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आज के अखबार : सरकार के ‘प्रयास’ की सफलता का भरपूर प्रचार और फिर ‘खबर’ का फिस्स हो जाना

आज भारतीय राजनीति की प्रचार केंद्रित पत्रकारिता के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय असर को जानिये तथा संपादकों का अपना नजरिया भी समझिये

संजय कुमार सिंह

एक खबर जो कल खूब छपी थी। आज धुल गई। आज धुलाई की खबर भी छपी है। मैंने यहां लिखा था, द हिन्दू की दूसरी खबर भी सरकारी प्रचार है। यह यमन में भारतीय नर्स निमिशा प्रिया की फांसी टल जाने से संबंधित है और बताया गया है कि, संबंधित संवेदनशीलताओं के बावजूद भारतीय अधिकारी स्थानीय जेल अधिकारियों और अभियोजन कार्यालय से नियमित संपर्क में रहे हैं जिससे मामले को टालना संभव हुआ है। पहले की रिपोर्ट के अनुसार निमिशा प्रिया को आज (बुधवार) फांसी दी जानी थी हालांकि, आधिकारिक घोषणा उपलब्ध नहीं कराई गई है। भारत में यमन के दूतावास ने पूर्व में एक बयान जारी कर कहा था कि सुश्री प्रिया को यमन सरकार ने फांसी नहीं दी है। अखबार ने लिखा है कि उसे बताया गया था कि सरकार मामले से संबंधित सभी स्टेकधारकों के साथ आपसी सहमति योग्य समाधान चाहती है। समझौते के बीच अभी फांसी टली है। खबर के अनुसार केरल की रहने वाली सुश्री प्रिया 2017 में एक हत्या की दोषी पाये जाने के बाद से फांसी का इंतजार में थीं। केरल और यमन की यह खबर आज अमर उजाला में पहले पन्ने पर तीन कॉलम में है। दि एशियन एज में पांच कॉलम में है। टाइम्स ऑफ इंडिया में चार कॉलम में है (लेकिन पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने के पीछे) हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ में तीन कॉलम, टाइम्स ऑफ इंडिया में दो कॉलम, नवोदय टाइम्स में सिंगल कॉलम में है। देशबन्धु में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। यहां जिन्दगी की जंग हार गई छात्रा – सिंगल कॉलम की खबर है। उपशीर्षक है, सहायक प्रोफेसर से परेशान होकर किया था आत्मदाह। इसके नीचे की सिंगल कॉलम की खबर का शीर्षक है, ”यह आत्महत्या नहीं ‘सिस्टम’ द्वारा संगठित हत्या है : राहुल”। उड़ीशा की छात्रा का मामला या तो पहले पन्ने पर नहीं है या फिर सिंगल कॉलम में ही। अमर उजाला अपवाद है। इसमें दोनों खबरें पहले पन्ने पर हैं और प्रमुखता से। उड़ीशा की खबर यहां चार कॉलम में है।

