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उत्तर प्रदेश

अदालतों के कर्मचारी फरियादियों की जेब का 10रु भी नहीं छोड़ते, देखें ये शिकायत!

मनीष दुबे-

Singhasan Chauhan

लिया के रहने वाले सिंहासन चौहान सामाजिक कार्यकर्ता और आजाद अधिकार सेना के जिला उपाध्यक्ष हैं. सिंहासन ने आज एक बड़ा ही महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है. उन्होंने ये मुद्दा न सिर्फ उठाया बल्कि इसके लिए ऑनलाइन शिकायत भी की है.

ये मुद्दा है अदालतों में मुकदमा लड़ रहे करोड़ों लोगों का जिन्हें अदालत के भीतर कभी हस्ताक्षर के नाम पर, कभी तारीखों के नाम पर और कभी नोटिस इत्यादि के नाम पर कोर्ट कर्मचारियों को घूस देनी पड़ती है. मसला उन हजारों हजार लोगों से जुड़ा है जो सालों साल कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते कंगाली की दहलीज पार कर जाते हैं, बावजूद इसके अदालतों के भीतर बैठे पीपी, पैरोकार, नायब, वकील इत्यादि नाम की जोंके शायद ही कभी लरजती हों. सच भी यही है. जो भी व्यक्ति कभी अदालत या तारीखों के चक्कर में फंसा होगा वो बखूबी इन लहू चूसने वाली जोंको से परिचित होगा.

खैर, सिंहासन चौहान 14 मई 2024 को एक फर्जी मुकदमें के तहत जिला न्यायालय बलिया में तारीख निपटाने गए थे. यहां तारीख देने के नाम पर पेशकार ने कुछ रकम की डिमांड कर दी. चौहान ने इस रकम की रसीद मांगी तो पेशकार अकबका गया.

बोला रसीद किस बात की? सिंहासन ने कहा जो आप मांग रहे हैं उसकी लिखित रसीद दीजिए. अब पेशकार महोदय की चोक ले गई. मन में बोले…’ई सुसरी का आफत मांग रहा है ये’!

विनम्र स्वभाव सिंहासन को पेशकार ने इस तरह की कोई भी रसीद देने से इनकार किया. चौहान साब बोले तो फिर आप मुझसे 100 रु ले लीजिए. और माननीय कोर्ट का कोई आदेश हो इस तरह का तो उसकी रसीद बनाकर दे दीजिए.

पेशकार को न रसीद देनी थी और ना ही दी. वो तो ऊपरी रकम मांग रहा था. माने अपनी टिप. बाद में मामला 10 रु के एक सिक्के में छूटा. इस मसले पर चौहान ने भारत सरकार के एक शिकायत पोर्टल के जरिए न्याय विभाग को शिकायत भेजी है. उसे आप नीचे पढ़ें, लेकिन उससे पहले सिंहासन चौहान ने इसे लेकर क्या कुछ कहा वो पढ़िए…

माननीय न्याय के मंदिर में इस तरह पेशकार द्वारा खुलेआम पैसे मांगे जाना किसी भी तरह से उचित नहीं है, एक गरीब आदमी किसी तरह अपना कुछ न कुछ बेचकर मुकदमा लड़ने के लिए पैसे का इंतजाम करता है, और सरकारी नौकरी करने वाले पेशकार भिखारियों की तरह हाथ फैलाकर पैसे मांगते हैं.. जैसे भीख मांग रहे हों. माननीय से निवेदन है कि इस तरह का कोई शुल्क लगता है तो उसकी रसीद जारी करने के लिए सम्बन्धित अधिकारी को निर्देशित करें, अन्यथा इस तरह की अवैध वसूली के खिलाफ निर्देश जारी करें ताकि किसी सरकारी कर्मचारी द्वारा किसी गरीब आदमी से ऐसे अवैध वसूली पर रोक लग सके.

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