कानपुर | आईआईटी छात्रा से दुष्कर्म के आरोपी एसीपी मोहसिन खान को लेकर उत्तर प्रदेश में नए तरह का विवाद खड़ा हो रहा है. लोगों का कहना है कि यह मामला किसी पुलिस अधिकारी से जुड़ा न होकर किसी गरीब मुस्लिम से जुड़ा होता तो पुलिस अब तक न जाने कौन-कौन से मुकदमे लगा चुकी होती. घर तोड़ देती. जेल में सड़ा देती, लेकिन मोहसिन खान पर चारों तरफ सन्नाटा पसरा है… देखें नीचे
प्रकरण पर भारत समाचार के एक्स हैंडल से लिखा गया है- IIT की स्टूडेंट के साथ कानपुर पुलिस के एसीपी मोहसिन खान ने बलात्कार किया। प्रताड़ित किया। लेकिन उसे अब तक न उसे गिरफ्तार किया गया और न सस्पेंड हुआ।
मीडिया में जब से मामला उछला तो पीड़ित हिंदू छात्रा ने कोर्ट में अपना बयान भी दर्ज कराया। बलात्कार के आरोपों पर पीड़िता ने कोर्ट में खुलकर एसीपी मोहसिन खान का नाम भी लिया। बताया कि उसके पास तमाम वीडियो और ऑडियो साक्ष्य के रूप में है।
इतना सब होने के बाद भी एसीपी मोहसिन खान आजाद है और कानपुर के अफसरों के संपर्क है। आशंका जताई जा रही है कि वो सबूत मिटाने और गवाहों को अब प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
कानपुर पुलिस बलात्कार के इस मामले में पीड़ित के साथ कम बल्कि बलात्कारी एसीपी के साथ ज्यादा दिख रही है। हाल ही में इस एसीपी को कानपुर से डीजीपी रजत पदक दिलवाया गया था।
बजरंग दल के अलावा किसी हिंदूवादी संगठन ने पीड़ित हिंदू छात्रा के लिए इंसाफ की लड़ाई नहीं लड़ी।
डीजीपी हेडक्वार्टर और गृह विभाग ने भी इस लव जिहाद की आशंका में बलात्कार के इस मामले में चुप्पी साध रखी है। देखना है कि एसीपी मोहसिन खान और उसको संरक्षण देने वाले कब तक कानून से उसे बचाएंगे।
ममता त्रिपाठी-
किसी आम आदमी पर ऐसा आरोप लगता और गम्भीर धारा में मुक़दमा दर्ज होता तो पुलिस बिजली की फुर्ती से उसे गिरफ़्तार करके जेल भेजती, फिर क़ानूनी प्रक्रिया से निपटता वो।
मगर अपने साथी को “सेफ़ पैसेज” देकर यूपी पुलिस के बड़े अफसरों ने ACP मोहसिन खान को पूरा मौक़ा दिया कि वो कोर्ट में जाकर रिलीफ़ ले लें…

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संजय त्रिपाठी-
एक पुलिस अफ़सर के बजाए अगर किसी साधारण व्यक्ति का मामला होता तो अब तक न जाने कौन कौन सी धाराओं में बुक हो गया होता। मगर मोहसिन ख़ान के मामले में पहले एसआईटी जाँच होगी। ऐसी ही एक एसआईटी जाँच आईएएस अफ़सर इफ्तिखारुद्दीन के ख़िलाफ़ अपने सरकारी आवास में जेहाद की अवैध पाठशाला लगाने में भी हुई थी। जाँच रिपोर्ट में साफ़ तौर पर इफ्तिखारुद्दीन दोषी पाए गए थे, उन पर कार्रवाई की सिफारिश भी की गई तजी मगर सबकुछ दब गया। याद दिलाने के लिए उनका एक वीडियो भी पोस्ट कर रहा हूँ।
ताज़ा मामले में मोहसिन ख़ान पर आरोप है कि उन्होंने अपनी शादी की बात छुपाकर युवती को झाँसे में लिए और फिर उसका शारीरिक शोषण किया। बात खुलने पर धमकी भी दी। बीएनएस की धाराओं के साथ ही उन पर सरकारी पद के दुरुपयोग का संगीन आरोप भी साफ़ तौर पर बनता है। अब देखिए साथी पुलिसवाले इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
विनोद कुमार गौतम-
आईआईटी कानपुर की छात्रा से रेप के आरोपों में घिरे एसीपी मोहसिन खान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. एक तरफ आरोप लगाने वाली पीएचडी छात्रा ने कोर्ट में अपने बयान दर्ज करा दिए हैं. बताया जा रहा है कि पीड़िता अपने बयान पर कायम है. वहीं, दूसरी तरफ एसीपी की गिरफ्तारी की मांग करते हुए हिंदूवादी संगठन के लोगों ने मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने एफआईआर दर्ज होने के तीन-चार दिन बाद भी एसीपी की गिरफ्तारी ना होने पर नाराजगी जताई. इसको लेकर बजरंग दल और अन्य संगठनों ने बीते दिन कमिश्नर ऑफिस पहुंचकर विरोध दर्ज कराया और कमिश्नर को एक ज्ञापन भी सौंपा. हालांकि, इस दौरान उनकी अधिकारी हल्की बहस भी हो गई.
