रांची में छात्र आंदोलन के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा और अन्य महिला प्रदर्शनकारियों पर स्याही फेंके जाने की घटना सामने आई है।
AISA का आरोप है कि BJP और RSS से जुड़े लोगों ने पहले नेहा के खिलाफ प्रचार और नफरत का अभियान चलाया तथा उसी क्रम में यह हमला हुआ। AISA ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि JPSC-JSSC पेपर लीक मामले में छात्रों की मांगों पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन तत्काल कार्रवाई करें।
-अजय प्रकाश, विशेष संवाददाता, दैनिक भास्कर
स्याही फेंकने वाले स्याही और गोबर को एक बराबर ही मानते हैं। यही वजह है कि स्याही का प्रयोग वे गोबर/कीचड़ की तरह करते हैं। छात्र नेता नेहा बोरा पर स्याही फेंकने की घटना एक शर्मनाक हरकत है।
-स्वतंत्र मिश्रा
हरप्रकाश उपाध्याय-
‘संघ सरकार’ ने येन केन प्रकारेण राजनीतिक वर्ग के विरोध को केंचुआ, सुप्रीम कोठा, तोता, गोदी आदि के प्रयोग से दबा देने में तो ‘जादुई’ सफलता हासिल कर ली, पर उनके खिलाफ़ देश भर में जो नव युवा पीढ़ी बौखला कर खड़ी हो गयी है, जिस पर इन बिकी और बीमार एजेंसियों का कोई जोर नहीं तो वह लगातार इनसे संवाद के नाम पर इन्हें दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।
यह कोशिश ‘भागवत’ और ‘भारत के कथित भगवान’ दोनों मिलकर कर रहे हैं पर उन्हें पता है, ये नव युवा जाति – धर्म के पिटे पासे से तो हारने से रहे तो उन्हें विभाजित करने, उनके बीच फूट डालने और एक छद्म नव युवा ग्रुप खड़ा करने की कोशिश संघ सरकार और संघ द्वारा किया जा रहा है। पर यह कोशिश भी अंततः पराजित होती ही दिखती है।
नेहा जैसी इंकलाबी लड़कियाँ स्याही से पीछे नहीं हटतीं बल्कि यही स्याही तो उनकी ताकत बनेगी। विकास के पापा भी यह बात समझते तो होंगे! न समझते होंगे तो भी बढ़िया है, समझ ही जाएंगे।

बेहद शर्मनाक! एक प्रतिभाशाली छात्रा और जंतर-मंतर GenZ प्रोटेस्ट में 23 दिन तक अनशन करने वाली AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष Neha Bora से इतनी नफ़रत किसको हो सकती है! नफ़रत के जिन पुतलों ने नेहा बोरा और अन्य महिलाओं पर काली स्याही फेंकी, उन्होंने झारखंडी समाज और उसकी संस्कृति को कलंकित किया है!
रांची प्रशासन को ऐसे नफ़रती और सामंती-लंपटों के विरूद्ध तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए!
उर्मिलेश, वरिष्ठ पत्रकार
स्नेहा चौहान-
मोहन भागवत के कहे को विरोध करना , संवाद का एक तरीका है जेन जी यो से बात करने को चमनचिंटू अंधभक्ति में चूर चमचो ने इस तरह समझा और ये हरकत कर साबित कर दिया कि ये लोग, ये सरकार कितनी डरी हुई है। नालायकों ये लोग गोली, डंडे खाके नहीं डरे, तुम अभी भी पुराने हथकंडों में फंसे हो, नहीं जीत पाओगे इन जेन जी युवाओं से, कामरेड से।
कालिख नेहा पे नहीं, ये कालिख इन चमचों ने अपने आकाओं के मंसूबों पे फेर दी है।
अब इसका परिणाम भुगतने तैयार रहना। ये हरकत भारी पड़ेगी। नेहा पे गर्व कल भी था आज भी है आगे भी होगा…
डा. परमानंद यादव-
शिक्षा की अधिष्ठात्री माता सावित्रीबाई फुले पर जिन लोगों ने गोबर और कीचड़ फेंका था उन्हीं के वंशज आज नेहा शर्मा पर स्याही फेंके हैं। बात शिक्षा की ही चल रही है। पूरे भारत वर्ष में जेनजी, जेन अल्फा सड़कों पर शिक्षा को बचाने के लिए निकल पड़े हैं। अपने भविष्य को तार तार होते देख रहे युवक, युवतियां जिनमें पेपर लीक से परेशान 21 बच्चों ने आत्महत्या कर लिया।
सरकार चारों तरफ देश में पेपर लीक करवा कर लाखों बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रखा है। उनके सपने को चकनाचूर कर रही है। उनके जीने मरने का प्रश्न आ गया है।
देश में एक तबका है जो भारत में शिक्षा को नष्ट कर देना चाहता है। वो चाहता है कि जितने कम पढ़े लिखे लोग होंगे उतने मूर्ख रहेंगे तो हम उनका शोषण अच्छे से कर सकेंगे। शिक्षा जितनी मजबूत होगी उतना सवाल जवाब होगा।
जबतक ओबीसी एससी एसटी के बच्चे और उनके पैरेंट्स सड़कों पर नहीं उतरेंगे तबतक ये सरकार और कुछ खास लोग कोई बदलाव नहीं लाएंगे।
विदुषी नेहा वोरा का हम समर्थन करते हैं। वो आज भारत के बच्चों की आईकान बन गई हैं। जिसने उनपर ये हिंसा की है उसे तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।
हमें रोक सके ये जमाने में दम नहीं
हमसे है जमाना जमाने से हम नहीं।