अमर उजाला में आज पहले पन्ने पर इस खबर का फॉलोअप नहीं है। हिन्दुस्तान टाइम्स में तीन कॉलम की खबर का दो लाइन का शीर्षक है – निमिशा को माफ नहीं करेंगे, सिर्फ प्रतिशोध चाहते हैं। निमिशा के परिवार ने बातचीत के लिए सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम को अधिकृत किया है। जेरोम ने मृतक, तलाल अब्दो महदी के परिवार की नाराजगी की पुष्टि की और बताया कि ऐसा भारत से आई उन रपटों के बाद हुआ है, जिनमें यह दावा किया गया है कि महदी के परिवार को 10 लाख डॉलर (लगभग 8 करोड़ रुपये) ब्लड मनी के रूप में दिए जाएंगे, जिसके बाद वे प्रिया को माफ कर देंगे। कल जो खबर छपी थी उसका मूल भाव यह था कि भारत सरकार निमिशा प्रिया के परिवार के संपर्क में है और उन्हें मदद मुहैया करा रही है। कल खबर यह हो सकती थी कि खबरों के अनुसार निमिशा प्रिया के जीवन की उम्मीद मृतक के परिवार पर टिकी है और यह ब्लड मनी के भुगतान और उसे स्वीकार किये जाने पर निर्भर है। अभी तक की बातचीत में मृतक का परिवार शामिल नहीं था। यही नहीं, कल यह भी बताया गया था कि यमन की राजधानी सना की राजनीतिक स्थिति जटिल है और वहां होउथी समूह का कब्जा है। यमन की सरकार एडेन से काम करती है। यमन में भारत की राजनयिक उपस्थिति नहीं है। असल में  सुन्नी मुस्लिम नेता कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार जिन्हें भारत का ग्रैंड मुफ्ती कहा जाता है ने मीडिया से यमन के इस आदेश की पुष्टि की और कहा है कि परिवार की ओर से उन्होंने यमन के विद्वानों से बात की। लेकिन ज्यादातर खबर इस प्रकार है, संबंधित संवेदनशीलताओं के बावजूद भारतीय अधिकारी स्थानीय जेल अधिकारियों और अभियोजन कार्यालय से नियमित संपर्क में रहे हैं। इससे मामले को टालना संभव हुआ है।

जाहिर है, संबंधित परिवार की सहमति के बिना खबर का खास महत्व नहीं था फिर भी खबर खूब छपी जबकि कल जो छपा था उसी से पता था कि मामला गड़बड़ा सकता है या खबर अभी पक्की नहीं है। पर भारत सरकार को श्रेय देना था, दिया गया। आज द टेलीग्राफ में सिंगल कॉलम की खबर है, नर्स को फांसी ही होनी चाहिये, पीड़ित के परिवार ने कहा। टाइम्स ऑफ इंडिया में दो कॉलम की खबर है, हत्या के शिकार यमन नागरिक के रिश्तेदारों ने निमिशा को माफ करने से इनकार किया। कल के प्रचार के बाद आज की खबर है, यमन में मौत की सजा का सामना कर रही भारतीय नर्स निमिशा प्रिया को बचाने की कोशिशों को झटका लगा है। केरल की नर्स को बचाने की कोशिशों में जुटे सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल जेरोम का कहना है कि पीड़ित तलाल अब्दो महदी का परिवार इस बात से नाराज है कि रपटों में परिवार को न्याय से ज्यादा पैसे में दिलचस्पी दिखाई गई है। एनडीटीवी से बातचीत में जेरोम ने कहा कि वह महदी के परिवार के साथ संबंधों को सुधारने और उन्हें फिर से स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। निमिशा प्रिया को उनके पूर्व बिजनेस पार्टनर तलाल-अब्दो महदी की हत्या के लिए यमन में मौत की सजा सुनाई गई है।

सरकारी प्रचार के अगले ही दिन सारी खुशी खत्म होने के बाद आज दो खबरें ऐसी हैं जो लीड बननी चाहिये थी पर दो अलग-अलग अखबारों में ही है। पहली खबर द टेलीग्राफ में लीड है। इस खबर के अनुसार अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना की जांच रिपोर्ट के बाद विशेषज्ञों की राय बंटी हुई है। एक राय यह है कि दुर्घटना पायलट की गलती के कारण हुई और दुर्घटना के कारण को लेकर टकराव है। इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर पांच कॉलम में टॉप पर है। इसका शीर्षक है, जांच हो रही है कि दुर्घटना से कुछ घंटे पहले तकनीकी खराबी तो नहीं थी और पायलट के कमांड के बिना स्विच ईंधन की आपूर्ति बंद कर सकता है। उपशीर्षक है, फ्लाइट डाटा एनालिसिस टेक्निकल लॉग में दर्ज कई गड़बड़ियों पर फोकस करेगा। टाइम्स ऑफ इंडिया में एअर इंडिया का बयान सिंगल कॉलम में है। शीर्षक है, बोइंग में फुएल स्विच का कोई मामला नहीं है। आज की एक और महत्वपूर्ण खबर है – राहुल गांधी ने कहा, हिमंता खुद को राजा समझते हैं, जेल जाएंगे। राहुल गांधी ने यह भी कहा है कि मोदी, शाह भी सरमा को बचा नहीं पायेंगे। कहने की जरूरत नहीं है कि कांग्रेस सरकार को भ्रष्ट प्रचारित करके नरेन्द्र मोदी सत्ता में आये और भ्रष्टाचार के एक आरोपी हिमंत बिस्व सरमा उनकी पार्टी से असम के मुख्यमंत्री हैं। उनके बारे में राहुल गांधी का यह बयान महत्वपूर्ण और गंभीर है लेकिन अखबारों में राहुल गांधी को जगह नहीं मिलती है। आज भी नहीं मिली है। कम से कम वैसी जैसा यह दावा है।

