नई दिल्ली | क्विंट डिजिटल लिमिटेड (Quint Digital Limited) ने अपने यूट्यूब चैनल ‘Quint Hindi’ और इससे जुड़े डिजिटल एसेट्स को Shvaas Creations नामक कंपनी को 39.52 लाख रुपये में बेच दिया है। कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि उसकी हिंदी वेबसाइट 5 फरवरी 2025 से बंद कर दी गई है।
Shvaas Creations में 77.5% हिस्सेदारी खरीदी
Quint Digital ने BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) को दी गई जानकारी में बताया कि उसने Shvaas Creations में 77.5% हिस्सेदारी खरीद ली है। इस अधिग्रहण के बाद, अब Shvaas Creations, Quint Digital की सब्सिडियरी कंपनी के रूप में काम करेगी।
Shvaas Creations की स्थापना 17 दिसंबर 2024 को वाणी बिष्ट और शैलेश चतुर्वेदी ने की थी। यह कंपनी जल्द ही ‘किसान इंडिया’ नाम से एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करने की योजना बना रही है, जो मुख्य रूप से किसानों और ग्रामीण भारत से जुड़ी खबरों पर केंद्रित होगा।
Quint Digital को हुआ भारी नुकसान
Quint Digital ने Q3 (तीसरी तिमाही) और 31 दिसंबर 2024 को समाप्त नौ महीनों के वित्तीय नतीजे भी जारी किए हैं।
Q3 में कंपनी की बिक्री ₹85.13 मिलियन रही, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹157.65 मिलियन थी।
कुल राजस्व में भी गिरावट आई, जो पिछले साल के ₹220.32 मिलियन से घटकर ₹159.78 मिलियन रह गया।
कंपनी को ₹31.33 मिलियन का शुद्ध नुकसान हुआ, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में उसे ₹829.07 मिलियन का शुद्ध मुनाफा हुआ था।
Quint Digital के हिंदी कंटेंट को लेकर बड़ा फैसला
Quint Digital द्वारा अपने हिंदी यूट्यूब चैनल और वेबसाइट को बंद करना यह दिखाता है कि कंपनी हिंदी डिजिटल मीडिया से अपने निवेश को कम कर रही है। अब कंपनी का ध्यान Shvaas Creations के जरिए नए डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘किसान इंडिया’ पर रहेगा, जो खासतौर पर कृषि और ग्रामीण खबरों पर फोकस करेगा।
क्विंट में राघव-रितु के साथ अदाणी का कितना हाथ है?
द क्विंट एक भारतीय समाचार वेबसाइट है, जिसे 2015 में राघव बहल और रितु कपूर ने स्थापित किया था। वर्तमान में, द क्विंट का स्वामित्व क्विंट डिजिटल लिमिटेड के पास है, जो बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में सूचीबद्ध कंपनी है। राघव बहल और रितु कपूर इसके प्रमोटर हैं।
मार्च 2022 में, अडानी समूह ने क्विंट डिजिटल की सहायक कंपनी क्विंटिलियन बिजनेस मीडिया प्राइवेट लिमिटेड (QBM) में अल्पांश हिस्सेदारी खरीदने की घोषणा की थी। यह निवेश केवल QBM तक सीमित था और द क्विंट या क्विंट डिजिटल की अन्य संपत्तियों से संबंधित नहीं था।
इसलिए, द क्विंट का स्वामित्व अभी भी क्विंट डिजिटल लिमिटेड के पास है, और अडानी समूह का इसमें कोई स्वामित्व नहीं है।


