नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पत्रकारों और मीडिया कर्मियों के लिए संचालित पत्रकार कल्याण योजना (Journalist Welfare Scheme) को प्रभावी रूप से लागू कर रखा है। योजना के तहत आर्थिक रूप से बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे पत्रकारों और उनके परिवारों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
दैनिक संपर्क में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2014-15 से 2025-26 तक 456 पत्रकारों, मीडिया कर्मियों और उनके परिवारों को कुल 19 करोड़ 41 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जा चुकी है।
तीन प्रमुख परिस्थितियों में मिलती है सहायता
पत्रकार कल्याण योजना के तहत मुख्य रूप से पत्रकार की मृत्यु, स्थायी विकलांगता या गंभीर बीमारी तथा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल में भर्ती होने जैसी परिस्थितियों में आर्थिक सहायता का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य ऐसे समय में पत्रकार या उसके परिवार को तत्काल वित्तीय राहत उपलब्ध कराना है।
इस योजना में केवल पीआईबी से मान्यता प्राप्त पत्रकार ही नहीं, बल्कि राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों से मान्यता प्राप्त पत्रकारों के साथ गैर-मान्यता प्राप्त संस्थागत पत्रकारों को भी शामिल किया गया है।
2019 में योजना में हुआ संशोधन
पत्रकार कल्याण योजना मूल रूप से 2001 में शुरू की गई थी और वर्ष 2019 में इसके दिशानिर्देशों में संशोधन किया गया। योजना के तहत पत्रकार की अत्यधिक कठिन परिस्थितियों में मृत्यु होने पर उसके परिवार को 5 लाख रुपये तक की सहायता का प्रावधान है। स्थायी विकलांगता की स्थिति में भी पत्रकार को 5 लाख रुपये तक सहायता मिल सकती है।
गंभीर बीमारी और दुर्घटना जैसी परिस्थितियों के लिए भी योजना के तहत वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
पहले के आंकड़ों से बढ़ा सहायता का दायरा
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में बताया था कि 2014-15 से 2024-25 तक 402 पत्रकारों/मीडियाकर्मियों या उनके परिवारों को योजना के तहत वित्तीय सहायता दी गई थी।
अब 2025-26 के आंकड़ों को जोड़ने पर यह संख्या 456 और कुल सहायता राशि ₹19.41 करोड़ बताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में पत्रकार कल्याण के लिए बजट में और इजाफा किए जाने की बात भी सामने आई है।
कुल मिलाकर, केंद्र की यह योजना बीमारी, दुर्घटना, स्थायी विकलांगता या पत्रकार की मृत्यु जैसी गंभीर परिस्थितियों में पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए एकमुश्त आर्थिक राहत का माध्यम है।


