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भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं, हम तीन हजार साल से सद्भावना के साथ रह रहे हैं : मोहन भागवत

पदमपति शर्मा-

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक आदरणीय मोहन भागवत ने पुणे में 23 वीं सहजीवन व्याख्यानमाला में “भारत विश्वगुरु” विषय पर भारी जनसमूह के बीच अपने उद्बोधन में एक बार फिर से मंदिर-मस्जिद विवादों के उठने पर चिंता जताई। भागवत जी ने कहा कि अयोध्या के राम मंदिर के निर्माण के बाद कुछ लोग ऐसा मानते हैं कि वे ऐसे मुद्दे उठाकर हिंदुओं के नेता बन जाएंगे। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भागवत जी ने कहा – भारत को यह दिखाने की जरूरत है कि हम एक साथ रह सकते हैं। हम तीन हजार साल से सद्भावना के साथ रह रहे हैं। अगर हम दुनिया को विश्वबंधुत्व देना चाहते हैं, तो हमें इसका एक मॉडल बनाने की जरूरत है।

भारतीय समाज की बहुलता और वसुधैव कुटुम्बकम पर प्रकाश डालते हुए सर संघचालक ने कहा कि रामकृष्ण मिशन में क्रिसमस मनाया जाता है। केवल हम ही ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि हम हिंदू हैं।

भागवत ने आगे कहा- बाहर से आए कुछ समूह अपने साथ कट्टरता लेकर आए हैं और वे चाहते हैं कि उनका पुराना शासन वापस आए, लेकिन अब देश संविधान के अनुसार चलता है। इस व्यवस्था में लोग अपने प्रतिनिधि चुनते हैं, जो सरकार चलाते हैं। आपने परोक्ष चेतावनी देते हुए यह भी कहा कि हमे किसी पर भी अत्याचार नहीं करना है लेकिन अत्याचार सहना भी नहीं है।

दूसरे देशों में अल्पसंख्यकों के साथ क्या हो रहा, सब देख रहे मोहन भागवत जी ने यह भी कहा कि भारत में अक्सर अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चर्चा की जाती है। अब हम देख रहे हैं कि दूसरे देशों में अल्पसंख्यक समुदायों को किस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

हालांकि, संघ प्रमुख ने पड़ोसी बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा का कोई संदर्भ नहीं दिया, लेकिन संघ ने हाल के हफ्तों में शेख हसीना सरकार के हटने के बाद उस देश में हिंदुओं की स्थिति के बारे में चिंता व्यक्त की है।

मैं आदरणीय मोहन भागवत जी की भतीजी के वैवाहिक समारोह और व्याख्यानमाला में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने वाराणसी से पुणे गया था । बच्ची के पिता डाक्टर अनंत भागवत मेरे अभिन्न मित्रों में हैं। मेरे दो अन्य घनिस्ठ मित्र जनरल वीके सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल विष्णुकांत चतुर्वेदी भी दिल्ली से पधारे थे। फौज के इन दोनो महा योद्धाओं ने सर संघचालक जी का स्वागत किया। चिकित्सक के साथ ही प्रख्यात समाजसेवी अनंत भागवत ने वीके सिंह और विष्णुकांत चतुर्वेदी की सैन्य सेवा के दौरान उनकी महान उपलब्धियों के बारे में अपने संबोधन के दौरान विस्तृत चर्चा की। सहजीनव व्याख्यानमाला के अध्यक्ष ऋषिकुल परंपरा के समाजसेवी श्रीयुत विजय ( राजू ) कुलकर्णी ने अंत में सभी सम्माननीय अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।

इस व्याख्यानमाला में विशेष आकर्षण का केन्द्र विंदु रही सबसे कम उम्र ( 18 ) में बतौर सरपंच निर्वाचित ( राजौरी- जम्मू-कश्मीर) होकर विश्व कीर्तिमान स्थापित करने वाली समरीना खान । समरीना ने सर संघचालक जी का आशीर्वाद लिया। समरीना से मेरी अगले दिन 21 दिसंबर को सम्पन्न वैवाहिक समारोह के दौरान बातचीत हुई। राष्ट्रवादी मुस्लिम समरीना साड़ी में काफी फब रही थीं।

आपका यह नाचीज अगले दिन यानी शनिवार की शाम को वाया मुम्बई विमान से काशी लौटा। एक अभियान में जुटे होने के कारण पुणे न आ सकने के बावजूद भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता जाॅन वर्गीज ने , जिनको अनंत भागवत जी का दायां हाथ माना जाता है, मेरी सम्पूर्ण यात्रा, यहां तक कि टैक्सी के प्रबंध तक का भी ख्याल रखा। फिछले छह दिनों के दौरान रोज सुबह से शाम के बीच दर्जनों बार उनसे मोबाईल या व्हाट्सएप पर बातचीत होती रही थी। मैं काशी सकुशल पहुंच गया, यह जान कर ही उन्होने राहत की सांस ली। जान का आभार व्यक्त करने के लिए सचमुच मेरे पास शब्द नहीं हैं।

लेखक पदमपति शर्मा वरिष्ठ पत्रकार हैं और बनारस के निवासी हैं।

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