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अमर उजाला हल्द्वानी के पत्रकारों में असंतोष, दो महीने में चार ने छोड़ा अखबार!

हल्द्वानी। अमर उजाला की नैनीताल यूनिट में चल था उथल पुथल का दौर खत्म नहीं हो पा रहा है। संपादक के रवैये से प्रशासन पत्रकार लगातार संस्थान छोड़ रहे हैं मगर प्रबंधन कोई हस्तक्षेप के बजाय मूकदर्शक है। कुछ पत्रकारों ने प्रबंधन को संस्थान में चल रहे माहौल के बावत मेल भी किए मगर नतीजा सिफर रहा। पिछले महीने हल्द्वानी यूनिट में तैनात सब एडिटर राघवेंद्र शुक्ला ने इस्तीफा दिया। चर्चा है कि शुक्ला ने लंबा चौड़ा पत्र प्रबंधन को भेजा था, जिसमें संस्थान में चल रहे तनावपूर्ण माहौल का जिक्र किया था। चर्चा ये थी कि पत्र में उन्होंने अपनी ज्वाइनिंग से नौकरी के आखिरी दिन तक खुद को संस्थान से जाने वाला 25 वा पत्रकार बताया था।

उन्होंने माहौल को बर्दाश्त से बाहर बताकर इस्तीफा दिया और बनारस में जागरण को ज्वाइन कर लिया। इससे कुछ दिन पहले पर संवाद न्यूज एजेंसी में कार्यरत प्रशांत पांडे ने इस्तीफा देकर अमृत विचार ज्वाइन कर लिया।

यूनिट में डेस्क में काम देख रहे एक पत्रकार आनंद तनावपूर्व माहौल का हवाला देते हुए कुछ ही महीनों में नौकरी छोड़ घर बैठ गए। आलम ये है कि डेस्क में लोगों की कमी है और छुट्टियां नहीं मिलने पर पत्रकारों ने बैठक में संपादक के सामने ही खुली नाराज़गी प्रकट कर दी थी।

हाल में ही संवाद न्यूज एजेंसी के यूनिट कॉर्डिनेटर भुवन भास्कर भी इस्तीफा देकर चले गए। उधम सिंह नगर ब्यूरो में दो साल से संवाद न्यूज एजेंसी में तैनात वरिष्ठ पत्रकार कालिका रावल ने बुधवार को संस्थान छोड़ दिया। उन्होंने संस्थान के बनाए व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डाला और फिर एक मैसेज अपनी फेसबुक अकाउंट से भी शेयर कर दिया।

बताया जा रहा है कि कलिका के प्रबन्धन को भी मेल किया है। संस्थान में तनावपूर्ण माहौल से नए लोग आ नहीं आ रहे और पुराने लोगों से छोड़ने का सिलसिला जारी है। चर्चा है कि अमर उजाला का प्रतिद्वंद्वी जागरण से नाराज पत्रकार संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि कुछ दिनों में और झटके संस्थान को लगा सकते हैं।


पढ़िए कालिका रावल ने क्या लिखा फेसबुक पर-

अलविदा अमर उजाला—नहीं रही वो बात

जनपक्षीय पत्रकारिता के 35 वर्ष… अमर उजाला के साथ स्वर्णिम 25 वर्ष… महत्वपूर्ण इंपैक्ट की कुछ झलकियां-

अप्रैल 2002 से मार्च 2007 (गंगोलीहाट में तहसील रिपोर्टर)

  • 75 लाख की बुंगली पेयजल योजना घोटाला उजागर
  • पेयजल निगम के एई और जेई बर्खास्त

अप्रैल 2007 से जनवरी 2020 (पिथौरागढ़ ब्यूरो कार्यालय सेकंड इंचार्ज)

  • पिथौरागढ़ के मस्तक चंडाक की 200 एकड़ भूमि खुर्द-बुर्द होने से बची
  • बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) की धांधली उजागर, मामला देश की संसद में गूंजा, पिथौरागढ़ से टनकपुर तक 150 किलोमीटर सड़क बीआरओ से हटी

फरवरी 2020 से जुलाई 2024 बागेश्वर ब्यूरो इंचार्ज

रोडवेज डिपो के नाम पर बने परिसर के बस अड्डे के रूप में संचालन के सरकार के फैसले की प्रमुखता से मुखालफत—सरकार को बनाना पड़ा डिपो

  • बागेश्वर में जिला अस्पताल के भवन की मंजूरी
  • खेल स्टेडियम की मंजूरी
  • सरयू नदी के तट पर कब्जा जमाने वाले भू- पिसाचों के खिलाफ अभियान

अगस्त 2024 से रुद्रपुर ब्यूरो कार्यालय

  • जयनगर की खस्ताहाल सड़क के चौड़ीकरण, सुधारीकरण के लिए केंद्रीय सड़क निधि से 54 करोड़ मंजूर,
  • डेढ़ दशक बाद जयनगर बिजली किल्लत से मुक्त, 1.35 करोड़ की लागत से बना अलग फीडर

यह कुछ चुनिंदा उपलब्धियां हैं। जिनके नख तक पहुंचना तथाकथित मूर्धन्यों— की कुब्बत नहीं—

यह उपलब्धि अमर उजाला जैसे जनपक्षीय बैनर के बगैर संभव नहीं थी। धन्यवाद अमर उजाला

करीब साढ़े तीन दशक की पत्रकारिता के स्वर्णिम काल में कईयों को पत्रकारिता का ककहरा सिखाया। कई ने मुझसे सीखा बाद में सब अभिमन्यु बन गए।

“स्पष्टवादिता मेरा श्रृंगार”

झूठ-कपट, छल-प्रपंच, मुंह पर कुछ, पीठ पीछे कुछ और चाटुकारिता ना मेरे संस्कार और ना मेरे खून में समाहित। जिसकी जैसी सोच उसने वैसा जाना मुझे

अहम बात – 35 वर्ष जनता को समर्पित रहे।‌ 35 वर्ष की पत्रकारिता में मैंने असंख्य पाठकों के दिल में राज किया यही मेरी पूंजी है।

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