महिपाल सिंह-
मुरादाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बिचौलिए पसंद नहीं” और वे मतदाताओं से सीधा संपर्क रखना चाहते हैं, विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के इस कथित बयान को लेकर स्थानीय पत्रकारों में गहरी नाराज़गी देखी गई है। प्रधानमंत्री के हालिया विदेशी दौरे के दौरान न्यूजीलैंड के एक पत्रकार ने पूछा था कि पीएम मोदी प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों नहीं करते, जिसके जवाब में विदेश मंत्रालय में सचिव (ईस्ट) रुद्रेंद्र टंडन ने कथित तौर पर कहा कि भारतीय राजनेता मतदाताओं से सीधा संपर्क पसंद करते हैं और उन्हें यह नागवार गुज़रता है कि कोई उन्हें नीचा दिखाए या बिचौलियों के माध्यम से बात करे।
इस बयान पर उत्तर प्रदेश वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन तथा मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। यूनियन सचिव डॉ संतोष गुप्ता ने कहा कि पत्रकार समुदाय को मीडिएटर या बिचौलिया बताना पत्रकारिता की गरिमा और उसकी संवैधानिक भूमिका, दोनों की अनदेखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पत्रकार न तो मीडिया हैं और न ही सत्ता व जनता के बीच के बिचौलिए, बल्कि वे प्रेस हैं और विशुद्ध रूप से पत्रकार हैं, जिनका मूल दायित्व जनता की तकलीफों, दुश्वारियों और अधिकारों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाना तथा सरकार से जवाबदेही मांगना है।
डॉ गुप्ता ने पत्रकारों और संवाददाताओं को ‘मीडिया’ कहकर संबोधित किए जाने के बढ़ते चलन पर भी गहरी चिंता जताई और कहा कि यह शब्द जानबूझकर पत्रकारिता की स्वतंत्र और सवाल पूछने वाली भूमिका को कमज़ोर करने के लिए गढ़ा गया प्रतीत होता है।
डॉ गुप्ता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मुरादाबाद दौरों के दौरान पत्रकारों के साथ हुए बर्ताव का भी ज़िक्र किया। उन्होंने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह के कार्यकाल में मुरादाबाद के पत्रकारों को मुख्यमंत्री से मिलने से रोकने के लिए कमरे में बैठे पत्रकारों को बाहर से कुंडी लगाकर रोक दिया गया था। हाल ही में हुए मुख्यमंत्री के दौरे में भी स्थानीय पत्रकारों को उनसे सीधा राब्ता नहीं करने दिया गया, जिससे प्रशासनिक स्तर पर पत्रकारों के प्रति उपेक्षा का रवैया एक बार फिर उजागर हुआ। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधि और प्रशासन दोनों ही पत्रकारों को दूरी पर रखने की नीति अपनाते हैं, तो प्रधानमंत्री के प्रेस कॉन्फ्रेंस से बचने वाले बयान भी इसी बड़ी प्रवृत्ति की एक कड़ी नज़र आते हैं।
समिति से जुड़े पत्रकारों ने कहा कि पत्रकारिता का काम सरकार को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि तथ्यों के आधार पर उसकी नीतियों और कार्यशैली की समीक्षा करना है, और इसे बिचौलियापन कहकर खारिज करना पत्रकारों के संवैधानिक अधिकार तथा लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की भूमिका पर सीधा प्रहार है। डॉ गुप्ता ने मांग की कि प्रशासन और शासन, दोनों स्तर पर पत्रकारों के साथ बैरिकेडिंग और दूरी बनाने की प्रवृत्ति पर रोक लगे, तथा प्रधानमंत्री कार्यालय नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस की परंपरा बहाल करे, ताकि जनता के सवालों का सीधा और पारदर्शी जवाब मिल सके। इस पूरे प्रकरण को लेकर मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति तथा स्थानीय प्रेस क्लब संगठनों ने भी रोष व्यक्त करते हुए गहरी निराशा जताई है।



