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आज के अखबार : प्रचार और महानता के बीच विविधता व सहयोग की ‘ताकत’ जो शाकाहार की जिद्द में खो गई

Hindi newspaper front page with a cartoon of two hands watering a BRICS plant, symbolizing efforts to improve China–India ties.

लाल आंखें दिखाने की जरूरत के बाद…. यहां का और वहां का भी। सम्मेलन में चीन से सीमा विवाद पर कुछ हुआ नहीं, यहां कुछ छपा नहीं और जो छपा वह चीन का। सब चंगा सी किस्म की पत्रकारिता।

संजय कुमार सिंह

आज लगातार तीसरे दिन मेरे 10 के 10 अखबारों का पहला पन्ना ब्रिक्स सम्मेलन की खबरों से भरा है। ब्रिक्स सम्मेलन में कुछ खास हुआ नहीं और जो हुआ वह सबके लिए सामान्य खबर है लेकिन ज्यादातर अखबारों की खबर भारत और प्रधानमंत्री को महान बनाने वाली है। इसमें कल सोशल मीडिया पर मेहमानों के लिए सिर्फ शाकाहारी खाना परोसे जाने की चर्चा थी लेकिन आज अखबारों में पहले पन्ने पर इसकी चर्चा नहीं के बराबर है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को महान बनाने वाला शीर्षक दैनिक भास्कर में है, “जिनपिंग की मौजूदगी में बोले मोदी – टेक्नोलॉजी, क्रिटिकल मिनरल्स हथियार बने तो विकास रुकेगा।” लगभग ऐसा ही शीर्षक कई और अखबारों में है। तकरीबन सबमें लीड। हालांकि, दैनिक भास्कर के फ्लैग शीर्षक के अनुसार, 18वां शिखर सम्मेलन संपन्न, 2027 में चीन में होगा; आखिरी दिन पीएम ने चीन को चेताया। सोशल मीडिया पर भारत की मेहमानवाजी की चर्चा के साथ यह भी खबर थी कि रात के खाने में शी जिन पिंग नहीं आए।

आज वह सब पहले पन्ने पर नहीं है, उल्टे आखिरी दिन पीएम ने चीन को चेताया जैसे शीर्षक हैं और इसके अपने मायने हैं। खासकर इसलिए कि लद्दाख में अप्रैल 2020 की स्थिति बहाल करने पर भारत की चुप्पी की भी आलोचना हो रही है। यही नहीं, देशबंधु की लीड का फ्लैग शीर्षक है – प्रधानमंत्री मोदी ने गिनाईं ‘ब्रिक्स’ की उपलब्धियां बोले, विविधता और सहयोग ही हमारी असली ताकत। उपशीर्षक है, सम्मेलन के दूसरे दिन मोदी ने लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर विशेष बल दिया। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई उपलब्धि या नई बात है। दूसरी ओर, ब्रिक्स के मेहमानों के लिए ‘शुद्ध’ शाकाहारी खाना परोसे जाने की खबर है। इसपर सबसे सामान्य सवाल था अगर चीन अपने यहां सिर्फ मांसाहार ही परोसे तो क्या होगा? आज खबर है कि अगले साल चीन में सम्मेलन होना है। देखते हैं इंडिया से भारत हो गए सदस्य के लिए ब्रिक्स चीन में शाकाहार की कैसी व्यवस्था करता या कर पाता है।

आज खबर सिर्फ यह नहीं है कि आखिरी दिन पीएम ने चीन को चेताया। द हिन्दू की सेकेंड लीड का शीर्षक है – ब्रिक्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दुनिया ‘दोहरे मापदंडों’ से मुक्त हो: शी जिनपिंग। दि इंडियन एक्सप्रेस की सेकेंड लीड का शीर्षक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हवाले से है। इसके अनुसार, देश के सभी 21 राजग शासित राज्यों में 2029 से पहले यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू कर दिया जाएगा। आज यह महत्नपूर्ण खबरों में है। देशबन्धु की सेकेंड लीड, कांग्रेस का यह आरोप है कि चीन के सामने मोदी सरकार ने समर्पण कर दिया। लीड का शीर्षक है,  विविधता और सहयोग ही हमारी असली ताकत है। प्रधानमंत्री ने यह सब तब कहा है जब अपनी इस ताकत के बावजूद भारत ने मेहमानों को सिर्फ शाकाहारी भोजन करवाया और लचीलेपन, नवाचार, सहयोग तथा स्थिरता पर विशेष बल दिया। जाहिर है, मामला बहुत सीधा-सरल नहीं है।

