खुर्शीद अनवर ख़ान-
“दिल्ली का ठग”

1958 में बनी हिंदी फ़िल्म “दिल्ली का ठग” के नायक किशोर कुमार और नायिका नूतन थीं. इस फ़िल्म में किशोर कुमार एक ठग के रोल में हैं. किशोर अमीरों से दोस्ती करते हैं और उन्हें अपना शिकार बनाते हैं. किशोर के जाल में कई बड़े नेता और व्यपारी फंसते हैं.
आज की हमारी कहानी भी एक ऐसे ही ठग की है. यूं समझिये की बोल वही है तर्ज़ बदल गईल बा.
10 करोड़ की ठगी की एक दिलचस्प दास्तान पढ़िए!
दास्तान ए सलाटर हाउस
कांग्रेस के एक राष्ट्रीय दलाल ने कैसे ठगे 10 करोड़… कहानी 2015 की है लेकिन स्क्रिप्ट 2014 में लिखी गयी. किस्सा कुछ यूं शुरू होता है कि कांग्रेस का एक बड़ा युवा नेता आये दिन दलाली के कारण दिल्ली के सियासी गलियारे में बदबू करने लगा. पार्टी के कई बड़े नेता उसे देख कर कन्नी काटने लगे. इसी बीच केंद्र से लेकर महाराष्ट्र, हरियाणा और राजस्थान में कांग्रेस की सरकारें चली गयीं गयीं. नेता जी सड़क पर आ गए. अब नेता उर्फ़ राष्ट्रीय दलाल ने यूपी का रुख किया.
पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के यहां आना जाना शुरू किया और फिर नए मुर्गों की तलाश शुरू की. राष्ट्रीय दलाल के एक एजेंट ने उसे बुलंदशहर के खुर्जा के एक बड़े व्यपारी से मिलवाया. बुलंदशहर ज़िले का यह व्यापारी पिछले कई महीनो से सलाटर हॉउस का लाइसेंस लेने के लिए मुख्यमंत्री दफ्तर के चक्कर काट रहा था. राष्ट्रीय दलाल और उसके एजेंट ने इस व्यपारी को झांसे में लिया और बताया कि अखिलेश यादव से अपने अच्छे संबंध हैं काम हो जायेगा. व्यापारी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय दलाल को पूरे दस करोड़ रूपये दे दिए.
राष्ट्रीय दलाल ने इस दस करोड़ से एक BMW एसयुवी दो फारचूनर खरीदी, जौनपुर के अपने घर को मेंटेन कराया. इस बीच व्यापारी राष्ट्रीय दलाल के आगे पीछे भटकता रहा. लेकिन न उसे पैसे वापस मिले और न ही उसका काम हुआ.
दस करोड़ देने वाले की भी अपनी हैसियत होती है. 2016 में बनारस में सोनिया गाँधी का रोडशो था. खुर्जा का व्यपारी आधा दर्जन गाड़ियों और तीन दर्जन मुस्टण्डों को लेकर बनारस पहुंचा. कचहरी के पास बरगद के पेड़ के नीचे नेता जी घसीट लिए गए. लतियाये और मुकियाये गए.
भला हो यूपी पुलिस के उस गनर का जिसने स्टेनगन तान ली और नेता जी बच गए वरना आलू की बोरी की तरह गाड़ी में लद कर बुलंदशहर जाते और अगवाड़ा पिछवाड़ा सुजा कर वापस आते.


