ग्रेटर नोएडा। गौतमबुद्ध नगर के दनकौर क्षेत्र स्थित नवादा गांव निवासी ओमवीर सिंह ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पी-3 स्थित यथार्थ अस्पताल पर गंभीर चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित का दावा है कि इलाज के नाम पर करीब 8.20 लाख रुपये खर्च कराने के बावजूद अस्पताल की कथित लापरवाही के कारण अंततः उनका एक पैर काटना पड़ा। मामले की शिकायत उन्होंने जिलाधिकारी गौतमबुद्ध नगर से करते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और उचित मुआवजे की मांग की है।
शिकायत के अनुसार, ओमवीर सिंह का पैर फ्रैक्चर होने के बाद यथार्थ अस्पताल में उपचार कराया गया। उनका आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान पैर में रॉड सही तरीके से नहीं लगाई गई और उपचार में लगातार लापरवाही बरती गई। शिकायत में कहा गया है कि संक्रमण बढ़ने की बात कहकर अस्पताल लगातार इलाज और सर्जरी के नाम पर पैसे लेता रहा, लेकिन उनकी हालत सुधरने के बजाय बिगड़ती चली गई। अंततः उन्हें अपना पैर गंवाना पड़ा।
पीड़ित ने यह भी आरोप लगाया है कि इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने परिवार को लगातार आश्वासन दिया, जिससे वे बेहतर इलाज की उम्मीद में लाखों रुपये खर्च करते रहे। पैर कट जाने के बाद परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहा है। शिकायत में जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए गए हैं।
मामले को लेकर जिलाधिकारी से उच्चस्तरीय चिकित्सकीय जांच कराने, जिम्मेदार डॉक्टरों और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई करने तथा पीड़ित को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है।
इस अस्पताल में मेरा अनुभव भी बहुत खराब रहा है। यह लूट का अड्डा है। अगर आपको अपनी और अपने प्रियजनों की जान प्यारी है, तो गलती से भी यथार्थ में इलाज कराने न जाएँ। 2021 में मैंने अपनी माँ का अम्बिलिकल हर्निया का ऑपरेशन यहाँ कराया था। डॉक्टर की लापरवाही से एक हफ्ते में दो ऑपरेशन हुए थे, हफ्ते में दो बार ऑपरेशन होने से एनेस्थीसिया का डोज़ इतना हो गया कि उनके फेफड़ों में पानी भर गया। इलाज हर्निया का कराने गई थीं और जान के लाले पड़ गए। अपनी गलती न मानते हुए इस धूर्त अस्पताल ने दूसरे ऑपरेशन का भी पूरा बिल बना कर दे दिया। और तो और, यहाँ का स्टाफ से लेकर वार्ड बॉय से लेकर नर्स तक सब चोर हैं। ज़रा-सी आपकी नज़र की चूक हुई तो आपकी दवाई, जो भी आती है, उसमें से महंगे इंजेक्शन गायब कर देते हैं और बोलते हैं कि हमने डोज़ दे दिया है। मैंने खुद नर्स को ऐसा करते हुए पकड़ा। रात में आकर आपके मरीज की ऑक्सीजन पाइप हटा देते हैं। -आई सिंह (भुक्तभोगी)