संभव है इसका कारण हिमंत बिस्व सरमा का कथित पलटवार हो। देशबन्धु ने इसे हिमंता ने भी राहुल पर कसा तंज के तहत प्रकाशित किया है कि राहुल भूल जाते हैं, वह खुद जमानत पर हैं। पता नहीं सरमा को यह याद है कि नहीं कि राहुल को चोरों से संबंधित एक सवाल करने के लिए सजा हो चुकी है, उनकी सांसदी चली गई थी। बंगला खाली करना पड़ा था। हिमंत सरमा भूल गये हों पर हम नहीं भूले और राहुल गांधी भी नहीं भूले होंगे और भूला तो कोई क्लिन चिट का मामला भी नहीं है वरना कोई पूर्व तड़ी पार भी पहली बार देश के गृहमंत्री बने हैं और यह व्यवस्था है सबको मालूम है। वाशिंग मशीन पार्टी की राजनीति सब लोग देख रहे हैं और उसमें यह शामिल है कि खबरों पर अघोषित सेंसर है। इसीलिए, राहुल गांधी की एक और मांग को आज अखबारों ने महत्व नहीं दिया है। वह मांग है, जम्मू कश्मीर को (फिर) राज्य का दर्जा मिले। यह खबर आज द हिन्दू में भी है। इन खबरों को छोड़कर आज के अखबारों की लीड इस प्रकार है

1. टाइम्स ऑफ इंडिया

सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी से कहा, अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के मामले में जांच गलत दिशा में है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर दो कॉलम में है। शीर्षक है, प्रोफेसर के मामले में एसआईटी ने सर्वोच्च अदालत से कहा, आपको एक डिक्सनरी की जरूरत है।

2. हिन्दुस्तान टाइम्स

सीडीएस न चेताया, खास आयातित तकनीक पर निर्भर नहीं कर सकते है  

3. इंडियन एक्सप्रेस

रूस से व्यापार के लिए भारत, चीन, ब्राजील पर प्रतिबंध लग सकते हैं – नाटो प्रमुख

4. दि एशियन एज

संसद सत्र के दौरान केंद्र सोमवार से शुरू करके 8 नये विधेयक पेश करेगा। 

अखबार की सेकेंड लीड है, उड़ीशा में छात्रा की ‘आत्महत्या’ की कोशिश के बाद झड़प और प्रदर्शन। यह खबर टाइम्स ऑफ इडिया में भी प्रमखता से है।

