गोरखपुर | अखबार को अगर जहन्नुम में धकेलना हो तो उसके लिए किसी तोड़ू दस्ते की जरूरत नहीं होती। आपका एक फैसला अखबार की साख पर बट्टा लगा देता है। खास कर तब, जब आप खबर को मैनेज करने का लाभ पाल लेते हों।
गोरखपुर के सभी अखबारों में आज एक आत्महत्या की खबर लगी है। सभी ने उक्त खबर को फ्रंट पेज पर लिया है। ये खबर गोरखपुर और बस्ती मंडल के सातों जिला संस्करणों में फ्रंट पेज पर छपी है।
राष्ट्रीय सहारा, गोरखपुर के सर्वेसर्वा पीयूष बंका के कुशल मार्गदर्शन में चल रहे इस अखबार ने गोरखपुर सिटी संस्करण में इस खबर की एक पंक्ति भी नहीं छापी। इससे ज्ञात होता है कि बंका महाशय खबर को पी गए, हालांकि डाक में खबर के टोन को हल्का कर खानापूर्ति के नाम पर लगा तो दिया गया है लेकिन वह भी अंदर के पेज पर। इतनी बड़ी खबर अंदर के पन्ने पर क्या कर रही है?
ये मामला निषाद पार्टी के संजय निषाद से जुड़ा है। उनकी ही पार्टी के पूर्व प्रदेश सचिव धर्मात्मा निषाद ने खुदकुशी कर ली और इसके लिए संजय निषाद और उनके बेटों को जिम्मेदार ठहराया।
इतनी बड़ी खबर को बंका महाशय ने जिस तरीके से डंका बजा बजा कर सिटी से गायब ही कर दिया, वह यह बताने के लिए पर्याप्त है कि जब तक बंका महाशय का डंका बजता रहेगा, अखबार की बदनामी का भी डंका बजता रहेगा। अब दिल्ली वाले आंखें कब खोलेंगे, ये देखना होगा।
राष्ट्रीय सहारा मे यह खबर सिर्फ महराजगंज संस्करण अंदर के पेज पर छपी है। अन्य अख़बारों मे आल एडिशन फर्स्ट पेज पर प्रमुखता से छपी है। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर मची भगदड़ में 18 लोगों के मौत की खबर भी इस अख़बार में नहीं छपी थी. अंदर सिर्फ भगदड़ में कुछ लोगों के घायल होने की खबर छपी। निषाद समुदाय में आक्रोश है।
Gorakhpur जिले में सहारा का प्रसार इन्हीं कारणों से घटता गया। अधिकांश स्थानों पर अख़बार दिखता ही नहीं। केवल पीडीएफ पर चल रहे इस अख़बार को ही कभी तेवर के लिए जाना जाता था।
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