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मध्य प्रदेश

मरते-मरते भी नजीर बनकर गईं इस वरिष्ठ पत्रकार की अध्यापक माँ

तलाम के वरिष्ठ पत्रकार जीतेंद्र सिंह सोलंकी की माँ श्रीमती मानकुँवर का देहांत हो गया. लेकिन उन्होंने अपने निधन से पहले कुछ ऐसा काम किया जो दूसरों के लिए नजीर बन सके.

मानकुंवर जी ने अपने निधन से पहले नेत्रदान का फैसला लिया था. नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत कहते हैं कि, 6 मई गुरुवार के रात में पत्रकार जीतेंद्र सिंह सोलंकी की पूज्य माताजी स्व. श्रीमती मानकुँवर का स्वर्गवास होने पर नेत्रम संस्था के मीनु माथुर, प्रेस क्लब के मुकेश गोस्वामी, तुषार कोठारी द्वारा पत्रकार पुत्र जीतेंद्र व अन्य परिजनों की तरफ से प्रेरित किया गया था.

निधन होने पर परिजनों की सहमती मिलने के बाद नेत्रम संस्था के सहयोग से रात एक बजे सफल नेत्रदान करवाया. नेत्रदान के दौरान हेमंत मुणत, ओमप्रकास अग्रवाल, शलभ अग्रवाल व गोपाल राठौर उपस्तित रहे. नेत्रम संस्था रतलाम ने कृतज्ञता प्रकट करते हुए सोलंकी फैमिली को धन्यवाद व्यक्त किया.

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बता दें कि नेत्रदाता स्व. श्रीमती सोलंकी अध्यापक पद से रिटायर होने के बाद कई सामाजिक कार्यों में रुचि लेती थीं. अनेक सामाजिक कार्यों में उनका योगदान रहा. और आखिर में नेत्रदान कर भी वे समाज के लिए न सिर्फ एक प्रेरणा बन गईं, बल्कि किसी के अंधेरे जीवन में रोशनी बनकर दिखाई देती रहेंगी.

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