5. द टेलीग्राफ

विमान दुर्घटना से संबंधित कारणों को लेकर विवाद

6. द हिन्दू

कृषि कार्यक्रम पेश करने के लिए सरकार ने 36 योजनाओं का विलय कराया

7. अमर उजाला

पीएम धन धान्य कृषि योजना मंजूर, 1.7 करोड़ लघु-सीमांत किसानों को होगा लाभ

8. नवोदय टाइम्स

आज के युद्ध पुराने हथियारों से नहीं जीत सकते : सीडीएस

9. देशबन्धु

हिमंता खुद को राजा समझते हैं, जेल जाएंगे।

जाहिर है कि एक खबर दूसरे अखबार के लिए लिये लीड नहीं है। ऐसी खबरें तो बिल्कुल नहीं जो भाजपा सरकार के खिलाफ है। खासकर, उड़ीशा में छात्रा की ‘आत्महत्या’ की कोशिश के बाद झड़प और प्रदर्शन। डबल इंजन वाले उड़ीशा की यह खबर पहले भी ऐसे ही छिट-पुट छपती रही है। हरियाणा में एसआईटी की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भी गंभीर है। यह कहना कि आपको डिक्सनरी की जरूरत है – बड़ी और दिलचस्प बात है लेकिन शीर्षक कुछ और है। इसीलिये यह लीड नहीं है या जहां है वहां भी शीर्षक कुछ और है। जम्मू व कश्मीर को राज्य का दर्जा देने की मांग पुरानी और जायज है। न जाने सरकार क्यों नहीं इसकी पुरानी स्थिति बहाल कर रही है फिर भी अपनी तरफ से खबर तो छोड़िये जब होती है तब भी नहीं छपती है। निमिशा प्रिया का मामला तो आज खास तौर पर उल्लेखनीय है। प्रचार पहले पन्ने पर छपा जबकि खबर ही बता रही थी कि इंतजार कर लेना चाहिये। पर कल इंतजार नहीं किया गया और आज खबर को पहले पन्ने पर वो प्रमुखता नहीं मिली। इस सरकार ने माओवादियों को खूब निशाना बनाया है। भिन्न मौकों पर बड़ी संख्या में माओवादी मारे गये हैं। इनमें महिलाएं और बच्चे भी हैं। इनका अपराध साबित भी हो तो मुठभेड़ में इतनी बड़ी संख्या में मारा जाना सामान्य नहीं है। ना ही इससे माओवाद की समस्या खत्म होने वाली है। संभव है यह भी कश्मीर की आतंकवाद की समस्या की तरह खत्म किये जाने की घोषणा के बाद भी सिर उठा ले। हालांकि अभी तो इसे खत्म करने का दावा भी नहीं किया गया है। आज भी एक ईनामी माओवादी के मारे जाने की खबर है। इसमें एक जवान के बलिदान और नागरिक की मौत की भी खबर है जो मुठभेड़ और उसके तरीके तथा जरूरत पर विचार करने के लिए पर्याप्त हो सकती है।

हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर इन मौतों को सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। शीर्षक है, “माओवादियों ने ‘भारी नुकसान’ की बात स्वीकार की, कहा गये साल 357 मारे गये”। इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों का कथित मुठभेड़ में मारा जाना निश्चित रूप से चिन्ता और जांच का विषय होना चाहिये पर इसे उपलब्धि के रूप में पेश किया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स में ही एक खबर है, हाईकोर्ट ने पुलिस की आलोचना की, पंजाब के कर्नल और उनके बेटे की पिटाई के मामले की जांच सीबीआई को सौंपी। यह हरियाणा पुलिस की आलोचना की खबर से अलग है। पंजाब पुलिस पर सेना के कर्नल औऱ उनके बेटे से मारपीट की शिकायत पुलिस जांच से हाईकोर्ट असंतुष्ट है लेकिन कार्रवाई? सीबीआई जांच तो सिर्फ मार-पीट के मामले की होगी। जांच निष्पक्ष या ठीक से नहीं करने के लिए पंजाब पुलिस को भी तो सजा होनी चाहिये। पर ऐसा होता नहीं है। भाजपा शासित डबल इंजन वाले राज्यों में तो इसकी उम्मीद भी नहीं की जाती है पर पंजाब का मामला अलग हो सकता था। वहां आम आदमी पार्टी की सरकार है। पर पुलिस का रवैया वही है। पुलिस की साख खराब होने के कारण ही बुलंदशहर में ग्रामीणों ने दिल्ली के पुलिस वालों पर हमला कर आरोपियों को भागने दिया होगा। यह खबर भी हिन्दुस्तान टाइम्स के पहले पन्ने पर है और ये सारी खबरें एक ही दिन, एक ही पन्ने पर होने से पता चलता है कि देश में पुलिस की मनमानी कितनी बढ़ गई है, सरकार चाहे किसी पार्टी की हो। कहने की जरूरत नहीं है कि ये सब खबरें तब हैं जब डबल इंजन सरकार के खिलाफ खबरों को प्राथमिकता नहीं मिलती है। अगर आज यहां मिली है तो उसका कारण यही होगा कि मामले बहुत बढ़ गये हैं या स्थिति गंभीर हो चुकी है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी केंद्र सरकार की उपलब्धियां चिन्ताजनक हैं। दि एशियन एज की एक खबर के अनुसार हाल में संपन्न चीन के एससीओ के रीडआउट (साझा बयान) में पहलगाम हमले का जिक्र नहीं है। खबर में इसे चूक कहा गया है लेकिन जिस ढंग से दूसरे मामलों में भी ऐसा हुआ है, विरोध किया जा चुका है उससे संभावना है कि यह इरादतन भी हो। भले ही व्यावहारिक तौर पर इसका ज्यादा अंतर नहीं हो पर यह भारत के विदेश संबंध और चाहतों को पूर्ण कराने में नाकामी या असलफलता का मामला तो है ही। ड्रोन या यूएवी के मामले में भारत के सीडीएस का कहा जो आज छपा है उसपर राहुल गांधी बहुत पहले बोल चुके हैं लेकिन सरकार ने कोई कार्रवाई की होती तो आज वे क्यों बोलते? और सरकार विरोधी यह खबर आज पहले पन्ने पर है तो इसका कारण भी सोचा जाना चाहिये। भारतीय जनता पार्टी की राजनीति और मनमानी तो मीडिया में नहीं ही छपती है।

इसलिए, आज इंडियन एक्सप्रेस की खबर को मिसाल माना जाये तो अनुमान लगाया जा सकता है कि डबल इंजन वाले राज्यों में वास्तविक स्थिति क्या होगी। खबर के अनुसार, पटना की मेयर सीता सूाह के बेटे के खिलाफ पटना नगर निगम की बैठक के बाद की धक्का-मुक्की में मारपीट का मामला है और वह फरार चल रहा है। उसकी तलाश करने के लिए पुलिस ने इस हफ्ते के शुरू में उनके घर पर छापा मारा था। इसके खिलाफ उन्होंने प्रदर्शन आयोजित किया। एक तरफ सत्तारूढ़ दल के नेता की यह खबर दूसरी तरफ अमर उजाला की एक खबर का शीर्षक है, न्याय के लिए 15 दिन तक फ्रीजर में रखा बेटे का शव। यह बंगाल का मामला है और अदालत ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया है। शव मालदा जिले के शिक्षा संस्थान में मृत मिले 13 साल के छात्र का है। स्कूल प्रबंधन इसे आत्महत्या का मामला बता रहा है जबकि उसका परिवार इसे मानने के लिए तैयार नहीं है। सबसे दिलचस्प या महत्वपूर्ण खबर द टेलीग्राफ में है। खबर के अनुसार भाजपा प्रमुख (अध्यक्ष) के चयन के मामले में आरएसएस ने मोदी-शाह को रोक दिया है। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल करीब दो साल पहले समाप्त हो चुका है, उन्हें लगातार एक्सटेंशन दिया जा रहा है। हाल में खबर थी, पीएम मोदी की पहली पसंद को मिल रहा मौका,बीजेपी को जल्द ही नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिलने वाला है, जिसके लिए केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर का नाम लगभग तय माना जा रहा है। टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, धर्मेंद्र प्रधान और भूपेन्द्र यादव अध्यक्ष की दौड़ में आगे चल रहे हैं।

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