Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सियासत

राहुल गांधी का एकदम अनोखा भाषण था, मौलिकता से भरा हुआ, जो भारतीय राजनीति में वर्षों से सुनने को मिला ही नहीं!

Kanak Tiwari

टेक्सास यूनिवर्सिटी में राहुल गांधी ने जो भाषण दिया वह मैंने सुना है। वह एक अद्भुत भाषण है। उसमें कई ऐसी बातें उभर कर आती हैं जिनकी तरफ उन सब लोगों को ध्यान देना चाहिए जो सामाजिक जीवन में अनूठी वैचारिकता लाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं। एकदम अनोखा भाषण था मौलिकता से भरा हुआ जो भारतीय राजनीति में वर्षों से सुनने को मिला ही नहीं।

राहुल गांधी ने शुरू में ही कहा कि जब देश का मीडिया बिक चुका है, जब हर स्वाधीन और संवैधानिक संस्था का मुंह बंद कर दिया गया है, पूरा देश ही गूंगा बना दिया गया है, तब यही सोच कि लोगों की आवाज जब नेताओं तक नहीं पहुंचती तो खुद चलकर लोगों के पास जाना चाहिए कम से कम उनकी आवाज़ सुन तो सकेंगे। और फिर राहुल ने यह दुर्लभ बात कही कि नेताओं को बोलना कम और सुनना ज़्यादा चाहिए। ( हां बिल्कुल ठीक है क्योंकि देश ऐसे नेता की गिरफ़्त में है जो मुंहबोला है। उसके कान हैं दो लेकिन सुनता नहीं है।)

उसके बाद राहुल ने कहा कि मैंने जो कुछ कहा अपनी भारत जोड़ो यात्रा में वह मैंने नहीं कहा। राहुल ने नहीं कहा ।वह लोग कह रहे थे। मैंने केवल अपना मुंह उनको दिया समझ लीजिए कि बोलने के वास्ते उपलब्ध करा दिया था। एक बेहद गंभीर बात कही कि हमें जन सेवा करने और लोगों तक पहुंचने के लिए या वैसे भी संवाद करने के लिए अपनी निजता का स्खलन करना चाहिए। डिस्ट्रक्शन आफ आईडेंटिटी और जब तक हम अपने आप में यह बात पैदा नहीं कर पाएंगे तब तक कोई हमारे पास क्यों आएगा ।बार-बार राहुल ने महात्मा गांधी का उल्लेख किया। वह महात्मा गांधी जिसका उल्लेख आज के कांग्रेसी तो करते ही नहीं हैं। वर्षों से नहीं कर रहे हैं ।गांधी जी की बार-बार याद की। और कहा कि यही एक व्यक्ति है एक ऐसा रोल मॉडल है जो हिंदुस्तान के वास्ते था ।दुनिया के वास्ते था। और अनंत काल तक जीवित रहेगा।

राहुल गांधी ने यह भी एक महत्वपूर्ण बात कही कि जो नारा मेरे मुंह से निकला है कि “मैं नफरत के बाजा़र में मोहब्बत की दुकान खोलने आया हूं ” ।यह मेरा नहीं है ।भारत जोड़ो यात्रा के समय किसी जनता के प्रतिनिधि ने किसी व्यक्ति ने किसी मित्र ने यह बात मुझसे कही कि आप जानते हैं। आप क्या कर रहे हैं ।तो राहुल ने पूछा क्या ?तब उसने यह बात कही कि आप नफरत के बाजा़र में मोहब्बत की दुकान खोलने आए हैं। एक अद्भुत सा भाषण था।

उसमें कुछ ऐसी बातें भी कहीं जो तकनीकी दृष्टि से व्यापार की दृष्टि से कॉर्पोरेट की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं। (लेकिन कुछ लोगों ने उसको समझा नहीं क्योंकि निठल्ले तो इस देश पर इसी तरह हुकूमत कर रहे हैं। और आगे करते रहना चाहते हैं। उसका बतंगड़ बनाया।)।