इसके बावजूद अमर उजाला का बैनर शीर्षक है, ब्रिक्स का अब साझा लक्ष्य… सर्वजन हिताय। हालांकि, अखबार ने ऐसे मुद्दे हाईलाइट किए हैं जो दूसरे अखबारों में लीड के साथ की दूसरी खबरों के शीर्षक हैं। अमर उजाला का एक शीर्षक है, भारत के साथ रिश्तों को सामान्य स्थिति में लाना चाहता है चीन जबकि द टेलीग्राफ का एक शीर्षक है, लद्दाख से पीछे हटने के मामले में चुप्पी से पूर्व सैनिक नाराज़। खबर के अनुसार, रविवार को रिटायर्ड जनरलों ने पूर्वी लद्दाख में अप्रैल 2020 वाली स्थिति बहाल करने के मुद्दे पर भारत की लगातार चुप्पी पर अफ़सोस जताया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच शनिवार को हुई बैठक के बाद जारी बयानों में क्षेत्रीय स्थिति बहाल करने का कोई ज़िक्र नहीं था।

सेना के पूर्व अधिकारी लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि भारत चीन से उन इलाक़ों से पीछे हटने के लिए कहे जिन पर उसने मई 2020 से कब्ज़ा कर रखा है। एक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल ने ‘द टेलीग्राफ’ से कहा, “पूर्वी लद्दाख में क्षेत्रीय स्थिति को पहले जैसा बहाल करने के मुद्दे पर भारत का आधिकारिक बयान चुप था।  लगातार की यह चुप्पी बताती है कि भारत, ‘लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल’ (एलएसी) के साथ नई स्थिति बनाने की चीन की योजना के आगे झुक रहा है।” द टेलीग्राफ में ब्रिक्स सम्मेलन से संबंधित चार खबरों के अलावा मणिपुर में चार कुकी की हत्या की खबर भी पांच कॉलम में छपी है। नवोदय टाइम्स में छह कॉलम की लीड का शीर्षक है – प्रौद्योगिकी, खनिजों को न बनाएं हथियार मोदी। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, शांति और सहयोग के संदेश के साथ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन।

पहले पन्ने पर ब्रिक्स की खबरों के साथ आज एक खबर का शीर्षक है, बंगाल सरकार ने 252 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया। द टेलीग्राफ के पहले पन्ने की खबरों में यह खबर नहीं है लेकिन जो है वह किसी और अखबार में पहले पन्ने पर नहीं है। इसका शीर्षक है, ब्रिक्स के भोजन में पूरी तरह शाकाहारी मेन्यु का प्रचार। ब्रिक्स सम्मेलन की चार खबरों में एक खबर, ईरान-संयुक्त अरब अमीरात की मुलाकात में उम्मीद की है। अमर उजाला ने भी चार खबरें छापी हैं और यह चौथी है, “नई सुबह : ईरान-यूएई अतीत भूलने को तैयार : पेजेश्कियन”। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक है – पेजेश्कियान ने कहा, ईरान, यूएई जो बीत गई, बात गई पर सहमत हुए। इंडियन एक्सप्रेस ने इस पर विशेष खबर की है और बताया है कि अंदरखाने ब्रिक्स वार्ता कैसे आगे बढ़ी, ऐसा कैसे संभव हुआ। इसमें चीन और रूस का प्रोत्साहन भी शामिल रहा। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, शी की मौजूदगी में मोदी ने खनिज और तकनीक का इस्तेमाल हथियार की तरह करने के खिलाफ चेतावनी दी। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, टेक्नोलॉजी और ज़रूरी मिनरल्स के हथियार के तौर पर इस्तेमाल पर चिंता जताई मोदी ने। कहा, ब्रिक्स, जो अब अपने तीसरे दशक में है, उसे ‘सिर्फ़ विचारों’ के बजाय ठोस कामों पर ध्यान देना चाहिए; उन्होंने सप्लाई चेन को मज़बूत करने और महामारी व जलवायु आपदाओं से निपटने की क्षमता बढ़ाने के लिए कई पहलें गिनाईं। दि एशियन एज की लीड और सेकेंड लीड भी वही खबरें हैं। मणिपुर में चार लोगों के मारे जाने की खबर भी यहां चार कॉलम में है। आज यह दैनिक भास्कर के साथ दि इंडियन एक्सप्रेस में भी पहले पन्ने पर है।

भारत के मतलब की एक खबर आज ओमान तट के पास तेल टैंकर पर हमले की भी है। इसके 13 भारतीय क्रू को बचा लिया गया जबकि एक लापता है। दैनिक भास्कर और कुछ अन्य में छपी खबर के अनुसार भारत ने सुरक्षित नौवहन बहाल करने के लिए कहा है। इससे अलग हिन्दी के दो अखबारों में दो तरह की खबर है। देशबन्धु का बॉटम कहता है, ब्रिक्स से बांग्लादेश की दूरी बनेगी, भारत के लिए नई चुनौती। नवोदय टाइम्स ने कर्नल मयंक चौबे (सेवा निवृ्त) की टिप्पणी प्रकाशित की है। इसका शीर्षक है, भारत के पास अपने रक्षा हितों को बढ़ाने का अवसर। 

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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