बता दें कि सोमवार को पूर्व बजरंग दल अध्यक्ष कृष्णा तिवारी अपने दर्जनों समर्थकों के साथ पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंचे. जहां उन्होंने IIT छात्रा के साथ शादी के नाम पर रेप करने के आरोपी एसीपी कलेक्टर गंज रहे मोहसिन खान की गिरफ्तारी को लेकर कमिश्नर को ज्ञापन दिया. इस दौरान हिंदूवादी संगठन के लोगों ने आरोपी मोहसिन खान की बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की. उनका कहना था कि इस मामले में अगर कोई आम आदमी फंसा होता तो अबतक उसकी गिरफ्तारी हो जाती, लेकिन आरोपी एक एसीपी है इसलिए उसपर एक्शन लेने में ढिलाई बरती जा रही है. अधिकारियों द्वारा केवल जांच-पड़ताल की बात कही जा रही है.
मामले में बजरंग दल के कृष्णा तिवारी ने कहा- ‘एसीपी मोहसिन खान ने लव जिहाद फैलाया है. एक दलित छात्रा को शादी के नाम पर अपनी हवस का शिकार बनाया है. फिर भी उसकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है, जबकि आम लोगों की तत्काल गिरफ्तारी हो जाती है. अगर जल्द गिरफ्तारी नहीं की गई तो हम सड़कों पर उतर के आंदोलन करेंगे. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, कानपुर IIT की 26 वर्षीय छात्रा से रेप के आरोपी मोहसिन खान लखनऊ के रहने वाले हैं.
मोहसिन साल 2015 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं. ट्रांसफर के बाद कानपुर आने पर उनको थाना कलेक्टरगंज और साइबर क्राइम सेल का जिम्मा सौंपा गया था. इस बीच उन्होंने विभाग से इजाजत लेकर साइबर क्राइम, इंवेस्टिगेशन एंड क्रिमिनोलॉजी सब्जेक्ट पर कानपुर IIT में पीएचडी शुरू की थी. जहां मोहसिन की पीड़िता से मुलाकात हुई. आरोप है कि कुछ ही दिनों में दोनों के बीच नजदीकी बढ़ी जिसके बाद मोहसिन ने छात्रा को झांसे में लेकर उसका शोषण किया.
जब छात्रा को मोहसिन की असलियत पता लगी तो उसने पुलिस और आईआईटी मैनेजमेंट से इसकी शिकायत की. मैनेजमेंट के दखल के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की. छात्रा ने आरोप लगाते हुए कहा कि मोहसिन खान ने खुद को अविवाहित बताकर उसके साथ नजदीकी बढ़ाई, फिर शादी का झांसा देकर संबंध बनाए. जबकि, मोहसिन पहले से शादीशुदा थे.
बवाल बढ़ने पर गुरुवार की रात एसीपी मोहसिन खान के खिलाफ रेप समेत कई धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई. साथ ही आरोपी एसीपी को कानपुर से लखनऊ पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया गया. जांच के लिए एक एसआईटी भी गठित की गई है, जिसमें एक महिला अधिकारी भी शामिल है


