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रवि नायर मामला: पत्रकारों के लिए चेतावनी, अदानी के खिलाफ एकजुटता की जरूरत

रवि नायर को आपराधिक मानहानि के मामले में एक साल की जेल की सज़ा सिर्फ एक पत्रकार का व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी भारतीय मीडिया बिरादरी के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

अगर रवि नायर जैसे खोजी पत्रकार—जो शब्दों का चयन सोच-समझकर करते हैं, तथ्यों और सार्वजनिक दस्तावेज़ों के आधार पर लिखते हैं—को जेल भेजा जा सकता है, तो इसका मतलब साफ है कि कोई भी स्वतंत्र पत्रकार सुरक्षित नहीं है।

मीडिया से जुड़े कई वरिष्ठ पत्रकारों और संगठनों का मानना है कि अब अदानी जैसे ताकतवर कॉरपोरेट समूहों के खिलाफ देर-सवेर पत्रकारों को एकजुटता दिखानी ही पड़ेगी।

वरना आशंका यह है कि ताक़त और रसूख के नशे में यह व्यवस्था प्रेस की बची-खुची आज़ादी को भी निगल जाएगी, और पत्रकारिता सिर्फ सत्ता और कॉरपोरेट की प्रवक्ता बनकर रह जाएगी।

रवि नायर का मामला इस बात की मिसाल बन चुका है कि कैसे कानूनी मुकदमों और जेल की धमकी के ज़रिये असहमति की आवाज़ों को दबाया जा रहा है।

इसीलिए आज ज़रूरत है कि पत्रकार व्यक्तिगत डर से ऊपर उठकर सामूहिक तौर पर रवि नायर के साथ खड़े हों—क्योंकि अगर आज एक को चुप कराया गया है, तो कल यह सिलसिला सब तक पहुंचेगा।

यह सिर्फ रवि नायर की लड़ाई नहीं है, यह पत्रकारिता के अस्तित्व और लोकतंत्र की बुनियादी आत्मा की लड़ाई है।


अदानी के ख़िलाफ़ पत्रकारों को देर-सवेर एकजुटता करनी पड़ेगी!
वरन तो यह ताक़त के नशे में प्रेस की बची-खुची आज़ादी को निगल जाएगा.
पत्रकारों को रवि नायर के साथ खड़ा होना चाहिए. -मनदीप पुनिया, पत्रकार


If you read what Ravi Nair has written, you’ll be surprised that he’s been sentenced to one year in jail for these tweets.
He chooses his words with caution and precision. India’s courts are sending a chilling message to Hindutva opponents.-दाराब फारुकी

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