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सियासत

चंद्रबाबू नायडू के आरोप की गुजराती टेस्टिंग और अडानी फाउंडेशन के दान की रकम में कुछ तो झोल है गुरू!

मनीष दुबे-

देश में नई तरह की राजनीति चल रही है. सब कुछ खुला है फिर भी आंखों से ओझल है. आम जनता लूटी ठगी जा रही है लेकिन 5 किलो राशन की गठरी का बोझ भी लादे सब मस्त-मग्न हैं.

सितंबर 29 को आंध्र प्रदेश से निकली एक खबर ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया. खबर थी कि प्रतिष्ठित तिरुपति मंदिर का जो प्रसाद बनता है उसमें जानवरों की चर्बी और मछली का तेल मिलाया जाता है. एक लैब में प्रसाद की टेस्टिंग की गई जिसमें उक्त चीजें मिलाई जानी बताई गई हैं, जो एक धर्म विशेष की भावनाएं आहत करती हैं. मीडिया ने भी कसर न छोड़ते हुए “आहत” शब्द जोड़कर मसले पर ढंग से लिखा है.

अब आते हैं कि, यह आरोप लगाया किसने?

आरोप लगाया है, 2024 में नरेंद्र मोदी को तीसरी बार प्रधानमंत्री कि कुर्सी की शपथ दिलाने में अहम किरदार बने चंद्रबाबू नायडू ने. इसका आरोप भी चंद्रबाबू ने पिछली सरकार पर लगाया है. नायडू ने YSRCP के जगन मोहन रेड्डी सरकार पर इसका आरोप लगाया है. लैब की टेस्टिंग रिपोर्ट भी चंद्रबाबू ने खुद ही पेश की है.

यह रही इतनी बात, अब यह भी जान लीजिए कि जिस लैब ने प्रसाद सामग्री की टेस्टिंग की है वह कहीं और नहीं बल्कि गुजरात में स्थापित है. दैनिक जागरण व समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, गुजरात की एनडीडीबी सीएएलएफ लिमिटेड ने प्रसाद में मिलावट को सही पाया है.

ये तो रही यहां तक की जानकारी, इसके बाद मामले में एंट्री होती है, तीसरे खेल की. वो तीसरा खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि बिजनेस टायकून गौतम अडानी हैं. चंद्रबाबू के आरोपों के ठीक इर्द-गिर्द, अडानी समूह ने अडानी फाउंडेशन की तरफ से राहत कोष के तौर पर 25 लाख रुपये डोनेट कर दिए.

इसका चेक देने में अडानी के बेटे और अडानी पोर्ट्स के कर्ताधर्ता करण अडानी (37) आगे रहे. करण, पोर्ट के अलावा समूह के कई व्यवसाय, जिनमें अंबुजा सीमेंट व अन्य शामिल हैं, की देखरेख भी करते हैं.

03 मई 2024 को बिजनेस स्टैंडर्ड की वेबसाइट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह ने आंध्रा के विजाग में भारत के पहले एकीकृत डेटा सेंटर और प्रौद्योगिकी बिजनेस पार्क के निर्माण का काम शुरू कर दिया था. समूह, 200प्लस मेगवाट क्षमता का डेटा सेंटर लगाने की योजना पर काम कर रहा है. लेकिन इसके भूमि पूजन से लगाकर तमाम समारोह होने के समय पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी, अडानी ग्रुप के प्रबंध निदेशक राजेश अडानी और अडानी पोर्ट्स एंड एसईजोड के सीईओ करन अडानी मौजूद रहे थे.

अब जगन मोहन रेड्डी सीएम रहे नहीं और सरकारी तालमेल के बिना व्यवसाय संभव नहीं है. हो सकता है इसका रास्ता इसी तरह के दान धर्म से निकाले जाने के प्रयास हो रहे हों?

चंद्रबाबू नायडू ने भी ट्वीट कर इसका आभार जताया है, साथ ही उन्होंने प्रीती अडानी को टैग भी किया है. प्रीती (59) गौतम अडानी की पत्नी और अडानी फाउंडेशन की चैयरपर्सन हैं. प्रीती अडानी ने सीएम आंध्रा का ट्वीट रिपोस्ट कर हाथ जोड़े हैं. उसके बाद अडानी ग्रुप के हैंडल से गौतम अडानी का ट्वीट रिपोस्ट किया गया है.

सब कुछ गजब हो रहा है देश में. कोई आरोप लगाकर उन्माद फैलाने का प्रयास कर रहा है तो कोई अपना व्यापार, व्यवसाय फैलाने की जुगत मे पूरे सिस्टम का कबाड़ कर रहा है. कुर्सी पाने के लिए किस्म-किस्म के प्रपंच गढ़े जा रहे हैं. मीडिया सुबह से शुरू होकर देर रात तक सत्ता के लिए लोकतंत्र का गला घोटे दे रहा है. चौड़े में बड़ी-बड़ी डीलें हो रही हैं.

पहले नोएडा और अब बिहार के नवादा में गरीबों की बस्तियों को जला देने का मामला सामने आ रहा है. किसी को सुध नहीं है. आग कैसे लगी, किसने जलाया कुछ अता-पता नहीं है?

इधर गरीबों के घर जले, उधर अमीरों ने आग ठंडी पड़ते ही फौरन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनवा कर खड़े कर दिए. इस देश में दशकों से यह चल रहा है, और अडानी जैसे धनपशुओं ने सरकारों की आड़ में जनता को भेड़-बकरियों की तरह हांककर पांच किलो राशन का कटोरा थमा दिया है!


सौमित्र रॉय-

कर्नाटक में नंदिनी ब्रांड के दूध पर कब्जे को लेकर बीते साल तगड़ी जद्दोजहद अमूल ने मोदी सत्ता के इशारे पर की थी। बवाल हुआ तो कर्नाटक मिल्क फेडरेशन ने तिरुपति मंदिर में नंदिनी ब्रांड के घी को बंद कर अमूल घी की सप्लाई शुरू कर दी।

अब उन लड्डुओं में जानवरों की चर्बी मिली है। लेकिन अमूल पर कोई सवाल ही नहीं है। अब सारा खेल कर्नाटक में नंदिनी ब्रांड के दूध मार्केट पर कब्जे का है। अमूल महाराष्ट्र से आगे नहीं बढ़ पाया, क्योंकि दक्षिण के कुछ राज्यों ने खुद को नहीं बेचा।

तिरुमला में सन 1715 से लड्डू बंट रहे हैं। श्री वेंकटेश्वर मंदिर की अपनी स्टेट ऑफ द आर्ट लैब है। फिर भी अमूल का दूध पीने वाला गुजरात पीएमओ के इशारे पर बाजार को कब्जाने का खेल कर रहा है। और कांग्रेसी ट्रोल बीजेपी के खेल में पिले पड़े हैं।


रोहिणी सिंह-

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को कथित तौर पर गुजरात की एक लैब में किए गए परीक्षण के अलावा तिरुपति घी मुद्दे पर अपने दावों को साबित करने की जरूरत है। उन्हें इस घी की आपूर्ति करने वाली कंपनियों के नाम का खुलासा करना चाहिए और वह क्या कार्रवाई करना चाहते हैं। तिरुपति दक्षिण भारत का सबसे प्रतिष्ठित मंदिर है।

नायडू खतरनाक रास्ते पर चल रहे हैं. अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी, जो एक ईसाई है इसलिए अपना बचाव नहीं कर सकता, को बदनाम करने की चाहत में, तिरुपति बालाजी की प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता और न ही पहुँचाया जाना चाहिए।

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