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दिल्ली

मोदीकाल में पत्रकारिता करने का गुनाह कर रहे राहुल कोटियाल को दिल्ली पुलिस ने मारी लाठियां!

इंद्रेश मैखुरी-

राहुल कोटियाल ने रेड इंक से लेकर रामनाथ गोयनका अवार्ड तक जनपक्षीय पत्रकारिता के लिए दर्जनों सम्मान पाए हैं. अभी कुछ महीने पहले ही तो उन्हें भैरव दत्त धूलिया की स्मृति में दिये जाने वाले सम्मान के हम गवाह बने थे.

राहुल कोटियाल

लेकिन जिस तरह मोदी और अमित शाह की पुलिस ने उन पर कल कवरेज के दौरान लाठियां बरसाई, सबसे बड़ा पुरस्कार तो वो लाठियां ही हैं- गोदी मीडिया न होने के लिए!

खड़े हो कर लाठी खाने वालों की हमारी कंपनी में वेलकम रहेगा ब्रो!

राहुल ने कश्मीर से लेकर बस्तर तक ऐसी जगहों पर कवरेज की, जहां वे मारे भी जा सकते थे! लेकिन वहां उन्हें खरोंच तक न आई. और वे कहां पीटे गए- ऐन देश की राजधानी दिल्ली में, जहां उनका गुनाह यह था कि वे पत्रकारिता कर रहे थे!

बताइये इससे बड़ा गुनाह कोई हो सकता है मोदी काल में! मोदी काल में पत्रकार नहीं गोदी मीडिया होना होता है प्यारे राहुल, पर तुम ये समझे नहीं! अब भी कौन सा समझोगे पर थोड़ा उन बेचारों की जिकुड़ी पर छपछापी जरूर पड़ेगी, जिनकी जिकुड़ी तुम्हारे गोदी मीडिया न होने से झुराती रहती है! परपीड़न का सुख ही उन बेचारों का प्राप्य है!

लानत उन पर पहले ही भरपूर भेजी जा चुकी है, फिर भेजते हैं! वे भले ही उसे अंकों में या किलो में गिनते हैं पर उन्हें हासिल लानत मनों – टनों में है! वे लानत के ही महल के गुंबद पर बैठे हैं! इस कृत्य से लानत के उस महल की नीचता की ऊंचाई कुछ और बढ़े, इसलिए उनके लिए कुछ लानत और भेजते हैं!

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