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आज के अखबार : ED, CBI और सॉलिसिटर जनरल विपक्ष के पीछे लगे रहे, जज साब गैस एजेंसी चलाते रहे

Newspaper front page reporting a High Court judge, later Manipur Chief Justice, allegedly kept an LPG dealership during tenure; bold headline dominates the page.

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर

संजय कुमार सिंह

आज जब कंप्रोमाइज्ड प्रधानमंत्री से लेकर हरदीप पुरी, धर्मेन्द्र प्रधान और अब नितिन गडकरी पर कोई खबर नहीं है। पेट्रोल में इथैनॉल मिलाने, ई20 बेचने की जल्दी और जबरदस्ती पर कोई खबर नहीं है, मर्सिडीज, ऑडी और टोयोटा जैसी गाड़ियों के खिलाफ सही-गलत प्रचार का कोई फॉलोअप नहीं है तब टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड बताती है कि एक हाईकोर्ट जज (अब रिटायर)  गैस एजेंसी चलाते रहे। 24 अगस्त 2030 के लिए वैध और जारी उनका वितरण करार 6 जुलाई को रद्द कर दिया गया है। सीबीआई-ईडी भाजपा सेवा का अपना काम कर रही है। द टेलीग्राफ की लीड के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस नेता और विधायक मदन मित्रा बागी ऋतब्रत मित्रा के पाले में चले गए हैं। इनकी पत्नी और दो बेटों को मंगलवार को ईडी का समन मिला और उन्होंने ममता बनर्जी को एक शब्द, ‘सॉरी’ का संदेश भेजा और पाला बदल लिया। अब वे अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को हिटलर जैसा बता रहे हैं। आज जब मेरे 10 अखबारों के पहले पन्ने पर उल्लेखनीय गैर सरकारी खबरों का भारी अकाल है तो इंडियन एक्सप्रेस की लीड भी दिलचस्प है। वैसे तो यह खबर दूसरे अखबारों में भी है लेकिन इंडियन एक्सप्रेस में लीड है यह भी अपने आप में एक खबर है। इस खबर के अनुसार, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने बुधवार को परिसीमन विधेयक के बारे में संसद सत्र से पहले अपने विचार रखे औऱ कहा कि विकल्प खुले हैं। फ्लैग शीर्षक है, कहा कि सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीटें बढ़ेगी तो इसका समर्थन कर सकती है। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का इंट्रो है, कहा कि इंडिया ब्लॉक मिलकर निर्णय करेगा, दलबदल की चर्चा को नजरअंदाज किया। खबरों के अनुसार, सुप्रिया सुले ने उन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया जा रहा था कि उनकी पार्टी संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन करेगी या फिर एनडीए में शामिल होने जा रही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर मुंबई डेटलाइन से आलोके देशपांडे को बाईलाइन वाली है। इसके अनुसार, उन्होंने विपक्षी दलों में एक और टूट का संकेत दिया है। सुले ने यह भी कहा बताते हैं कि इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। मुंबई में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रिया सुले ने कहा कि इन खबरों में कोई सच्चाई नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी को परिसीमन विधेयक को लेकर न तो कोई प्रस्ताव मिला है और न ही किसी तरह की कोई ‘डील’ हुई है। जब विधेयक का आधिकारिक मसौदा संसद में पेश होगा, तब पार्टी उसका विस्तार से अध्ययन करेगी और 24 घंटे के भीतर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगी।

