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ताज्जुब है, एथेनॉल ब्लेडिंग के फायदे बताने के लिए टीवी चैनल शोज़ क्यों नहीं कर रहे हैं?

Cartoon of Modi and a man at a car repair shop, cutting a red ribbon for a grand opening; speech bubble reads 'स्टार्टअप इंडिया में आपका योगदान प्रशंसनीय है'.

नई दिल्ली। पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण (E20) को मोदी सरकार ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय और पर्यावरण के लिए बड़ा कदम बताती रही है। लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि जब एथेनॉल नीति को लेकर आयात, वाहन इंजनों पर असर और औद्योगिक मांग जैसे मुद्दों पर बहस तेज है, तब देश के बड़े टीवी चैनलों की प्राइम-टाइम डिबेट में इन पहलुओं पर गंभीर चर्चा क्यों नहीं हो रही?

सरकार का दावा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से किसानों की आय बढ़ेगी, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी और प्रदूषण कम होगा। दूसरी ओर, आलोचकों का कहना है कि ईंधन क्षेत्र में बढ़ती एथेनॉल खपत के कारण कॉस्मेटिक, केमिकल और फार्मा उद्योग के लिए एथेनॉल की उपलब्धता प्रभावित हुई है और कुछ जरूरतों के लिए आयात का सहारा लेना पड़ रहा है।

इसके साथ ही E20 ईंधन के पुराने वाहनों पर संभावित प्रभाव, रखरखाव लागत और इंजन की अनुकूलता जैसे मुद्दे भी समय-समय पर उठते रहे हैं। बावजूद इसके, टीवी चैनलों की प्राइम-टाइम बहसों में इन सवालों को अपेक्षित जगह नहीं मिल रही है।

मीडिया पर नजर रखने वाले कुछ लोगों का कहना है कि सरकार की कई योजनाओं पर लंबे-लंबे विशेष कार्यक्रम करने वाले प्रमुख एंकरों और चैनलों ने एथेनॉल नीति के दावों और उससे जुड़े विवादों की उतनी गहराई से पड़ताल नहीं की, जितनी अन्य राजनीतिक मुद्दों की करते हैं।

डीडी न्यूज में बैठे सुधीर चौधरी के डिकोड की बहसों में भी एथेनॉल नीति के फायदे और उससे जुड़े विवाद दोनों पर विस्तृत चर्चा क्यों नहीं दिखाई देती।

हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि किसी एंकर या चैनल का किसी विषय पर सीमित कवरेज होना अपने-आप में यह साबित नहीं करता कि उसने जानबूझकर उस विषय से परहेज किया। अलग-अलग चैनल अपनी संपादकीय प्राथमिकताओं के आधार पर विषय चुनते हैं।

फिर भी, एथेनॉल नीति से जुड़े आर्थिक, कृषि, औद्योगिक और तकनीकी पहलुओं पर व्यापक सार्वजनिक बहस की मांग लगातार उठ रही है। ऐसी स्थिति में यह सवाल बना हुआ है कि क्या टीवी मीडिया इस मुद्दे के सभी पक्षों को पर्याप्त स्थान दे रहा है, या बहस अभी भी अधूरी है।


राकेश कायस्थ-

मुझे ताज्जुब है, एथेनॉल ब्लेडिंग के फायदे बताने के लिए टीवी चैनल शोज़ क्यों नहीं कर रहे हैं। एथेनॉल ब्लेडिंग से किसान आत्मनिर्भर हो रहा है। भारत नहीं बल्कि अमेरिका तक का।

क्या आपको मालूम है कि गडकरी साहब ने जब पेट्रोल में एथेनॉल मिलवाना शुरू किया है, कॉस्मेटिक, केमिकल और फार्मा सेक्टर में एथेनॉल की किल्लत हो गई है और इसके लिए हमें अमेरिका से आयात करना पड़ रहा है।

यानी अमेरिकी कृषि मंत्री का दावा ठीक था। जल्द ही मोदीजी का न्यू इंडिया अमेरिकी किसानों की आमदनी दोगुनी करेगा।

दूसरी तरफ भारत में गाड़ियों की जो हालत हो रही है, उसे देखते हुए मोदी सरकार देश में खुलने वाली हर गैरेज को स्टार्ट अप इंडिया में शामिल करने की नीति ला सकती है।

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