नई दिल्ली। मीडिया इंडस्ट्री में छंटनी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला चर्चित न्यूज़ चैनल रिपब्लिक भारत से जुड़ा है। सूत्रों की माने तो मॉर्निंग शिफ्ट में काम करने वाले 7 पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया गया है।
हालांकि, इनकी बर्खास्तगी की कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है, जिससे संस्थान में कार्यरत अन्य पत्रकारों के बीच असमंजस और डर का माहौल है।
बता दें कि हाल के दिनों में कई बड़े मीडिया संस्थानों में पत्रकारों की छंटनी की ख़बरें आई हैं। कुछ दिन पहले ही ABP न्यूज़ ने भी दर्जनों पत्रकारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस तरह अचानक हो रही छंटनियों से मीडिया कर्मियों में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
क्या कहता है मीडिया जगत?
मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव और टेलीविजन मीडिया की बदलती प्राथमिकताओं के चलते कई संस्थान अपने बजट में कटौती कर रहे हैं। लेकिन बिना किसी पूर्व सूचना के पत्रकारों को नौकरी से निकाल देना एक गंभीर मुद्दा है, जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो जाता है।
पत्रकारों के भविष्य पर मंडराता संकट
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा लग रहा है कि खुद पत्रकार ही सुरक्षित नहीं हैं। बार-बार हो रही छंटनियों से यह सवाल उठने लगा है कि क्या न्यूज़ चैनलों में काम करने वाले पत्रकारों के लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था नहीं होनी चाहिए?
चैनल के कुछ कर्मचारियों ने भड़ास से संपर्क कर बताया कि-
“बिना कोई वजह बताये एम्प्लॉयीज को निकल दिया। पाँच दिन पहले वार्निंग थी अंडर रिव्यू फॉर ए मंथ और पाँच दिन बाद रिजाइन माँग लिया वो भी सालों से काम कर रहे एम्प्लॉयज़ को बिना कारण बताये।”
“रिपब्लिक भारत में बिना कोई वजह बताये एम्प्लॉयीज को निकल दिया। पाँच दिन पहले वार्निंग थी अंडर रिव्यू फॉर ए मंथ और पाँच दिन बाद रिजाइन माँग लिया वो भी सालों से काम कर रहे एम्प्लॉयज़ को बिना कारण बताये। ज़्यादा पूछने पर कॉस्ट कटिंग का बहाना बताया गया।”


एबीपी न्यूज से छंटनी की खबर यहां पढ़ें…



