Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

वेब-सिनेमा

नारायण मूर्ति से दक्ष गुप्ता तक- क्या लोगों को अब दूसरे तरीकों से गुलाम बनाया जा रहा?

डॉ मुकेश कुमार-

नई ग़ुलामी के प्रवर्तक- सैन फ्रांसिस्को का एक स्टार्ट अप है ग्रेप्टाइल और उसके सीईओ हैं दक्ष गुप्ता। उन्होंने कहा है कि वे नौकरी के इच्छुक लोगों से पहले ही इंटरव्यू में बता देते हैं कि हम हर दिन नौ बजे से रात 11 बजे तक काम करते हैं। शनिवार में काम करते हैं और रविवार को भी।

उन्होंने कहा कि इस तरह हम 84 घंटे काम लेते हैं और जिन्हें इस वर्क कल्चर में काम करना हो वे अप्लाई कर सकते हैं।

इस घनघोर शोषण को वे पारदर्शिता का नाम देते हैं। यानी उनका कहना है कि हम आपको बताकर अमानवीय शोषण करते हैं। जिसको मंज़ूर हो वो अर्ज़ियाँ भेजे।

उनके इस रवैये पर सोशल मीडिया में तीखी बहस हुई और उन्हें जान से मारने की धमकियाँ भी दी गईँ।

अब इसे इस नज़रिए से देखिए कि एक समय मज़दूरों के काम के घंटे कम करने की बात होती थी ताकि वे भी बेहतर जीवन जी सकें।

अब नारायण मूर्ति से लेकर दक्ष गुप्ता तक कर्मचारियों के शोषण की बात बहुत ही बेशर्मी के साथ करने लगे हैं।

वे ऐसा कर पा रहे हैं क्योंकि मज़दूरों की एकता ख़त्म हो गई है, उनके लिए लड़ने वाली पार्टियों की ताक़त ख़त्म हो गई है।

भूमंडलीकरण ने मज़दूरों को मिलने वाले कानूनी संरक्षण को भी ख़त्म कर दिया है और उद्योगपतियों को शोषणकारी परिस्थितियाँ निर्मित करने की खुली छूट दे दी है।

ये सब हमें एक दूसरी तरह की दास प्रथा की तरफ ले जा रहा है। मनुष्यों को दूसरे तरीक़ों से ग़ुलाम बनाया जा रहा है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन