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उत्तर प्रदेश

कानपुर CMO सस्पेंड : बड़ा सवाल- DM जितेंद्र प्रताप की जांच क्यों नहीं हुई?

अभिषेक उपाध्याय-

कानपुर के DM जितेंद्र प्रताप सिंह से टकराने वाले कानपुर CMO सस्पेंड। नए CMO की तैनाती कर दी गई। यहाँ सवाल ये है कि DM के आरोपों पर तो एक्शन हो गया। मगर CMO के आरोपों पर क्या जाँच हुई?

कानपुर सीएमओ हरिदत्त नेमी ने टॉप सीक्रेट को दिए इंटरव्यू में DM जितेंद्र प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने “सीबीआई की चार्जशीटेड फर्म” और डीएम के उस फर्म को दिए “कैरेक्टर सर्टिफिकेट” का जिक्र किया था।

उनके मुताबिक सीबीआई की चार्जशीटेड फर्म को NUHM यानि National Urban Health Mission के तहत खरीद का काम दिया गया। खुद डीएम ने इसके लिए कैरेक्टर सर्टिफिकेट जारी किया।

सीएमओ ने टॉप सीक्रेट को इंटरव्यू में ये भी बताया था कि “कानपुर के DM जितेन्द्र प्रताप सिंह ने भरी मीटिंग में मेरे सर पर पीछे से पुश किया।

अति तो ये हो गई कि ये हरकत मेरे जूनियरों के सामने हुई। यहाँ तक कि DM ने राज्यपाल की जूम मीटिंग में सबके सामने मुझे अपशब्द कहे।”

सवाल ये भी है कि क्या CM योगी आदित्यनाथ ने कानपुर DM जितेन्द्र प्रताप सिंह पर लगे आरोपों की भी जाँच की ज़रूरत समझी? क्या कोई कमेटी बनी जिसने दोनों पक्षों की जाँच की?

क्या विभागीय मंत्री से कोई सलाह मशवरा किया गया? क्या विधानसभा अध्यक्ष जिन्होंने CMO की पैरवी की थी, उनसे इस बारे में पूछा गया?

न्याय के मोहल्ले में one way street नहीं होती है। फिर ये नए मानक कौन गढ़ रहा है? क्या इस दौर में परा-ईश्वरीय न्याय के कुछ नए मोहल्ले तैयार किए जा रहे हैं?

देखें पूरा वीडियो और सस्पेंशन ऑर्डर…


मामला विकराल होता हुआ। कानपुर CMO हरिदत्त नेमी की योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी। लिखा मैं अनुसूचित जाति। DM जितेन्द्र प्रताप सिंह ने मुझे जातिसूचक शब्द कहे। CBI की चार्जशीटेड कंपनी को काम देने का दबाव डाला। मुझसे रिश्वत माँगी। मेरा ही शोषण हुआ और मुझ पर ही कार्रवाई हुई।

विवेक त्रिपाठी-

कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह और सीएमओ डॉ. हरिदत्त नेमी के बीच का विवाद अभी थमा नहीं है. सीएमओ को सस्पेंड कर दिया गया है. नए सीएमओ की तैनाती भी हो गई है. खबर आ रही है कि सस्पेंशन के बाद सीएमओ ने कानपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की है.. इस बीच 17 जून को लिखा गया उनका एक लेटर भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल है. इस लेटर में उन्होंने कानपुर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
डॉ. हरिदत्त नेमी ने मुख्यमंत्री के नाम लिखे इस पत्र में कानपुर के डीएम पर वसूली और भ्रष्टाचार के चलते अनुसूचित जाति के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि डीएम साहब मेरे ऊपर आग बबूला हो गए और कहा, तुम दलित जाति के मंद बुद्धि के व्यक्ति हो, तुम्हें पैसा कमाना नहीं आता है.. तुम्हें सिस्टम नहीं पता है.. डॉ. हरीदत्त नेमी का कहना है कि डीएम साहब उन पर सीबीआई से चार्जशीटेट फर्म मेसर्स जेएम फार्मा को एक करोड़ 60 लाख 47 हजार रुपए का भुगतान करने का दबाव बना रहे थे.

सीएमओ का कहना है कि उन्होंने कानपुर में 20 साल से महत्वपूर्ण पदों पर जमे अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सुबोध प्रकाश यादव को हटाकर जिला क्षय रोग अधिकारी के पद पर ट्रांसफर किया तो डीएम साहब बौखला गए. उन्होंने डॉक्टर सुबोध प्रकाश यादव का ट्रांसफर रुकवाने के लिए दबाव बनाया. उनका कहना है कि ट्रांसफर न रोकने से भी डीएम साहब उनसे नाराज हैं.
डॉ. हरिदत्त नेमी ने मुख्यमंत्री से अनुसूचित जाति के अधिकारी की रक्षा करने और न्याय दिलाने की मांग की है.

सस्पेंशन और ट्रांसफर के बाद भी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने से साफ है कि डॉ. हरिदत्त नेमी को कहीं न कहीं से पावर मिल रही है. एक बात और साफ है कि डीएम साहब भी आगे पीछे नपेंगे.. तो सीएमओ के खिलाफ कार्रवाई से खुश होने वाले कानपुर के नेता और अन्य लोग ज्यादा उत्साहित न हों क्योंकि मामला अभी खत्म नहीं हुआ..

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