संजय कुमार सिंह
राम मंदिर ट्रस्ट में अब चंपत राय जैसी हस्ती को सीईओ कहा जाएगा। शपथ लेकर देश में भिन्न संवैधानिक पदों पर बैठे लोग जब निष्पक्ष नहीं हैं तो सीईओ की निष्पक्षता या ट्रस्ट के नए चंपक राय का अंदाजा कुछ समय बाद ही होगा। मंदिर का चढ़ावा सुरक्षित है यह भी आज की खास खबर है। पैसों की गड़बड़ी हुई है लेकिन उसके लिए कोई बलि का बकरा नहीं ढूंढ़ा गया है शायद उन्हीं को बना दिए जाए जो चोर साबित होंगे या फिर चढ़ावा सुरक्षित है तो दान की बहुत चिन्ता न की जाए। फिलहाल यह बाद की बाद की बात है। आज मेरे 10 में से तीन अखबारों में मंदिर ट्रस्ट की खबर लीड नहीं, सेकेंड लीड है। इनमें पहला कलकत्ता का द टेलीग्राफ है। यहां स्थानीय खबर को लीड बनाया गया है लेकिन सेकेंड लीड पूरे मामले को सबसे अच्छी तरह (या संतुलित) ढंग से समझाती है। अंत में खबर का हिन्दी अनुवाद पढ़ सकते हैं। दूसरा अखबार दि एशियन एज है। इसकी लीड प्रधानमंत्री जकार्ता पहुंचे है। इसे महत्व दिए जाने का कारण नवोदय टाइम्स की दूसरी लीड से समझ में आता है। शीर्षक है, एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती देने इंडोनेशिया पहुंचे प्रधानमंत्री। इन दो खबरों से लगता है कि हेडलाइन मैनेजमेंट जारी है और वह चंदा चोरी मामले को संभालने के साथ विदेश नीति के मोर्चे पर हो रही फजीहस को भी ठीक करने के लिए हो रही लगती है। इसमें ई-20 और मिलावटी पेट्रोल का मामला रह गया है जो सरकार की फजीहत का कारण बनेगा लेकिन उसपर आज कुछ खास नहीं है। राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक को लीड नहीं बनाने वाला आज का मेरा तीसरा अखबार द हिन्दू है, जहां पहलगाम हमले की चार्जशीट को लीड बनाया गया है। आप जानते हैं कि पहलगाम हमले के अपराधी कैसे पहुंचे और कैसे गायब हुए पता नहीं चला लेकिन उसका बदला लेने के लिए ऑपरेशन सिन्दूर शुरू हुआ जो अचानक बंद हो गया। छह सैनिकों के शहीद होने की खबर अब स्वीकार की गई है। एनआईए ने एक साल से भी ज्यादा बाद चार्जशीट दायर की है लेकिन यह पता नहीं चला कि हमलावर मारे जाने से पहले, फरारी की स्थिति में महीनों कैसे कहां जिन्दा रहे और खाते-पीते कैसे जिन्दा रहे। मीडिया ऐसे मामलों पर अटकलें लगाता रहता था लेकिन अब तो सैनिकों के शहीद होने की खबर भी छुपा ली गई।
ऐसे में आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, राम मंदिर ट्रस्ट ने बड़े ओवरहॉल की शुरुआत की। इसके साथ यह भी खबर है कि ट्रस्ट के सदस्यों ने शुरू में चंपत राय के इस्तीफे का विरोध किया। मुख्य खबर के साथ चढ़ावे की उन चीजों की तस्वीर है जो गायब बताए गए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक है, “ट्रस्ट के अध्यक्ष (महंत नृत्य गोपाल दास) ने (एक खुले पत्र में) कहा : मंदिर के चढ़ावे की चोरी पाप है, चंपक राय और अनिल मिश्र बाहर।” इसके साथ की खबर के अनुसार, अनिल मिश्र दान को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे। दूसरी खबर है, ट्रस्ट के 124 करोड़ के खर्चों की जांच चल रही है। खबर के साथ हाईलाइट किया गया है, एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच सीसीटीवी फुटेज से 70 मामलों का उल्लेख किया है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर पांच कॉलम की लीड है। फ्लैग शीर्षक है, चढ़ावा चोरी का विवाद : अयोध्या मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्र का इस्तीफा स्वीकार किया, अयोध्या मंदिर ट्रस्ट में शिखर पर बदलाव। द हिन्दू में मंदिर ट्रस्ट की बैठक की खबर अंदर होने की सूचना है। इसके अनुसार ट्रस्ट ने चंपक राय का इस्तीफा स्वीकार किया। दि एशियन एज का शीर्षक है, मंदिर ट्रस्ट ने दो प्रमुख इस्तीफे स्वीकार किए। दो बुलेट प्वाइंट उपशीर्षक हैं। इनमें पहला महंत नृत्य दास का कहा है – चोरी से बेहद तकलीफ हुई और दूसरा यह कि कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव होंगे। आज इस खबर को लीड बनाने के लिए अखबारों ने जो खबरें छोड़ी हैं उनमें दि एशियन एज की लीड का शीर्षक है, मोदी जकार्ता पहुंचे, आज वार्ता करने वाले हैं। