कम से कम 14 करने की मांग की है, जो फिलहाल 12–13 के बीच है। इसके साथ ही, बकेट C (न्यूज़ और करंट अफेयर्स) की कैटेगरी और रिजर्व प्राइस की समीक्षा करने की अपील की गई है। अभी इस कैटेगरी का रिजर्व प्राइस ₹7 करोड़ प्रति स्लॉट है। एसोसिएशन का कहना है कि न्यूज़ ब्रॉडकास्टर्स को केवल व्यावसायिक संस्थाओं की तरह देखना उनकी जनसेवा की भूमिका को कमजोर करता है।
तकनीकी विस्तार और रिसर्च की सिफारिश
क्षमता की कमी को दूर करने के लिए NBDA ने सुझाव दिया है कि—
- नया ट्रांसपोर्ट स्ट्रीम जोड़कर MPEG-2 चैनल क्षमता बढ़ाई जाए,
- 25 से अधिक खाली MPEG-4 स्लॉट्स को MPEG-2 में बदला जाए ताकि वे सभी सेट-टॉप बॉक्स पर उपलब्ध हो सकें।
इसके अलावा, NBDA ने मांग की कि फ्रीडिश की वास्तविक पहुंच और व्यूअरशिप पर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, जिससे नीति निर्धारण और व्यावसायिक फैसलों के लिए ठोस डाटा उपलब्ध हो।
जनसेवा बनाम राजस्व प्राथमिकता
एसोसिएशन का कहना है कि प्रसार भारती की नीलामी नीति केवल राजस्व पर आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसके संवैधानिक दायित्व— अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और समानता— से मेल खानी चाहिए। NBDA ने कहा, “संशोधित ढांचा जनता के हित में होना चाहिए, विविधता सुनिश्चित करनी चाहिए और नागरिकों के सूचना के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए।”
संशोधित नीति का ड्राफ्ट जारी करने की मांग
NBDA ने प्रसार भारती से आग्रह किया कि वह संशोधित ई-ऑक्शन नीति का ड्राफ्ट explanatory memorandum सहित प्रकाशित करे, और अंतिम लागू करने से पहले हितधारकों से परामर्श ले।
इससे क्या होगा?
डीडी फ्रीडिश की ग्रामीण और मीडिया-डार्क इलाकों में विशाल पहुंच है। ऐसे में NBDA की ये सिफारिशें इस बात को रेखांकित करती हैं कि प्रसार भारती के व्यावसायिक राजस्व और जनसेवा के दायित्व के बीच संतुलन बनाना अब और भी अहम हो गया है।



