नई दिल्ली। टीवी रेटिंग एजेंसी BARC India की साप्ताहिक टीवी रेटिंग्स दोबारा शुरू होने का रास्ता अब केरल हाईकोर्ट में लंबित AIDCF की याचिका पर निर्भर करता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यदि यह कानूनी बाधा दूर हो जाती है तो उद्योग की उम्मीद से पहले ही BARC रेटिंग्स की वापसी संभव हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल फाउंडेशन (IBDF) के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। बैठक में BARC India के प्रतिनिधि भी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री को बताया कि BARC ने नई टीवी रेटिंग्स नीति-2026 के सभी प्रावधानों का पालन कर लिया है और संशोधित व्यवस्था के तहत काम शुरू करने के लिए तैयार है।
AIDCF की याचिका बनी सबसे बड़ी अड़चन
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मंत्री ने बैठक में कहा कि फिलहाल सबसे बड़ी बाधा ऑल इंडिया डिजिटल केबल फेडरेशन (AIDCF) द्वारा केरल हाईकोर्ट में दायर याचिका है। इस याचिका के कारण नई नीति के क्लॉज 5.4.1 पर रोक लगी हुई है।
यही क्लॉज ‘लैंडिंग पेज एक्सक्लूजन’ से संबंधित है। नई नीति के तहत टीवी चैनलों की रेटिंग में उन व्यूअरशिप आंकड़ों को शामिल नहीं किया जाना है, जो सेट-टॉप बॉक्स के डिफॉल्ट लैंडिंग पेज के कारण मिलते हैं।
अदालत की रोक के बाद रुकी थीं रेटिंग्स
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 8 मई को नई टीवी रेटिंग नीति जारी की थी। इसके बाद 13 मई को BARC ने लैंडिंग पेज एक्सक्लूजन का परिचालन ढांचा तैयार कर लिया था।
हालांकि, AIDCF और DEN Networks ने इस प्रावधान को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अदालत ने क्लॉज 5.4.1 पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके बाद मंत्रालय ने BARC को निर्देश दिया कि नई नीति के तहत संचालन की अनुमति मिलने तक साप्ताहिक टीवी रेटिंग्स प्रकाशित न की जाएं।
केस वापस लेने या समाधान पर निर्भर करेगा फैसला
सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि AIDCF अपनी याचिका वापस ले लेता है या ऐसा संशोधन करता है जिससे लैंडिंग पेज एक्सक्लूजन लागू हो सके, तो BARC को नई नीति के तहत अनुमति मिलने का रास्ता आसान हो जाएगा। लेकिन यदि मामला अदालत में लंबा चलता है तो टीवी रेटिंग्स पर लगी रोक भी जारी रह सकती है।
BARC को बंद करने का इरादा नहीं
सूत्रों के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य BARC का संचालन बंद करना नहीं है। नई नीति में BARC की भूमिका बरकरार रखी गई है, लेकिन निगरानी व्यवस्था को और सख्त बनाया गया है। इसके तहत पैनल का विस्तार, अधिक प्लेटफॉर्म को शामिल करना और ऑडिट संबंधी नियमों को मजबूत किया गया है।
उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि मंत्रालय ऐसी स्थिति में रेटिंग्स दोबारा शुरू नहीं करना चाहता, जहां लैंडिंग पेज व्यूअरशिप बाजार को प्रभावित करती रहे। ऐसे में BARC की रेटिंग्स की वापसी अब काफी हद तक AIDCF की याचिका के भविष्य पर निर्भर करेगी।