पत्रकारिता जब इतनी बंटी, बिखरी और लाचार है तब आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड के अनुसार, अमेरिका ने हमलों की धूम मचा दी है, ईरान ने कहा है, ‘अस्तित्व के युद्ध’ में है। द हिन्दू की लीड के अनुसार, अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने क्षेत्रीय तेल बंदी की चेतावनी दी है। एक और खबर की चर्चा की जा सकती है जो कई दिनों से रह जा रही थी। मणिपुर हो या कुछ और, कई बार ऐसी खबरें तभी दिखती हैं जब दूसरी खबर नहीं होती है। दि एशियन एज में मणिपुर की खबर दो कॉलम की फोटो के साथ पांच कॉलम में छपी है। शीर्षक है, भीड़ ने मणिपुर में असम राइफल्स के कैम्प में तोड़-फोड़ की। तलाशी अभियान के बाद वाहनों में आग लगा दी टकराव के बाद सेनापति शहर में तनाव। आज ऐसी ही एक खबर कश्मीर से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की है। कई दिनों से छप रही है लेकिन आम अनशन पर सरकार और मीडिया भी मौन है तो विपक्ष के मुख्यमंत्री की क्या कहें। ईडी-सीबीआई नहीं लगी है यही खबर है। आप जानते हैं कि 5 अगस्त 2019 को जब कश्मीर से धारा 370 हटाई गई तभी जम्मू व कश्मीर नामक राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था। भारतीय जनता की उसी पार्टी ने ऐसा किया है जो विपक्ष में थी तो राजधानी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने-दिलाने की बात करती थी। खुद सत्ता में थी, पुलवामा के बाद पूरी ताकत में थी तो राज्य को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया। सोनम वांगचुक इसका विरोध करके जेल काट आए और सरकार का विरोध करने के कारण आमरण अनशन में फंसे हुए हैं तब उमर अब्दुल्ला भी पूर्ण राज्या का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। काफी समय से। आज की खबर के अनुसार, विरोध प्रदर्शन की अनुमति के बिना भी 19 जुलाई को दिल्ली आएंगे। यह सब तब है जब देहरादून में राहुल गांधी की रैली के लिए डबल इंजन सरकार ने अनुमति देकर भी वापस ले ली  है। रैली के लिए दूसरी जगह दी है। इससे और कुछ हो या नहीं, रैली में शामिल होने वालों के मन में कई तरह की शंका होती है। उपस्थिति कम हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार के तहत देहरादून शहर प्रशासन ने 17 जुलाई 2026 को परेड ग्राउंड में प्रस्तावित राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम की अनुमति दी थी जो रद्द कर दी गई है। रैली से पहले मंच का सामान नहीं रखने दिया गया क्योंकि तब के लिए अनुमति नहीं थी। बाद में जिलाधिकारी ने परेड ग्राउंड में पहले से चल रहे केंद्र सरकार के कार्यक्रम को 17 जुलाई तक बढ़ाने का हवाला देकर अनुमति रद्द कर दी। केंद्र सरकार का कार्यक्रम जो भी हो, जैसा भी हो उसके बावजूद प्रशासन ने फीस ली थी, जो जमा करवाई गई और कार्यक्रम चलते रहने के बावजूद अनुमति के समय से पहले सामान पहुंच गए जिसे रोक दिया गया। अनुमति तो बाद में रद्द हुई और दूसरी जगह के लिए मिली। कांग्रेस ने सामान्य से ज्यादा 1.77 लाख रुपये की फीस जमा लेने के बावजूद अनुमति वापस लेने को राजनीतिक साजिश करार दिया है। आरोप लगाया है कि सरकार राहुल गांधी के छात्रों के साथ संवाद से डर रही है। भारी विरोध प्रदर्शन और विवाद के बाद अब यह कार्यक्रम परेड ग्राउंड की बजाय बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित किया जाएगा। यह खबर आज पहले पन्ने पर तो नहीं ही होनी थी। अंग्रेजी अखबारों में हिन्दुस्तान टाइम्स ने देश में फोन निर्माण के लिए 62,000 करोड़ की सरकारी योजना की खबर को सेकेंड लीड बनाया है। अंग्रेजी में किसी अन्य ने इस खबर को इतना महत्व नहीं दिया है। द हिन्दू ने कुडनकुलम परमाणु प्लांट का डाटा लीक होने की खबर को सेकेंड लीड बनाया है। नवोदय टाइम्स में यह लीड के साथ या बराबर की खबर है। लीड का शीर्षक है, सेमी कंडक्टर के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपए मंजूर। अमर उजाला की खबर है, ट्रस्ट ने बरामद की थी अधिक रकम, एसआईटी को कम बताई। दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है, रूसी तेल खरीद… ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ की तैयारी में। इसके साथ भारत इनसाइट का शीर्षक है, भारत पर 15 प्रतिशत टैरिफ डेडलाइन 24 जुलाई को खत्म होगी, ट्रम्प डील का दबाव बना रहे हैं। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, वांगचुक का अनशन तुड़वाने की कोर्ट से गुहार। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र व दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। 

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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