विमल दीक्षित-
पांच साल पहले हमारे एक मित्र ने अपनी बीमारी के कारण पत्रकारिता को छोड़ दिया और खेती-बाड़ी देखने लगे। वह एक बड़े अखबार में मुख्य उपसंपादक थे। अधिकतर गांव में रहते हैं। जब भी कानपुर आते हैं फोन करते हैं तो बातचीत हो जाती है।
एक दिन मैंने पूछा तुम तो कानपुर के बड़े अखबारों में रह चुके हो, तमाम साथी रहे होंगे। उनसे बातचीत होती है। मायूस होकर बोले भैया हमसे कोई बात नहीं करना चाहता। जब तक अखबार में रहो तब तक सब साथी हैं अखबार छूट गया तो साथी भी छूट गए। फोन करो तो कोई उठाता नहीं। सामने दिख भी जाए तो कतरा के निकल जाते हैं। बड़ा खराब पेशा है।
मित्र की तरह यह बात तमाम वह लोग भी कहते दिखते हैं जो पत्रकारिता में लंबे समय तक रह चुके हैं। और तो और वे पत्रकार भी फोन उठाना नहीं चाहते जिन्होंने इस पेशे को तिलांजलि दे दी। पर गिनती के रिटायर्ड ऐसे पत्रकार भी है जिनको फोन करो तुरंत वह अटेंड करते हैं और अपने सुख दुख की बातें सुनते हैं।
ऐसे ही पत्रकार हैं गोपाल रावत। गोपाल जी का परिचय हरिद्वार से है। उनको कभी भी फोन करो। छुटते ही बोलेंगे हरिद्वार आ जाओ भाई। दो-चार दिन यहां रहो घूमो फिरो। गपशप भी करेंगे। बहुत दिनों से साथ नहीं बैठे। जहां रहना चाहो होटल में रहो या धर्मशाला में। रहने की व्यवस्था हो जाएगी।

गोपाल रावत जी का जिक्र यहां इसलिए किया जा रहा है कि वे केवल हरिद्वार के वरिष्ठतम पत्रकारों में से एक है बल्कि वह पूछने पर अखाड़ों, मठाधीशों कथित संतों सब के बारे में एक सांस में सब कुछ बता देंगे। पूरी कुंडली उनके पास रहती है। गोपाल रावत कई दशक दैनिक जागरण हरिद्वार के प्रभारी रहे। जिस समय की बात है उसे समय जनपद पत्रकारों को बहुत कम पैसे दिए जाते थे। पर रावत जी पर इसका कोई असर नहीं पड़ता।
हर की पैडी रोड पर जिला अस्पताल के सामने उनका एक टी स्टाल है। जिसमें कुछ समय वह बैठते हैं और कुछ समय उनके छोटे भाई। चाय की दुकान से भली प्रकार से रोटी पानी का इंतजाम हो जाता है। हरिद्वार का शायद ही कोई ऐसा पत्रकार हो जो दिन में गोपाल रावत से मिलने उनकी दुकान पर ना जाता हो। एक समय हिंदुस्तान के स्वर्गीय दुर्गा शंकर भाटी, नवभारत टाइम्स के स्वर्गीय कमल कान्त बुधकर.. गोपाल रावत की दुकान से ही बैठकर सारा काम निपटा देते थे।
बातचीत में गोपाल रावत बताते हैं कि उन्होंने जागरण के मालिक पूर्ण चंद गुप्ता से लेकर नरेंद्र मोहन तक को गंगा स्नान कराया। उस समय यह था की जागरण में काम करना है तो मालिकानों की मिजाज पुर्सी करो अन्यथा घर बैठो। अभी भी शायद होगा।
गोपाल की एक खासियत यह भी है जो भी पत्रकार उनकी दुकान पर पहुंचते है उन्हें तुरंत एक प्याला गरमा गरम चाय सर्व की जाती है यह बिल्कुल निशुल्क होती है। दूसरा प्याला अगर चाय मंगाई तो आपको पैसे ढीले करने पड़ेंगे।
गोपाल रावत का जिक्र इसलिए किया जा रहा है कि राम मंदिर चोरी कांड में तमाम नामी गिरामी लोगों का नाम आया। इनमें से कइयों का संबंध हरिद्वार से है। वे बताने से नहीं चूकेंगे कि कौन पाक साफ है और कौन बेईमान। पर पड़ी लकड़ी कोई नहीं लेना चाहता। शायद आज के दौर में गोपाल जी भी इससे बचें।
70 प्लस हो चुके गोपाल चंडीगढ़ के एक अखबार से जुड़े हैं। मगर देखने से वह आज भी 50 से अधिक नहीं लगते। और वह हरिद्वार से समाचार भेजते रहते हैं। अगर किसी पत्रकार बंधु को हरिद्वार के संबंध में खास तौर से अखाड़े, मठाधीश, महंत कथित भगवाधारी के बारे में जानकारी चाहिए तो आप उनसे दिन के समय कभी भी हरिद्वार में मिल सकते हैं।
गोपाल जी की खास बात यह है कि छोटा हो या बड़ा सभी पत्रकारों को बराबर सम्मान देते हैं फोन करेंगे तो जरूर उठाएंगे और हर संभव मदद भी करते हैं। आप अगर पत्रकार हैं तो हरिद्वार में जाकर गोपाल रावत से मिल सकते हैं और वहां के बारे में अच्छी जानकारी मिल सकती है।



