पंकज शुक्ला-
डिजिटल नैरेटिव बनाने में इन दिनों यूट्यूब पर दिलचस्प सियासी मुक़ाबला दिख रहा है। क्षेत्रीय दल अब भी इस तरफ़ तवज्जो नहीं दे रहे हैं, और मुक़ाबला मुख्य दो राष्ट्रीय दलों बीजेपी और कांग्रेस के बीच सिमट चुका है।
और, चौंकाने वाली बात ये है कि तमाम डिजिटल नवाचारों और टीम विस्तारों के बाद भी बीजेपी इस मुक़ाबले में बहुत पीछे दिख रही है। यूट्यूब पर कांग्रेस का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है।
डाटा बीईंग्स नाम की एक कंपनी/एजेंसी हर हफ़्ते अलग अलग न्यूज़ चैनलों, अख़बारों के यूट्यूब चैनलों और सियासी दलों के यूट्यूब चैनलों के आंकड़े जारी करती है। 25 जुलाई से 31 जुलाई के बीच अपलोड किए गए वीडियो के आधार पर जारी सियासी दलों और इनके नेताओं के यूट्यूब चैनलों के आँकड़े दिलचस्प तस्वीर पेश करते हैं।
इन आँकड़ों का सबसे बड़ा निष्कर्ष यह है कि कांग्रेस ने उस क्षेत्र में बाज़ी मार ली है, जिस क्षेत्र में कभी बीजेपी उसे और उसके नेता राहुल गांधी को लगातार पटखनी देती रही है। अकेले कांग्रेस के आधिकारिक चैनल को 5.79 करोड़ (57.9 मिलियन) व्यूज़ मिले, जो कुल व्यूअरशिप का 57% है।

यदि, इंडियन यूथ कांग्रेस (12%), राहुल गांधी (11%) और उत्तर प्रदेश कांग्रेस (1%) को भी जोड़ दें, तो कांग्रेस से जुड़े चैनलों की हिस्सेदारी करीब 81% तक पहुंच जाती है। यह दर्शाता है कि डिजिटल वीडियो प्लेटफॉर्म पर कांग्रेस की रणनीति बेहद प्रभावी होती जा रही है।
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चैनल को 5.8 मिलियन (6%) और भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक चैनल को 3.8 मिलियन (4%) व्यूज़ मिले। दोनों को मिलाकर भी हिस्सेदारी 10% ही बनती है, जो कांग्रेस नेटवर्क से काफ़ी कम है।
आँकड़े संकेत देते हैं कि इस सप्ताह यूट्यूब पर कांग्रेस का डिजिटल नैरेटिव सबसे अधिक प्रभावशाली रहा, जबकि बीजेपी को अपने डिजिटल आउटरीच और कंटेंट एंगेजमेंट पर और काम करने की आवश्यकता दिखाई देती है।
ये आंकड़े केवल 25–31 जुलाई के बीच अपलोड किए गए वीडियो के प्रदर्शन को दर्शाते हैं और इन्हें पूरे डिजिटल परिदृश्य का स्थायी संकेतक नहीं माना जाना चाहिए।


