नदीम अख्तर-
ZeeNews के मालिक-मेंटोर सुभाष चंद्रा ने सुशांत सिंह केस में ग़लत और बेहूदा रिपोर्टिंग के लिए अपने चैनल की तरफ़ से रिया चक्रवर्ती से माफ़ी माँगी है। उन्होंने अपने संपादक, प्रोड्यूसर और संवाददाताओं को भी -बहादुरी दिखाते हुए- माफ़ी माँगने की सलाह दी है।
इससे चार चीजें साफ़ होती हैं।
- सुभाष चंद्रा बहादुर हैं, इसलिए बहादुरी दिखाते हुए उन्होंने माफ़ी माँगी है।
- Zee News के एडिटर और रिपोर्टर्स पर चंद्रा जी का कोई कंट्रोल या अनुशासन नहीं। लगता है, सब मनमर्ज़ी के मालिक हैं। चाहें तो माफ़ी माँग लें और बहादुर बन जाएँ। ना चाहें तो माफ़ी ना माँगे। उनकी मर्ज़ी।
- उस वक़्त जी न्यूज़ पर जो कुछ भी रिया चक्रवर्ती के बारे में दिखाया जा रहा था, उससे चंद्रा जी का कोई लेना-देना नहीं। जी न्यूज़ के कंटेंट की मॉनिटरिंग ना वो करते हैं और ना उनका स्टाफ़। सबकुछ संपादक की स्वतंत्र सत्ता पर छोड़ दिया जाता है जी न्यूज़ में। यानी संपादक और संवाददाता अपनी मर्ज़ी से पॉलिटिकल लाइन लेने और किसी ख़बर को उठाने-गिराने के लिए स्वतंत्र होते हैं।
- जी न्यूज़ देश का अगुवा समाचार चैनल है और बाक़ी सभी चैनल उसे फ़ॉलो करते हैं। जो जी न्यूज़ दिखाता है, वह अद्भुत, अविश्वसनीय और अकल्पनीय होता है। चूँकि वह मार्केट लीडर है, इसलिए बाक़ी मीडिया वाले उसे आँख बंद करके फ़ॉलो करते हैं। बाक़ी जगह ना तो मालिक हैं, ना संपादक, ना रिपोर्टर और ना दिमाग़।
बाक़ी श्री सुभाष चंद्रा ने रिया चक्रवर्ती मामले पर माफ़ी क्यों माँगी, दो हज़ार के नोट पर चिप लगे होने की ख़बर, WhatsApp university से ज्ञान लेकर तमाम तरह के जिहाद पर बनाए DNA (Daily News Analysis) प्रोग्राम और शोभन सरकार द्वारा जमीन से सोना निकलवाने के समाचार के Live Telecast पर माफी क्यों नहीं मांगी?

इस पर एक रिसर्च पेपर लिखा जाना चाहिए। पेपर का टाइटल आप सोच लीजिए। धन्यवाद…
खुशदीप सहगल-
सुभाष चंद्रा आपने रिया से माफ़ी तो मांगी लेकिन…
ज़ी ग्रुप के मालिक सुभाष चंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती से माफ़ी मांगी है…अपनी पोस्ट में सुभाष चंद्रा ने लिखा है-
“सुशांत सिंह राजपूत मर्डर केस में सीबीआई ने क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की है…मैं समझता हूं कि ऐसा विश्वसनीय सबूत के अभाव में हुआ है…अस्पष्टता की कोई गुंजाइश नहीं है, इसका मतलब कोई केस नहीं बनता था…बीते वक़्त में जाओ तो मैं पाता हूं कि रिया को ज़ी न्यूज़ (तब के एडिटर और रिपोर्टर्स) की अगुआई में मीडिया ने अभियुक्त बना दिया था…औरों ने ज़ी न्यूज़ को फॉलो किया था…ज़ी न्यूज़ के मेंटर के नाते मैं उन्हें भी सलाह देता हूं कि साहसी बनें और रिया से माफ़ी मांगें…मैं भी रिया से माफ़ी मांगता हूं, हालांकि मेरी कोई संलिप्तता नहीं थी…मैं एक मुख रुद्राक्ष’ बाहर और अंदर एक समान…बिना किसी लाग लपेट… सुभाष”
देर आयद, दुरूस्त आयद…
सुभाष चंद्रा की ये माफ़ी ऐसे वक़्त में आई जब रिया के वकील सतीश एल मानशिंदे ने एक हफ्ता पहले सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल होने पर बयान दिया… मानशिंदे ने कहा कि मीडिया को अब अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए कि रिया और उनके परिवार के साथ कैसा अमानवीय व्यवहार किया, कैसे मीडिया ट्रायल चलाया… (देशनामा का इस पर वीडियो कमेंट में देखिए)…एक्ट्रेस दीया मिर्ज़ा ने भी मीडिया को रिया से माफ़ी मांगने के लिए कहा…
सुभाष चंद्रा ने मीडिया में सबसे पहले माफ़ी मांगी…अच्छा किया…क्योंकि उन्होंने ख़ुद अपने को बताया है- ‘एक मुख रुद्राक्ष’ बाहर और अंदर एक समान…बिना किसी लाग लपेट…
अब सुभाष चंद्रा को कुछ और बातों पर भी सफ़ाई देनी चाहिए…रिया वाला जब प्रकरण हुआ उस वक़्त ज़ी न्यूज़ में एडिटर पद पर सुधीर चौधरी की तैनाती थी…सुधीर चौधरी को एक दशक तक मनमानी की ज़ी न्यूज़ में किसने छूट दी?…आपने…
2012 में Satish K Singh जैसे दिन रात न्यूज़ में जीने वाले संपादक को अचानक हटा कर सुधीर चौधरी को संपादक के साथ साथ बिज़नेस क्रिएट करने की दोहरी ज़िम्मेदारी किसने सौंपी? …आपने…
ये जानते हुए भी जनमत-लाइव इंडिया चैनल का संपादक रहते सुधीर चौधरी के माथे पर टीचर उमा खुराना के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी स्टिंग ऑपरेशन चलाने की बदनामी जुड़ी थी…इस झूठे स्टिंग के चलते 2007 में उमा खुराना की जान तक पर बन आई थी…भीड़ ने उमा खुराना को घेर कपड़े तक फाड़ डाले थे…
इस फ़र्ज़ी स्टिंग पर 19 सितंबर, 2007 को निदेशक (प्रसारण सामग्री) ने दंड स्वरूप जनमत-लाइव इंडिया के प्रसारण को 20 सितंबर, 2007 से 20 अक्टूबर, 2007 तक पूरे देश में केबल टेलीविजन नेटवर्क और किसी भी अन्य प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिबंधित कर दिया था…
सुभाष चंद्रा फिर भी आपने समाचार जैसे गंभीर दायित्व के लिए सुधीर चौधरी जैसे शख़्स को सर्वेसर्वा बनाया…वो भी ये जानते हुए 2012 से पहले तक ज़ी न्यूज़ की गंभीर और निष्पक्ष चैनल के रूप में धाक थी…
सुधीर चौधरी के ज़ी न्यूज़ में आने के चंद महीने बाद ही नवीन जिंदल से 100 करोड़ की उगाही की मांग करने वाला घटनाक्रम भी हुआ…इस आरोप में सुधीर चौधरी को तिहाड़ जेल भी जाना पड़ा…उस घटना के बाद करीब एक दशक तक सुधीर चौधरी के संपादकीय काल में और भी बहुत कुछ हुआ…समाज को बांटने वाली ख़बरें जम कर चलाई गईं जिनसे ज़ी न्यूज़ की पुरानी निष्पक्ष छवि पर आंच आई…
याद कीजिए कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों में सुधीर चौधरी के ज़ी न्यूज़ का संपादक रहते हुए ही तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ कैसा एजेंडा चलाया गया था.. इसके तहत तबलीगी जमात के धार्मिक आयोजन को दिल्ली में कोरोना फैलाने के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया था… हालांकि बाद में तबलीगी जमात के ख़िलाफ़ ऐसा कोई सबूत सामने नहीं आया था…
सुभाष चंद्रा आपका अपने लिए ‘एक मुख रुद्राक्ष’ बाहर और अंदर एक समान का दावा तभी मायने रखेगा जब आप रिया से माफ़ी मांगने की तरह ही उन सब ग़लत बातों के लिए भी माफ़ी मांगे, जो सुधीर चौधरी के एक दशक तक आपके संस्थान का संपादक रहने के दौरान हुईं…




Khushdeep Sehgal
March 30, 2025 at 11:51 am
नो वन किल्ड सुशांत सिंह राजपूत…
वीडियो स्टोरी यहां देखिए
https://youtu.be/Hi7IFDkoSQs?si=2c6AQs1nujJkElrv