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डायलिसिस संवाद : दिग्गज पत्रकार जिनकी PHD को लेकर तीन दिन संसद ठप रही

देश के जाने-माने पत्रकार स्व. वेद प्रताप वैदिक के 80वें जन्मदिन पर वरिष्ठ पत्रकारों ने एक वेबिनार का आयोजन किया. इस मौके पर वैदिक जी के शिष्य चंडीगढ़ के 70 वर्षीय वरिष्ठ पत्रकार अरूण जौहर बिश्नोई ने डायलिसिस पर होने के बावजूद संवाद किया.

हिमाचल प्रदेश के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से सेवानिवृत्त डायरेक्टर, बीडी शर्मा ने वेबिनार को मुख्य वक्ता के बतौर संबोधित किया. वेबिनार के संयोजक हरियाणा एवं जनसंपर्क विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक, अरूण जौहर बिश्नोई ने डा. वैदिक से जुड़े कई संस्मरण बताये.

उन्होंने याद करते हुए बताया कि, किस तरह साल 2014 में डा. वेद प्रताप वैदिक ने पाकिस्तान के खतरनाक आंतकवादी सरगना, हाफिज सईद का लाहौर में इंटरव्यू किया था? जौहर ने बताया कि, वैदिक ने जेएनयू, नयी दिल्ली से पीएचडी थीसिस हिन्दी भाषा में सबमिट कर दी, तो हंगामा मच गया.

उन्हें यूनिवर्सिटी से अनुमति नहीं मिलने पर, तीन दिन तक संसद की कार्यवाही ठप रही, फिर जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के नियमों में संशोधन करके, उनकी हिन्दी की पीएचडी को मान्यता दी गई. गुरुग्राम से जनसता के पूर्व वरिष्ठ संवाददाता पवन कुमार बंसल ने बताया कि, ‘चूंकि वह गुरुग्राम में वैदिक के नजदीक ही रहते थे, इसलिए उनसे अक्सर देश की राजनीति और पत्रकारिता के गिरते मूल्यों पर चर्चा होती रहती थी.’

बंसल ने वैदिक की तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से निकटता को लेकर कई बातें बताई.

बीडी शर्मा ने कहा कि वे 33 वर्ष पहले सन 1990 में वैदिक से दिल्ली में मिले थे. जब वे हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन सीएम शांता कुमार के प्रेस सचिव थे. वह प्रेम कुमार धूमल और वीरभद्र सिंह के भी प्रेस सचिव रहे और उनका मार्गदर्शन लेते रहे.

शर्मा ने बताया कि वैदिक जी कहते थे, ‘कलम न रुकनी चाहिए, न झुकनी चाहिए-न अटकनी चाहिए, न भटकनी चाहिए.’

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