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, एनआईए ने पहलगाम हमले में एलईटी प्रमुखे के खिलाफ चार्जशीट दायर की। मुझे लगता है कि आज के अखबारों में बड़े पैमाने पर सरकार का प्रचार और जनसंपर्क का कार्य हुआ है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है – चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय की छुट्टी। अमर उजाला का शीर्षक है, चंपत और अनिल को राम-राम, गोपाल की भी छुट्टी, सीईओ की तैनाती के लिए समिति। दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है, राम ट्रस्ट कृष्ण के भरोसे। इसका मतलब हुआ अयोध्या के राम मंदिर को चलाने वाले, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व आईएफएस अधिकारी कृष्ण मोहन को ट्रस्ट का अंतरिम महासचिव बना दिया गया है। वे पहले से ही ट्रस्ट में हैं। अब वे ट्रस्ट के संचालन का कामकाज देखेंगे। देशबन्धु में लीड के साथ छपी खबर के अनुसार, 73 वर्षीय कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। मूल रूप से हरदोई के रहने वाले कृष्ण मोहन वर्तमान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र के संघचालक हैं। उन्हें वर्ष 2025 में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया था। अब स्थायी महासचिव की नियुक्ति तक ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।
नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, ‘चंपत से भूल हुई, असावधानी से हुई चोरी। आज अखबारों में खबर यह भी है कि गहनों की चोरी नहीं हुई है और उन्हें प्रदर्शित किया गया। नवोदय टाइम्स में फोटो के साथ दो कॉलम की खबर का शीर्षक है, गहनों की चोरी के आरोप निराधार दान में दी गई सभी वस्तुएं सुरक्षित। (कोषाध्यक्ष) गोविन्द देव गिरि ने ट्रस्ट को दान में मिली 2800 वस्तुओं की सूची दिखाते हुए कहा कि सभी वस्तुएं सुरक्षित हैं। दैनिक भास्कर के अनुसार, ट्रस्ट ने यह भी एलान किया है कि भक्तों को मंदिर में दान किए गए कीमती सामान के वेरीफिकेशन की सुविधा दी जाएगी। इस तरह, माना जा सकता है कि अयोध्या के चढ़ावा विवाद पर पर्दा डाल दिया गया है। मामला शायद निपट जाए या निपटा मान लिया जाए। वैसे भी, अपनी तरह का यह पहला आर्थिक या वित्तीय घोटाला है जिसमें कोषाध्यक्ष पर आरोप लगभग नहीं रहा और अब वही कह रहे हैं कि सब ठीक है। रोज के आय-व्यय का ब्यौरा वे नहीं देखते थे क्योंकि वे पुणे रहते हैं। जाहिर है, गड़बड़ी अगर हुई है तो पहले के कर्ता-धर्ता के कारण और उन्हें अलग कर दिया गया है। भले खबर यह नहीं है कि गड़बड़ी के कारण उन्हें अलग किया गया है। अमर उजाला की खबर के अनुसार, ट्रस्ट के सदस्य और एफआईआर कराने वाले कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव चुन लिया गया है। ट्रस्ट की बैठक में निर्णय किया गया है कि मंदिर के प्रबंधन के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ की नियुक्ति की जाएगी इस संबंध में 22 जुलाई को फिर बैठक होनी है।
22 जुलाई की इसमें महासचिव और सीईओ की नियुक्ति पर विचार विमर्श होगा। सीईओ की नियुक्ति के बाद शायद गड़बड़ी नहीं हो लेकिन अभी भी कोषाध्यक्ष को अलग रखकर गड़बड़ी की गई है तो सीईओ को अलग रखकर भी गड़बड़ी हो सकती है या उनसे भी यही काम करवाया जा सकता है। जब शपथपूर्वक संवैधानिक पदों पर बैठे लोग गड़बड़ी कर रहे हैं तो किसी ट्रस्ट के निर्वाचित या चुने हुए सदस्य से क्या उम्मीज की जाए। आरोपों के बावजूद बख्श दिया जाना और दूसरा बलि का बकरा नियुक्त कर लिया जाना अलग मामला है लेकिन अभी वह सब खबर नहीं है। अभी सिर्फ सूचना है। आज और अभी तक छपी खबरों के अनुसार चढ़ावा चोरी की खबरों में चढ़ाए गए आभूषणों के गायब होने की खबर गलत थी और नकद जो चुराया गया उसकी जांच चल रही है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी और जो बड़े लोग जिम्मेदार माने या बताये जा रहे थे वे मंदिर ट्रस्ट के काम से मुक्त कर दिए गए हैं। दैनिक भास्कर ने जांच रिपोर्ट के हवाले से लिखा है, 42 दिन में चढ़ावे से चोरी की 70 घटनाएं हुईं। ट्रस्ट ने कहा है कि दान चोरी की घटना से छवि को नुकसान हुआ। (जारी)
आगे पढ़िए : इस रिपोर्ट का दूसरा हिस्सा द टेलीग्राफ की रिपोर्ट, चंपत राय के अलग होने को ट्रस्ट की सहमति है।
लिंक यह रहा : https://www.bhadas4media.com/the-telegraph-kee-khabar-champat-rai-ke-alag-hone-ko/
लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।



