Satyendra Kumar Pandey-
अभी मैंने अतुल सुभाष जी का पूरा वीडियो देखा। कुछ बातें बिंदुवार रखना चाहता हूं।
- अतुल जी ने पूरी वीडियो में अपनी सास , ससुर, साले, उसके ताऊ को एक भी अपशब्द नहीं बोले।
- पूरे वीडियो में अतुल जी के मुंह से ” मेरी पत्नी ” शब्द ही निकला जबकि वह उसके कुकर्मों की सजा भुगत रहे थे और खुद को मुक्त कर लिया।
- न्याय के लिए पूरी शिद्दत से लड़ने के बाद जब व्यवस्था को खुद के विरुद्ध पाया तब निराशा में हार मान ली।
- अतुल जी के ससुराल वालों ने कमाऊ दामाद को दुहने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
- इस पूरे प्रकरण में मुख्य समस्या लड़के और लड़की के परिवार के संस्कार और संस्कृति का बेमेल होना है। पूरी दुनिया में संस्कार और संस्कृति स्कूलों में नहीं सिखाई जाती। यह आती है मूलतः परिवार , परिवेश और समाज से। लड़का भारतीय मूल्यों से पूर्ण था और लड़की woke संस्कृति और धन प्रधान संस्कारों से प्रभावित थी।
- इस प्रकरण से यह सिद्ध होता है कि उच्च शिक्षा उच्च चरित्र को निर्मित नहीं कर सकती।
- न्याय पालिका का भ्रष्टाचार जगजाहिर है। वकील विवादों को सुलझाने की जगह उनको लंबा खींचते है ताकि उनकी कमाई होती रहे, न्यायधीश न्याय से ऊपर अपने निहित स्वार्थों को वरीयता देते हैं।
- पुरुष ही दोषी होगा और स्त्री पूजनीय है ऐसी मान्यता ने समाज को एक वास्तविक समस्या को सुलझाने से रोका हुआ है।
- स्त्री का सशक्तिकरण उसे परिवार नाम की संस्था को पोषित करना सिखाता है या उस परिवार को नष्ट कर देना यह स्त्री की मान्यताओं पर निर्भर करता है। यदि वह नियंत्रणवादी है तब परिवार की तबाही लगभग निश्चित है।
- अनजान लोगों से रिश्ता जोड़ना बहुत ही जोखिम भरा कदम है।
सीख :
- अपने बच्चों को woke संस्कृति से बचाएं। उनके पश्चिमी woke संस्कृति के अनुसरण पर गौरवान्वित होकर उनको प्रोत्साहन न दें।
- विवाह एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय होता है। आप एक ऐसे व्यक्ति के साथ एक कमरा, एक रसोई, एक बिस्तर, पूरा जीवन साथ गुजारने का निर्णय लेते है जो आपके बच्चों का माता या पिता बनेंगे। प्रयास करें कि अच्छी संस्कृति और संस्कार वाले परिवार की पूरी परख करने के बाद ही उस परिवार से लड़का या लड़की को अपना जीवन साथी बनाएं।
- अपने मन से यह अवधारणा निकाल दें कि उच्च शिक्षा प्राप्त लड़का या लड़की चरित्रवान, संस्कारवान और अच्छी संस्कृति का पालन करने वाले होंगे। हमारी शिक्षा पद्धति का इनसे कोई विशेष संबंध नहीं है।
- धन को केंद्र बिंदु बनाकर सामने वाले व्यक्ति के साथ व्यवहार करने वाले परिवार से संबंध जोड़ने से बचना चाहिए।
- अमीर लोग बुरे होते हैं या गरीब लोग अच्छे होते हैं यह कोई निश्चित पैमाना नहीं है और ना ही इसका विपरीत सत्य है। किसी व्यक्ति की अच्छाई और बुराई उसके परिवार और परिवेश पर निर्भर करती है। कोई व्यक्तिगत रूप से कितना भी घटिया क्यों न हो परंतु यदि वह अच्छे संस्कृत और उच्च संस्कृति वाले परिवार से है तब उसमें उसका कुछ अंश अवश्य बचा रहेगा।
