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ज़ी न्यूज़ हिंदी डिजिटल में तानाशाही से त्रस्त एक पत्रकार की पीड़ा!

विषय: ज़ी न्यूज़ हिन्दी डिजिटल में तानाशाही: HR पॉलिसी को ताक पर रख 6 दिन काम का फरमान

सेवा में,
भड़ास4मीडिया,

ज़ी न्यूज़ हिन्दी डिजिटल (Zee News Hindi Digital) की टीम इन दिनों भारी मानसिक और शारीरिक शोषण का शिकार हो रही है। हाल ही में टीम में आए नए एडिटर अनुज खरे ने अपना तानाशाही रवैया दिखाते हुए कर्मचारियों को एक ईमेल भेजा है। इस मेल में उन्होंने फरमान सुनाया है कि अब से सभी को हफ्ते में 6 दिन और हर दिन पूरे 9 घंटे काम करना होगा। मैंने इस ईमेल के स्क्रीनशॉट और सुबूत के तौर पर इस मेल के साथ संलग्न किए हैं, जिसमें साफ़ तौर पर ‘6 days a week’ की बात लिखी गई है।

Email screenshot announcing a new site launch with key targets: story targets, no AI content, working days, and plan details; includes red subsection headings.
Section '3. Working days and WFH': schedule is 6 days a week; WFH allowed only in special/exceptional cases with prior approval; ends with 'Rgds Anuj'.

सबसे हैरानी की बात यह है कि ज़ी न्यूज़ की आधिकारिक HR पॉलिसी 5 वर्किंग डेज (हफ्ते में 5 दिन काम) की है। लेकिन अनुज खरे ने बिना किसी HR हेड की उपस्थिति या आधिकारिक सहमति के, मनमाने ढंग से यह ईमेल कर दिया है। ऐसा लगता है कि उनके लिए HR पॉलिसी के कोई मायने नहीं हैं। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ समझ आ रहा है कि सिस्टम में ‘MOH गैंग’ पूरी तरह से हावी हो चुकी है और नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कर्मचारियों पर दबाव बनाने का खेल चल रहा है।

ग्राउंड रियलिटी यह है कि पिछले 6 महीने से ज़ी न्यूज़ हिन्दी डिजिटल की टीम पहले से ही हफ्ते में 6 दिन काम कर रही है। बिना किसी उचित ब्रेक के लगातार काम करते-करते पूरी टीम अब बुरी तरह त्रस्त हो चुकी है। काम के इस अमानवीय दबाव के कारण लोग बीमार पड़ रहे हैं। हद तो यह है कि अगर कोई कर्मचारी अपने स्वास्थ्य या निजी कारणों से कंपनी की मूल पॉलिसी के अनुसार हफ्ते में 2 दिन का ऑफ ले लेता है, तो अगले दिन उससे ऐसे सवाल-जवाब किए जाते हैं मानो उसने कोई बड़ा अपराध कर दिया हो।

अब इस नए लिखित आदेश (ईमेल) के जरिए कर्मचारियों पर खुला प्रेशर बनाया जा रहा है। भड़ास मीडिया से अनुरोध है कि मीडियाकर्मियों के हित में हमारी इस पीड़ा को प्रमुखता से प्रकाशित करें, ताकि ज़ी न्यूज़ के उच्च प्रबंधन और HR विभाग की नींद टूटे और यह तानाशाही बंद हो।

धन्यवाद,
ज़ी न्यूज़ हिन्दी डिजिटल का एक त्रस्त पत्रकार

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