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छत्तीसगढ़

ई20 प्रकरण: रायपुर के इस डॉक्टर को मारूति कंपनी 20,50,494 रुपये देगी या नई कार!

Close-up of a gas pump nozzle with red liquid on the grip; E20 label visible and News36 watermark.

रायपुर के जिला उपभोक्ता फोरम ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। सड्डू निवासी डॉ. प्रेमराज देवता ने जून 2024 में ‘ग्रैंड विटारा’ कार खरीदी थी, जो एथेनॉल मिश्रित (E-20) पेट्रोल के कारण बार-बार खराब हो रही थी। लैब जांच में सामने आया कि पेट्रोल खराब नहीं था, बल्कि कार का इंजन देश में मिल रहे E-20 पेट्रोल के अनुकूल (कंफर्टेबल) नहीं था।

फोरम का आदेश

निर्माता कंपनी और डीलर ग्राहक को 45 दिनों के अंदर E-20 सपोर्ट करने वाली नई कार दें या वाहन की पूरी कीमत ₹20,50,494 लौटाएं।मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और केस खर्च के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा भी दिया जाए। देश में एथेनॉल पेट्रोल को लेकर यह अपनी तरह का पहला और ऐतिहासिक फैसला है, जो ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए एक बड़ी नजीर बनेगा।


अनवर बरेलवी-

बड़ी कामयाबी… यह हैं छत्तीसगढ़ के रायपुर निवासी डॉ प्रेमराज देबता। एथनॉल मिले पेट्रोल से गाड़ी खराब होने के मुद्दे पर सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच इन्होंने वो कर दिखाया है जिसकी अभी तक किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।

Male doctor in a white coat with a stethoscope around his neck, sitting at a desk in a clinic and smiling at the camera.

डॉ प्रेमराज ने जून 2024 में मारुति कंपनी की ग्रैंड विटारा आईईई स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस एसयूवी कार ख़रीदी थी। कम्पनी के मुताबिक यह कार जनवरी 2023 में निर्मित हुई थी।

गाड़ी में बार-बार तकनीकी ख़राबी आने के बाद उन्होंने रायपुर की ज़िला उपभोक्ता विवाद अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने कहा कि एक शाम जब मैं अपने क्लिनिक से निकल रहा था, तभी मेरी गाड़ी अचानक बंद हो गई. उसे कंपनी के सर्विस सेंटर ले जाया गया, जहां बताया गया कि पेट्रोल में मिलावट है. ऐसा कई बार हुआ. बाद में हमने सरकारी प्रयोगशाला में जांच कराई, तो पता चला कि सफ़ेद दही जैसा जमा हुआ पदार्थ वास्तव में इथेनॉल था।

उनका आरोप था कि कार ख़रीदते समय उन्हें यह नहीं बताया गया कि कार का इंजन ई20 पेट्रोल के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं है. उनका कहना था कि अगर कार के उपयोग को लेकर कोई विशेष सावधानी बरतना ज़रूरी था, तो इसकी स्पष्ट जानकारी बिक्री के समय दी जानी चाहिए थी।

सभी पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद ज़िला उपभोक्ता अदालत ने अपने आदेश में कहा कि डॉक्टर प्रेमराज देब्ता ने 3 जून 2024 को जो वाहन ख़रीदा था, उसका इंजन 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) पर चलने के लिए उपयुक्त नहीं था।

अदालत ने मारुति सुज़ुकी को निर्देश दिया कि वह 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की ख़राब कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 फ़्यूल पावर्ड कार उपलब्ध कराए।

अगर कंपनी ऐसा नहीं करती है, तो उसे वाहन की क़ीमत 18.29 लाख रुपये, आरटीओ शुल्क 1,86,850 रुपये और बीमा प्रीमियम 34,644 रुपये, यानी कुल 20,50,494 रुपये लौटाने होंगे।

इसके साथ ही मानसिक क्षति के लिए एक लाख रुपये तथा वाद-व्यय के रूप में 10 हज़ार रुपये का भुगतान भी करना होगा।

यह फैसला जहाँ ई20 पेट्रोल से परेशान वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत ला सकता है, वहीं वाहन निर्माता कम्पनियों के लिए बड़ी मुसीबत भी पैदा कर सकता है।

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