- किसी से सिर्फ इस बात पर विवाह करने से बचें कि वह आकर्षक है, सुंदर है, आपको पसंद है या आप उसको पाना चाहते हैं। यह एक भयानक मान्यता है कि जो आपको पसंद है वह अच्छा ही होगा, वास्तव में जो व्यक्ति हमको प्रिय होता है उसके दुर्गुणों को हम नजरअंदाज कर देते है या खुदको समझा लेते हैं कि अपने साथी को हम सुधार लेंगे या अपने अनुकूल रूपांतरित कर लेंगे। ऐसा नहीं होता है, व्यक्ति अपने स्वभाव, संस्कार, संस्कृति और मान्यताओं से बंधा हुआ होता है और वह मृत्यु के साथ ही जाते हैं।
- जीवन साथी का चुनाव करने से पहले उसकी आवश्यकता को समझना आवश्यक है कि आप विवाह करने क्यों जा रहे हैं। आपका विवाह के पीछे उद्देश्य क्या है। हिंदू समाज में विवाह एक संस्कार है जो संतति के उद्देश्य से किया जाता है। यानी इस संसार में अगली पीढ़ी के बच्चों को जन्म देने हेतु। आप एक परिवार का सृजन करने जा रहे होते हैं। परिवार नाम की संस्था को एक इकाई के रूप में देखना चाहिए जहां माता और पिता उत्पादक हैं और उनके बच्चे उनका उत्पाद। एक अच्छे माता और पिता मिलकर एक बेहतर उत्पाद को इस समाज में ला सकते हैं। अपने जीवन साथी को एक बिजनेस पार्टनर की तरह देखना चाहिए। आपका बिजनेस पार्टनर सिर्फ आपको पसंद है, आपका उसपे दिल आ गया है, आप उसके स्नेह से आकर्षित है क्या बस यह योग्यता उसे आपका पार्टनर बनाने हेतु पर्याप्त है या फिर वह अपने साथ विशेष उद्देश्य के लिए निर्मित संस्था और उसके उत्पाद को निर्मित करने में कितना कौशल, कितनी योग्यता, कितना प्रशिक्षण प्राप्त है यह आवश्यक है।
आपका जीवन साथी आपके जीवन में, आपके परिवार में क्या मूल्य लेकर आ रहा है यह निश्चित करना आवश्यक है। बड़े स्तर पर यह चूक हो रही है।
लोग लड़की की सुंदरता, लड़के की कमाई और शिक्षा को देखकर रिश्ता जोड़ लेते हैं। यह शैली परिवार और बच्चों के चरित्र, संस्कार और संस्कृति के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा है।
विवाह करें तो यह निश्चित करें कि आपका साथी आपके जीवन में ऐसा क्या लेकर आ रहा है जो आपके पास नहीं है ताकि दोनों मिलकर बेहतरीन बच्चों को तैयार कर सकें।
विवाह के लिए सुंदर पत्नी की जगह एक सुयोग्य माता के गुणों वाली कन्या का चुनाव करें।
पुरुष के लिए विवाह का मतलब responsibility और स्त्री के लिए विवाह का मतलब opportunity नहीं होना चाहिए।
विवाह के लिए पहले परिवार की परख करें, फिर लड़के या लड़की की परख करें। अनजान परिवार से संबंध जोड़ने से जितना बच सकते हैं बचें।
घटते हुए सामाजिक दायरे, घर से दूर नौकरी है व्यापार ने शादी ब्याह को बेहद कठिन बना दिया है।
या लड़का किसी लड़की पर दिल हार बैठता है या फिर परिवार किसी वेबसाइट से लड़की को सामूहिक रूप से पसंद कर लेता है। दोनों ही जगह सिर्फ पसंद आधारित निर्णय हो जाते है ।
ऊपर से दहेज और लड़के की कमाई देखना कोढ़ में खाज जैसी स्थिति बना देता है।
नई पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाना है तो शादी करने की तमीज सीख लें।