जो बात राहुल ने चीन की निर्माण क्षमता के बारे में कही। जापान के बारे में कही। लगभग उसी तरह के संदर्भ में वर्षों पहले विवेकानन्द ने तो कही थी। और भारतीय नवयुवकों को भारतीयों को लताड़ा था कि जाओ सीखो चीन और जापान से कि अपने देश को कैसे आगे बढ़ाते हैं।आज नए संदर्भ में नए ढंग से वही बात राहुल ने कही और एशिया के मुल्कों की तारीफ की। और एशिया के मुल्कों की बर्बादी का कारण भी जोड़ा। कई ऐसे नए सवाल हैं जो एक छोटी सी टिप्पणी में नहीं बताये जा सकते ।

जो अद्भुत तरीके से बात राहुल गांधी ने कही कि मैं जानता था कि मेरे जीवन पर ख़तरा भी हो सकता है ।तब भी मैंने भारत जोड़ो यात्रा इसलिए की कि मैं अगर नहीं जाऊंगा। अगर लोगों तक नहीं पहुंचूंगा तो करूंगा क्या ?मुझे कम से कम लोगों तक जाना चाहिए! हम सबको एक दूसरे से मिलना चाहिए और यह काम मैंने किया है! राजनीति मेरा व्यसन नहीं है । मेरी पहली पसंद नहीं है लेकिन मनुष्यता मेरी पहली पसंद है! जीवन के मूल्यों को समझना और उन पर आचरण करने की कोशिश करना यही मेरी पहली पसंद है। और क्या चाहिए। यह महत्वपूर्ण बात शुरू में कही की राजनीति में तीन बातें हैं ही नहीं और उन तीन बातों को होना चाहिए। एक तो है प्रेम दूसरा है सम्मान और तीसरी है विनम्रता। मैं राजनीति में प्रेम, सम्मान और विनम्रता आ जाए इसकी कोशिश ज़रूर करूंगा।

मनुष्य जब देह की चौहद्दी के बाहर निकलने का जतन करता है। तब उसमें आत्मा के आयतन का विकास होने की संभावना बनती है।


कनुप्रिया-

कभी कभी राहुल गाँधी को सुनती हूँ तो बहुत ज़्यादा मुतासिर नहीं होती , हाँ ठीक बोला, इससे अधिक कुछ नही, और बेहतर बोल सकते थे, अभी और समझना जानना ज़रूरी है. बाक़ी जो प्रेम, सद्भाव, शांति की बात करे वो व्यक्ति ठीक लगता ही है.

गुण की ग्राह्यता भी कभी इसपर निर्भर करने लगती है कि तुलनात्मक रूप से कौन सामने है. राहुल के बरक्स यदि अवतार बाबू को सुन लिया जाए तो कुंठा, नफ़रत, मूर्खता, बदले की भावना का ऐसा नीचता पूर्ण विष वमन निकलता है कि राहुल राहत लगने लगते हैं. अगर ट्विटर पर चली जाऊँ तो तथाकथित देशभक्त पार्टी के ऐसे बयान सुनने को मिलते हैं कि दिमाग़ ख़राब हो जाता है, झूठ और पाखंड की कोई सीमा ही नहीं, कब इन मूढ़ों से पीछा छूटेगा, आख़िर कब.

कॉंग्रेस की अपनी कमियाँ भी बहुतेरी हैं, मगर काँग्रेस और राहुल अगर भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं तो उसका बड़ा कारण थकान है, उस नफ़रत और नीचता से, झूठ और बेशर्मी से, आत्ममुग्धता और अहंकार से जो 10 साल से चली आ रही है, आख़िर दिनरात तो देख रहे हैं देश का हाल , मगर चर्चाएँ इतने क्षुद्रतम टॉपिक पर होती हैं कि मन खिन्न होने लगता है.

क्या काँग्रेस या किसी और से कुछ बहुत उम्मीदें हैं? शायद नही, मगर फिर यही लगता है कि ये जो पागलपन ऊपर से नीचे तक फैला हुआ है, हर जगह फैला हुआ है, इससे अब निजात मिले बस.

ये abusive रिश्ता, जहाँ हम mental, emotional, verbal, financial, social हर तरह का abuse झेलने के लिये मजबूर हैं, अब ख़त्म होना चाहिए.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन