
गोरखपुर : लखनऊ और कानपुर में पेशेवर महिलाओं के माध्यम से लोगों पर फर्जी दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज कराने वाले गैंग के खुलासे के बाद अब गोरखपुर से भी ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के कई पत्रकारों और पुलिसकर्मियों के इस गैंग से जुड़े होने की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। इस मामले में इस गैंग के खिलाफ एक मुकदमा अज्ञात में पहले से ही दर्ज था, परंतु पुलिस द्वारा धीमी कार्यवाही को देखते हुए पत्रकार सत्येन्द्र द्वारा इस हनीट्रैप गैंग संचालित करने वाले पेशेवर बदमाश इक़रार अहमद तथा उसके गुर्गों के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम), गोरखपुर की अदालत में एक प्रार्थना पत्र लगभग ढाई महीने पहले प्रस्तुत कर दिया गया था।
अदालत के निर्देश पर जो पुलिस रिपोर्ट सामने आई, उस रिपोर्ट में पत्रकार सत्येन्द्र द्वारा उपलब्ध कराए गए कई महत्वपूर्ण तथ्यों एवं साक्ष्यों की पुष्टि का उल्लेख किया गया है। न्यायालय के आदेश पर जब पुलिस जाँच का शिकंजा कसने लगा तब इस प्रकरण की न्यायिक जांच के दौरान अब सोशल मीडिया पर वायरल हुई कथित चैट और रिकॉर्डिंग ने नया बवाल खड़ा कर दिया है। वायरल चैट में कचहरी परिसर के भीतर ही वादी पक्ष पर हमले की योजना बनाए जाने की बात सामने आई है जो न्यायालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है। इस मामले में पत्रकार सत्येन्द्र ने प्रशासनिक न्यायाधीश इलाहाबाद हाइकोर्ट को पत्र लिखकर अवगत कराया है।
क्या है पूरा मामला?
वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के बाद गोरखपुर में करोड़ों की बेची गयी वक्फ जमीन पर खोजी पत्रकार सत्येन्द्र द्वारा साक्ष्य आधारित खबर का सिलसिलेवार प्रसारण किया गया था। जिसके बाद 29 अक्टूबर 2025 को उत्तर प्रदेश से बाहर दिल्ली राज्य में सक्रिय एक हनीट्रैप गैंग को गोरखपुर के एक अधिवक्ता तथा तीन पत्रकारों के विरुद्ध फर्जी गैंगरेप का मुकदमा दर्ज कराने के लिए सुपारी दे दी गई। इस संबंध में थाना चिलुआताल में अज्ञात के विरुद्ध मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में पत्रकार सत्येंद्र कुमार ने विभिन्न दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और अन्य प्रमाणों के साथ सीजेएम गोरखपुर की अदालत में धारा 173(4) के तहत इस घटना का जिम्मेदार ठहराते हुए पेशेवर बदमाश इक़रार अहमद तथा उसके गैंग के खिलाफ प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिस पर अदालत ने पुलिस को विस्तृत जांच के निर्देश दिए। याचिका के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट का वह आदेश भी संलग्न किया गया था, जिसमें फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वाले संगठित गिरोहों पर कठोर कार्रवाई की आवश्यकता इलाहाबाद हाइकोर्ट द्वारा व्यक्त की गई थी।
कौन है पेशेवर बदमाश इक़रार अहमद?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इक़रार अहमद पर गोरखपुर में हत्या, असलहा तस्करी, मारपीट, तोड़फोड़, बलवा, हनीट्रैप गैंग संचालन तथा आपराधिक साजिश के मुकदमे दर्ज हैं। इसके अतिरिक्त देशविरोधी नारे लगाने के मामले में भी गोरखपुर पुलिस द्वारा इक़रार के खिलाफ कार्यवाही की जा चुकी है। इक़रार अहमद की गैंग में जर्नलिस्ट प्रेस क्लब गोरखपुर के कुछ पत्रकारों के भी संलिप्त होने के प्रमाण सामने आए हैं। जर्नलिस्ट प्रेस क्लब की संलिप्तता पेशेवर बदमाश इक़रार अहमद से यूं ही उजागर नहीं हुई बल्कि कुछ महीने पूर्व प्रेस क्लब के शपथ ग्रहण समारोह में सीएम योगी का आगमन हुआ। और सीएम योगी के कार्यक्रम में पेशेवर अपराधी इक़रार अहमद की उपस्थिति हो गयी।
इस घटना ने काफी हलचल पैदा की और खूब हो हल्ला मचा। सवाल खड़े हुए और जाँच भी हुई। अन्ततः इस मामले में प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार द्विवेदी को आम सभा की बैठक में खेद व्यक्त करना पड़ा। अदालत के समक्ष दिए गए प्रार्थना पत्र में इक़रार अहमद के लिए काम करने वाले गैंग सदस्य के रूप में पत्रकार फैय्याज अहमद, सुभाष गुप्ता और जफर खान का नाम विशेष तौर पर शामिल है। और बाद में इन्हीं लोगों द्वारा अदालत से निकले जांच के आदेश के बाद अपने सोशल मीडिया हैंडल से वादी पत्रकार सत्येन्द्र को पेट्रोल डालकर जला देने की धमकी देकर सनसनी फैल दी।
पत्रकार सत्येन्द्र ने केंद्रीय गृह सचिव को भेजा डोजियर
केंद्रीय गृह सचिव को भेजे गए डोजियर मे पत्रकार सत्येन्द्र ने लखनऊ और कानपुर की घटना की तरह इस गैंग में भी कुछ पत्रकारों के अतिरिक्त कुछ पुलिसकर्मियों की संलिप्तता होने की बात कही है और इस सम्बंध में साक्ष्य प्रस्तुत करने का आश्वासन भी दिया है। डोजियर में बताया गया है कि सीओ कोतवाली सर्कल के संरक्षण में इक़रार अहमद पर दर्ज गंभीर मुकदमों की फाइल को सर्कल पुलिस ने गायब कर दिया और इक़रार अहमद की वास्तविकता को छिपाते हुए उसके असलहे और पासपोर्ट का नवीनीकरण पिछले 10 सालों से कराया जाता रहा है। इसके साथ डोजियर में इक़रार अहमद द्वारा गोरखपुर स्थित दरगाह की आड़ में अवैध मदरसे, हनीट्रैप गैंग संचालन, देशविरोधी गतिविधियां, अवैध फंडिंग तथा देश विरोधी मुल्क की यात्राओं के साथ ही इस गैंग के संरक्षणदाता और पत्रकारों समेत अन्य तथ्यों का खुलासा सिलसिलेवार ढंग आए किया है।
जाँच प्रभावित करने का पैंतरा.. गवाह और शिकायतकर्ता पर डकैती का मुकदमा
पत्रकार सत्येन्द्र द्वारा छह माह पूर्व से ही विभिन्न स्तर पर पत्र प्रेषित कर जिम्मेदारों को अवगत कराया जाता रहा है कि जैसे-जैसे पेशेवर बदमाश इक़रार अहमद के विरुद्ध जांच आगे बढ़ी रही है, वैसे-वैसे उन पर दबाव बनाने के प्रयास तेज होते जा रहे है। इसके अलावा कोतवाली पुलिस को फर्जी मुकदमों का जिम्मेदार बताते हुए पत्रकार सत्येन्द्र द्वारा दो महीने पूर्व ही इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका डाली जा चुकी है। दूसरी तरफ इक़रार अहमद गैंग के सदस्य जफर खान ने 7 जून 2026 को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर पत्रकार सत्येन्द्र के विषय में लिखा कि (“यह बहुत जल्द जेल जाने वाला है”)। और इसके ठीक पाँच दिन बाद 13 जून 2026 को पत्रकार सत्येन्द्र पर दबाव बनाने की रणनीति के तहत लगभग 9 महीने पुरानी घटना को आधार बनाकर सत्येन्द्र कुमार (वादी, पत्रकार, शिकायतकर्ता तथा गवाह) शाहिद (वादी मुकदमा) जमशेद (गवाह तथा सम्पादक) सबके विरुद्ध एक साथ डकैती, अपहरण और हत्या के प्रयास जैसे गंभीर आरोपों में नया मुकदमा दर्ज थाना कैंट में दर्ज करा दिया गया।
पत्रकार सत्येन्द्र ने बताया है कि यह कार्रवाई बिना किसी जांच के बेहद गुपचुप तरीके से इक़रार अहमद के संरक्षणदाता सीओ कोतवाली सर्कल पुलिस की सिफारिश पर की गई है। सुप्रीम कोर्ट का यह सिद्धांत पहले ही दिया जा चुका है कि यदि शिकायत में 3 माह से अधिक का विलंब हो और उसका संतोषजनक स्पष्टीकरण न हो, तो पहले प्रारंभिक जांच की जानी चाहिए। यह प्रकरण तो पत्रकारों और संपादक से जुड़ा है!
इसके अतिरिक्त यह प्रकरण न्यायालय में भी विचाराधीन है और जिनके खिलाफ डकैती का मुकदमा लिखा गया है, वो तो इक़रार अहमद एंड गैंग के खिलाफ वादी मुकदमा शिकायतकर्ता और गवाह हैं। मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला के बारे में भी यही बताया जा रहा है कि वह इक़रार अहमद के कथित हनीट्रैप नेटवर्क से जुड़ी हुई है, तथा इस वादी मुकदमा महिला का इस्तेमाल इससे पूर्व में पाँच सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए इक़रार अहमद द्वारा किया जा चुका है। इस सम्बंध में पत्रकार सत्येन्द्र ने एसएसपी गोरखपुर से 9 महीने पूर्व दिखाई गई घटना के दिन की सीडीआर तथा पुलिस थाने की सीसीटीवी संरक्षित करने का निवेदन किया है।
कौन हैं पत्रकार सत्येन्द्र?

पत्रकार सत्येन्द्र खोजी पत्रकारिता के जरिये बड़ी बेबाकी से अब तक कई आपराधिक नेक्सस और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों का खुलासा कर चुके हैं। पत्रकार सत्येन्द्र सिस्टम का सच वेबसाइट मीडिया के फाउंडर हैं। साथ ही ला ग्रेजुएट और वर्तमान में प्रेस क्लब गोरखपुर के कार्यकारिणी सदस्य भी हैं।
पत्रकार सत्येन्द्र का कहना है कि कई लोगों का जीवन तबाह कर चुके इस गैंग और इससे जुड़े जर्नलिस्ट प्रेस क्लब के पत्रकारों और पुलिसकर्मियों को जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की तैयारी है। ताकि कथित हनीट्रैप गैंग, उससे जुड़े लोगों, संरक्षण देने वालों तथा न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों की निष्पक्ष जांच कराकर जिम्मेदार व्यक्तियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।



