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वेब-सिनेमा

रील बनाइए, वीडियो बनाइए, सोशल मीडिया यूज़ कीजिए पर इसे करियर न बनाइये!

मनोज अभिज्ञान-

युवाओं से एक जरूरी बात! रीलबाज़ी को करियर मत बनाइए।

रील बनाइए, वीडियो बनाइए, सोशल मीडिया का इस्तेमाल कीजिए। लेकिन इसे अपनी ज़िंदगी, अपने करियर का प्लान मत बनाइए।

सोशल मीडिया आपको सफलता दिखाता है, संभावना नहीं। आपको वही 100 लोग दिखाई देते हैं जिन्होंने करोड़ों कमा लिए। वे 10 लाख लोग दिखाई नहीं देते जो हर दिन वीडियो डाल रहे हैं और बदले में कुछ सौ रुपये भी नहीं कमा पा रहे।

क्रिएटर इकोनॉमी में कमाई बेहद असमान है। टॉप 1% क्रिएटर्स कुल आय का लगभग 43% अपने पास ले जाते हैं, जबकि टॉप 10% के हिस्से में 80% से अधिक कमाई चली जाती है। बाकी लाखों लोग बचे हुए हिस्से के लिए संघर्ष करते हैं।

दुनिया भर में आधे से अधिक क्रिएटर्स साल भर में 15,000 अमेरिकी डॉलर से भी कम कमा पाते हैं, और केवल लगभग 4% क्रिएटर्स ही एक लाख डॉलर सालाना से अधिक की आय तक पहुँचते हैं।

यानी जिस दुनिया को देखकर आप अपना करियर चुन रहे हैं, वहाँ जीतने वालों की कहानियाँ हर दिन दिखाई जाती हैं, लेकिन हारने वालों का डेटा कभी वायरल नहीं होता।

एक और बात समझिए। डॉक्टर की डिग्री कोई एल्गोरिदम नहीं छीन सकता। वकील की प्रैक्टिस किसी ऐप के अपडेट से खत्म नहीं होती। इंजीनियर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, शिक्षक या मशीन ऑपरेटर की स्किल किसी प्लेटफ़ॉर्म की पॉलिसी बदलने से बेकार नहीं हो जाती। लेकिन सोशल मीडिया पर आपका पूरा करियर एक एल्गोरिदम, एक पॉलिसी या एक अकाउंट सस्पेंशन पर निर्भर हो सकता है।

इसलिए अगर आपको वीडियो बनाना पसंद है, तो ज़रूर बनाइए। लेकिन पहले अपने भीतर ऐसी स्किल पैदा कीजिए जिसकी मार्केट में स्वतंत्र कीमत हो। फिर सोशल मीडिया का इस्तेमाल उस स्किल को दुनिया तक पहुँचाने के लिए कीजिए। मोबाइल कैमरा आपका करियर नहीं है। वह आपके करियर का विज्ञापन हो सकता है।

याद रखिए, सभ्यताएं रील्स से नहीं, रियल स्किल्स से बनती हैं।

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